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अंग्रेजी में 'THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER A LAZY DOG' एक प्रसिद्ध वाक्य है।

कहा जाता है कि इसमें अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर समाहित कर लिए गए। जबकि यदि हम ध्यान से देखे तो आप पायेंगे कि अंग्रेजी वर्णमाला में कुल 26 अक्षर ही उपलब्ध हैं, जबकि उपरोक्त वाक्य में (1/24)
33 अक्षर प्रयोग किये गए हैं। जिसमे चार बार O का प्रयोग A, E, U तथा R अक्षर के क्रमशः 2 बार प्रयोग दिख रहे हैं। अपितु अक्षरों का क्रम भी सही नहीं है।

आप किसी भी भाषा को उठा के देखिए, आपको कभी भी संस्कृत जितनी खूबसूरत और समृद्ध भाषा देखने को नहीं मिलेगी।

संस्कृत वर्णमाला (2/24)
के सभी अक्षर एक श्लोक में व्यवस्थित क्रम में देखने को मिल जाएगा...

क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोऽटौठीडढण:।
तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोऽरिल्वाशिषां सह।।

अनुवाद: पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर (3/24)
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#संस्कृत_के_बारे_में_रोचक_तथ्य
1. मात्र 3,000 वर्ष पूर्व तक भारत में संस्कृत बोली जाती थी तभी तो ईसा से 500 वर्ष पूर्व पाणिणी ने दुनिया का पहला व्याकरण ग्रंथ लिखा था,जो संस्कृत का था। इसका नाम ‘अष्टाध्यायी’ है।
2. संस्कृत,विश्व की सबसे पुरानी पुस्तक (ऋग्वेद) की भाषा है। इसलिये
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इसे विश्व की #प्रथम भाषा मानने में कहीं किसी संशय की संभावना नहीं है।
3. इसकी सुस्पष्ट व्याकरण और वर्णमाला की वैज्ञानिकता के कारण सर्वश्रेष्ठता भी स्वयं सिद्ध है।
4. संस्कृत ही एक मात्र साधन हैं जो क्रमशःअंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं।
5. संस्कृत अध्ययन करने वाले छात्रों
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को गणित,विज्ञान एवं अन्य भाषाएँ ग्रहण करने में सहायता मिलती है।
6. संस्कृत केवल एक मात्र भाषा नहीं है अपितु संस्कृत एक विचार है संस्कृत एक संस्कृति है एक संस्कार है संस्कृत में विश्व का कल्याण है शांति है सहयोग है वसुदैव कुटुम्बकम् कि भावना है।
7. नासा का कहना है की 6th और 7th
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गयासुद्दीन के वंशज #नेहरू ने इन संस्थाओं का #ध्येय_वाक्य #संस्कृत में बनाकर हिंदुओं को बेवकूफ बनाने का प्रयास किया था इसलिए साहेब ने अधिकांश को बेच दिया और जो नहीं बिके उनकी शक्ति कम कर दी।

●भारत सरकार👉 सत्यमेव जयते
●लोक सभा👉 धर्मचक्र प्रवर्तनाय
●उच्चतम न्यायालय👉
1
यतो धर्मस्ततो जयः
●आल इंडिया रेडियो👉 सर्वजन हिताय सर्वजनसुखाय

●दूरदर्शन👉 सत्यं शिवं सुन्दरम्
●गोवा राज्य👉 सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।
●भारतीय जीवन बीमा निगम👉 योगक्षेमं वहाम्यहम्
●डाक तार विभाग👉 अहर्निशं सेवामहे
●श्रम मंत्रालय👉 श्रम एव जयते
2
●भारतीय सांख्यिकी संस्थान👉 भिन्नेष्वेकस्य दर्शनम्
●थल सेना👉 सेवा अस्माकं धर्मः
●वायु सेना👉 नभःस्पृशं दीप्तम्
●जल सेना👉 शं नो वरुणः
●मुंबई पुलिस👉 सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय
●हिंदी अकादमी👉 अहं राष्ट्री संगमनी वसूनाम्
●राष्ट्रवादी लेखक संघ👉 राष्ट्राय स्वाहा, इदं न मम
3
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उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तद्भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः।।२-३-१।।

नव योजन साहस्त्रो विस्तारो अस्य महामुने।
कर्मभूमिरियं स्वर्गपवर्गं च गच्छताम्।।२-३-२।।
हे मैत्रेय जो समुद्र के उत्तर तथा हिमालय के दक्षिण में स्थित है वह भारतवर्ष कहलाता है।उसमें भरत की सन्तान बसी हुई हैं।
इसका विस्तार नौ हजार योजन है । यह स्वर्ग और अपवर्ग प्राप्त करनेवालों की कर्मभूमि है।
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तस्यामात्या गुणैरासन्निक्षवाकोः सुमहात्मनः।
मन्त्रज्ञाश्चेङ्गितज्ञाश्च नित्यं प्रियहिते रताः॥१॥
अष्टौ बभूवुर्वीरस्य तस्यामात्या यशस्विनः।
शुचयश्चानुरक्ताश्च राजकृत्येषु नित्यशः॥२॥
धृष्टिर्जयन्तो विजयः सुराष्ट्रो राष्ट्रवर्धनः।
अकोपो धर्मपालश्च सुमन्त्रश्चाष्टमोऽर्थवित्॥३॥
इक्ष्वाकुवंशी वीर महामना महाराज दशरथ के मन्त्रिजनोचित गुणों से सम्पन्न आठ मन्त्रि थे जो मन्त्र के तत्व को जाननेवाले और बाहरी चेष्टा को देखकर मन के भाव को समझने वाले थे ।वे सदा ही राजा के प्रिय और हितमें लगे रहते थे।इस कारण उनका यश बहुत फैला हुआ था।
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स कच्चिद् ब्राह्मणो विद्वान् धर्मनित्यो महाद्युतिः।
इक्ष्वाकूणामुपाध्यायो यथावत् तात पूज्यते॥९॥
तात क्या तुम इक्ष्वाकुकुलके पुरोहित ब्रह्मवेत्ता,विद्वान सदैव धर्म में तत्पर रहनेवाले महातेजस्वी ब्रह्मऋषि वशिष्ठ जी का यथावत पूजन तो करते हो ना।
तात कच्चिद् कौसल्या सुमित्रा च प्रजावती ।
सुखिनी कच्चिदार्या च देवी नन्दति कैकयी॥१०॥
भरत क्या माता कौसल्या और सुमित्रा सुख से हैं,और क्या माता आर्या कैकयी आनन्दित हैं ।
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स तत्र ब्रह्मणः स्थानमग्नेः स्थान तथैव च॥३-१२-१७
विष्णोः स्थानं महेन्द्रस्य स्थान चैव विवस्वतः।
सोमस्थानं भगस्थानं स्थानं कौबेरमेव च॥३-१२-१८
धातुर्विधातुः स्थाने च वायोः स्थानं तथैव च।
नागराजस्य च स्थानमनन्तस्य महात्मनः॥३-१२-१९
स्थानम तथैव गायत्र्या वसूनां स्थानमेव च।
स्थानं च पाशहस्तस्य वरुणस्य महात्मनः॥३-१२-२०
कार्तिकेयस्य च स्थानं धर्मस्थानं च पश्यति।३-१२-२१
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Importance of Rudraksha.

शिवप्रियतमो ज्ञेयो रुद्राक्षः परपावन‌ः।
दर्शनात् स्पर्शनाज्जाप्यात् सर्वपापहरः स्मृतः।।२-५-२।।
रुद्राक्ष शिव को अत्यंत प्रिय है। इसे परम पावन समझना चाहिये। रुद्राक्ष का स्पर्श,दर्शन और जप समस्त पापों का हरण करनेवाला कहा गया है।
वर्णैस्तु तत्फलं धार्यं भुक्तिमुक्तिफलेुसुभिः।
शिवभक्तैर्विशेषेण शिवयोः प्रीतये सदा॥२-५-१३॥
भोग और मोक्ष की इच्छा वाले चारों वर्णों के लोगों और विशेषत शिवभक्तों शिव पार्वती की प्रसन्नताके लिये रुद्राक्ष फलोंको अवश्य धारण करना चाहिये॥
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Description of different types of Brahmins.
विभिन्न प्रकार के ब्राह्मणों का वर्णन।

सदाचारयुतो विद्वान् ब्राह्मणो नाम नामत।
वेदाचारयुतो विप्रो ह्येतैरेकैकवान्द्विजः॥ १-१२-२॥
सदाचार का पालन करनेवाला विद्वान ब्राह्मण ही 'ब्राह्मण' नाम धारण करने का अधिकारी है।
वेदोक्त आचार और विद्या से युक्त ब्राह्मण 'विप्र' कहलाता है। सदाचार, वेदाचार और विद्या से युक्त ब्राह्मण 'द्विज' कहलाता है।
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ब्रह्म का वर्णन।

नाहो न रात्रिर्न नभो न भूमिर्नासीत्तमोज्योतिरभूच्च नान्यत्।
श्रोत्रादिबुद्ध्यानुपलभ्यमेकं प्राधानिकं
ब्रह्म पुमांस्तदासीत्।।१-२-२३।।
अर्थ - प्रलयकाल मे न दिन था,ना रात्रि,न आकाश,न पृथिवी,न अन्धकार,न प्रकाश और न इनके अतिरिक्त कुछ और ही था केवल श्रोत्रादि इन्द्रियों और बुद्धि आदिका अविषय एक प्रधान और पुरुष ही था।
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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।।

अर्थ –व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन आलस्य होता है, व्यक्ति का परिश्रम ही उसका सच्चा मित्र होता है। क्योंकि जब भी मनुष्य परिश्रम करता है तो वह दुखी नहीं होता है और हमेशा खुश ही रहता है।
#संस्कृत Image
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:।।

अर्थ–व्यक्ति के मेहनत करने से ही उसके काम पूरे होते हैं, सिर्फ इच्छा करने से उसके काम पूरे नहीं होते। जैसे सोये हुए शेर के मुंह में हिरण स्वयं नहीं आता, उसके लिए शेर को परिश्रम करना पड़ता है। Image
ददाति प्रतिगृह्णाति गुह्यमाख्याति पृच्छति।
भुङ्क्ते भोजयते चैव षड्विधं प्रीतिलक्षणम्।।

अर्थ – लेना, देना, खाना, खिलाना, रहस्य बताना और उन्हें सुनना ये सभी 6 प्रेम के लक्षण है।

#संस्कृत_श्लोक 🌹🌹💞💞 Image
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Ingenious Trickery – Draft National Education Policy 2019 velivada.com/2019/08/21/ing…
Excuse me for the Self Retweet...
The reverse counting has begun to pass this dangerous law. #Nep2019
नई शिक्षा नीति 2019 लागू की जाती है तो यह सरे आम होगा...

डॉ कस्तुरीरंगन समिति की स्पष्ट सिफारिश है कि शिक्षण संस्थानों को पूर्ण स्वायत्तता दी जाए.
और शिक्षा को फिलान्थ्रोफी के माध्यम से निजी संस्थानों को सौंप दिया जाए.
#Nep2019
#SaveMeritSaveNation
#SaveNation_EndMonopoly
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Final day of 3-day intl conf on #Sanskrit #SciTech #RFS & #Sahitya @ssusonline
Session 1: Agri & Culinary science
Chair & key paper: Dr B. Padmodaya Sarma
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Session 1: Agri & Culinary science
Chair & key paper: Dr B.Padmodaya Sarma, Prof, Dept of Plant Pathology, SV Agri College, Tirupati
Gopika G, Research Scholar #Sanskrit #Sahitya @ssusonline -Agri Mgt in Krși Parāśara
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#संस्कृत Image
Session 1: Agri & Culinary science
Chair: Dr B.Padmodaya Sarma (Soil Borne Disease Mgt in Organic Farming)
Nimmy KM, Research Scholar #Sanskrit #Sahitya @ssusonline -Scientific Agricultural Practices in Kāśyapiyakrsisūkti
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#RFS Image
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Day 2 of 3-day intl conf on #Sanskrit #SciTech
#RFS & #Sahitya @ssusonline #Kalady
Session 1: Environmental Science
Chair & key paper Dr Anil Pratap Giri - Vedāntasāra

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cc: @moesgoi @PondiUniVC @AgriGoI ImageImage
Session 1: Environmental Science
Chair Dr Anil Pratap Giri, Asst Prof, #Sanskrit Dept, Pondicherry Univ

Dr Jinitha KS, Asst Prof, Sanskrit Vyakarana @ssusonline RC Payyanur - सस्यसम्पत्तिः बृहत्संहितायाम्

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#संस्कृत #शोध #RFS Image
Session 1: Environmental Science
Chair Dr Anil Pratap Giri
Dr Rohini K, Dept of #Sanskrit, Sree Krishna College, Guruvayur - परिस्थितिसंरक्षणंभारतीयसंस्कृतौ ।

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श्री शंकराचार्य #संस्कृत सर्वकलाशाला
@MinOfCultureGoI @HRDministry Image
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3-day intl conf on #Sanskrit Science & Tech #SciTech
#SilverJubilee Celebrations, #RFS & #Sahitya Dept @ssusonline #Kalady
Song-Amrutha
श्री शंकराचार्य #संस्कृत सर्वकलाशाला
@MinOfCultureGoI @HRDministry
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Opening remarks by Dr V. R. Muralidharan, Prof & HoD, #Sanskrit #Sahitya
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श्री शंकराचार्य #संस्कृत सर्वकलाशाला #SciTech Research Forum #RFS @ssusonline #Kalady #संस्कृतसाहित्यं
cc: @TVVen @sanskritkannan @Gopalee67 @sanskrit1906 Image
Speech by session chair, Dr C.Rajendran, Dean, Faculty of #Sanskrit Literature @ssusonline #Kalady #संस्कृतसाहित्यं
श्री शंकराचार्य #संस्कृत सर्वकलाशाला #SciTech Research Forum #RFS #शोध

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cc: @DDNewsSanskrit @PMOIndia @NCAA_PMU Image
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