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#Thread
गायत्री मन्त्र सर्वप्रथम ऋग्वेद में उद्धृत हुआ।

इसके ऋषि विश्वामित्र हैं और देवता सविता हैं।

वैसे तो यह मन्त्र विश्वामित्र के इस सूक्त के 18 मन्त्रों में केवल एक है, किन्तु अर्थ की दृष्टि से इसकी महिमा का अनुभव आरम्भ में ही ऋषियों ने कर लिया था और...

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सम्पूर्ण ऋग्वेद के 10 सहस्र मन्त्रों में इस मन्त्र के अर्थ की गम्भीर व्यंजना सबसे अधिक की गई।

इस मन्त्र में 24 अक्षर हैं। उनमें आठ आठ अक्षरों के तीन चरण हैं। किन्तु ब्राह्मण ग्रन्थों में और कालान्तर के समस्त साहित्य में इन अक्षरों से पहले तीन व्याहृतियाँ और...

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उनसे पूर्व प्रणव या ओंकार को जोड़कर मन्त्र का पूरा स्वरूप इस प्रकार स्थिर हुआ:
(१) ॐ
(२) भूर्भव: स्व:
(३) तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
मन्त्र के इस रूप को मनु ने सप्रणवा, सव्याहृतिका गायत्री कहा है और जप में इसी का विधान किया है।

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#Thread
पीपल वृक्ष नहीं अपितु साक्षात देवता है

भारतीय संस्कृति में पीपल देववृक्ष है, इसके सात्विक प्रभाव के स्पर्श से अन्त: चेतना पुलकित और प्रफुल्लित होती है। पीपल वृक्ष प्राचीन काल से ही भारतीय जनमानस में विशेष रूप से पूजनीय रहा है।

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ग्रंथों में पीपल को प्रत्यक्ष देवता की संज्ञा दी गई है। स्कन्द पुराण में वर्णित है कि अश्वत्थ(पीपल) के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत सदैव निवास करते हैं।

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पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत: मूर्तिमान स्वरूप है। यह सभी अभीष्टोंका साधक है। इसका आश्रय मानव के सभी पाप ताप का शमन करता है।

भगवान कृष्ण कहते हैं- अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणांअर्थात् समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूं।

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पागल अकबर, होशियार बिरबल !

अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे।

रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा, मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया ।
अकबर ने पूछा कौन हे ये ?
बीरबल - मेरी माता है।

अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ कर फेक दिया और बोला कितनी माता हैं तुम हिन्दू लोगों की ?
बीरबल को उसका जबाब देने की एक तरकीब सूझी ।

आगे एक बिच्छुपत्ती (खुजली वाला) झाड़ मिला!
बीरबल उसे दंडवत प्रणाम कर, कहा -
जय हो बाप मेरे ।

अकबर को गुस्सा आया .....
दोनों हाथों से झाड़ को उखाड़ने लगा ।

इतने में अकबर को भयंकर खुजली होने लगी तो बोला: बीरबल ये क्या हो गया ?

बीरबल ने
कहा : आप ने मेरी माँ को मारा इस लिए ये गुस्सा हो गए । अकबर जहाँ भी हाथ लगता वहाँ पर उसे खुजली होने लगती ।

अकबर बोला : बीरबल जल्दी कोई उपाय बताओ ।

बीरबल बोला :
उपाय तो है लेकिन वो भी हमारी माँ है । उनसे विनती करनी पड़ेगी ।

अकबर बोला :
जल्दी करो ।

आगे गाय खड़ी थी बीरबल ने
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#Thread
भगवद्पाद जगद्गुरु आदिशंकराचार्य की समाधि का लोकार्पण प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया, उनका संक्षिप्त परिचय

जब सनातन धर्म लगभग विलुप्त व वेद-उपनिषदों का पराभाव हो गया, गीता-पुराण विस्मृत हो गए। ऐसे समय मे शंकर का जन्म हुआ...

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जिसने 8 वर्ष की आयु में वेद व उपनिषदों का अध्ययन कर सन्यास ग्रहण किया। पूरे देश मे 3 बार भ्रमण कर बौद्धों को शास्त्रार्थ में पराजित कर पुनः सनातन धर्म को स्थापित कर देश को एकसूत्र में बांधा।

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★ब्रह्मसूत्र, उपनिषद व भगवदगीता पर भाष्य लिख वेदों को पुनर्स्थापित किया।

★ चारों दिशाओं में चार पीठ स्थापित की

★दशनामी अखाड़ों की व्यवस्था की

★कुम्भ मेला व्यवस्था को पुनर्भाषित किया

★ पंचायतन पूजा पद्धति आरम्भ की

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दुश्मन को न पहचानने वाली, नेतृत्वहीन विराट सेना भी अंततः युद्ध हार जाती है !

हिंदु कौम एक ऐसी ही सेना है जिसका कोई लक्ष्य नहीं, कोई मंजिल नहीं, शत्रु की पहचान नहीं, अपना कोई सेनापति नहीं !

हिंदुओं से ज्यादा राजनैतिक लक्ष्यहीन और दिशाहीन कौम कोई नहीं, क्योंकि हिंदुओं के
नेता तो बहुत हैं पर उनके मन में हिंदुओं के साम्राज्य जैसा कोई लक्ष्य नहीं, कोई महत्वाकांक्षा नहीं; इसलिए हिंदु नेताओं को सेकुलरिज्म की चादर ओढ़कर हिंदुओं के रक्त की प्यासी कौम से भाईचारा निभाने में भी कोई लज्जा नहीं आती!

सत्ता का जो तंत्र अंग्रेज स्थापित कर गए,
मात्र वे उसे ढोना चाहते हैं, उसपर बैठकर उसे भोगना चाहते हैं, यही हिंदु नेताओं की महत्वाकांक्षा है!

जबकि कम्युनिस्टों, मुसलमानों और ईसाईयों का स्पष्ट राजनैतिक लक्ष्य है। कम्युनिस्ट साम्यवादी शासन वाला भारत चाहते हैं, मुसलमान शरीयत कानून वाला इस्लामिक भारत चाहते हैं और ईसाई
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इंडोनेशिया के पूर्व मुस्लिम राष्ट्रपति सुकर्णो की बेटी ने हिंदू धर्म अपनाया

इंडोनेशिया में चर्चा है कि खत्म हो जाएगा इस्लाम धर्म और‌ क्या 500 साल पुरानी भविष्यवाणी सच हो जाएगी

इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णो की बेटी ने हिंदू धर्म अपना लिया है । इंडोनेशिया के
पहले राष्ट्रपति सुकर्णो को इंडोनेशिया में राष्ट्रपिता के जैसा दर्जा हासिल है । सुकर्णो नाम तो संस्कृत भाषा से मिलता जुलता है लेकिन वो एक मुसलमान थे ।

इंडोनेशिया में इस्लाम ने आक्रमण के माध्यम से... तलवार के जरिए अपनी जड़ें जमा लीं और 99 प्रतिशत आबादी को
इस्लाम में कन्वर्ट करवा लिया लेकिन इसके बाद भी वहां पर अरब कल्चर की जड़ें नहीं जम पाईं यही वजह है कि आज भी वहां लोगों के नाम संस्कृत भाषा से मिलते जुलते हैं

सुकुमावती सुकर्णोपुत्री ने इंडोनेशिया के बाली द्वीप में पूरे धार्मिक रीति रिवाज से घर वापसी कर ली है और इस घटना को
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#Thread
संस्कृत अध्ययन के लाभ

संस्कृत संस्कार की भाषा

संस्कृत भाषा के पढ़ने से विद्यार्थियों में संस्कारों का अनायास ही प्रवेश हो जाता है क्योंकि इसमें न केवल भौतिक वस्तुओं संबंधी ज्ञान विज्ञान मौजूद रहता है बल्कि विद्यार्थी को आध्यात्मिक व्यवहारिक ज्ञान भी सीखने को मिलता है
संस्कृत में आध्यात्मिक ज्ञान विज्ञान

संस्कृत भाषा में लिखे गए वेदों, उपनिषदों,दर्शनों,आरण्यक ग्रंथों में आध्यात्मिक ज्ञान विज्ञान प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है, यदि हम वेदों की बात करें तो ऋग्वेद का मंत्र कहता है -

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द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते।
तयोरन्यः पिप्पलं स्वाद्व्त्त्यनश्नन्नन्यो अभिचाकशीति।। १/१६४/२०

अर्थात् - एक वृक्ष पर दो पक्षी सखा भाव से बैठे हैं, जिसमें से एक वृक्ष के मधुर फलों का भोग कर रहा है व दूसरा शान्तभाव से उसे चुपचाप देख रहा है।

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#Thread
16 सिद्धियाँ विवरण
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1. वाक् सिद्धि : -

जो भी वचन बोले जाए वे व्यवहार में पूर्ण हो, वह वचन कभी व्यर्थ न जाये, प्रत्येक शब्द का महत्वपूर्ण अर्थ हो, वाक् सिद्धि युक्त व्यक्ति में श्राप अरु वरदान देने की क्षमता होती हैं।

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2. दिव्य दृष्टि सिद्धि:-

दिव्यदृष्टि का तात्पर्य हैं कि जिस व्यक्ति के सम्बन्ध में भी चिन्तन किया जाये, उसका भूत, भविष्य और वर्तमान एकदम सामने आ जाये, आगे क्या कार्य करना हैं, कौन सी घटनाएं घटित होने वाली हैं,इसका ज्ञान होने पर व्यक्ति दिव्यदृष्टियुक्त महापुरुष बन जाता हैं।

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3. प्रज्ञा सिद्धि : -

प्रज्ञा का तात्पर्य यह हें की मेधा अर्थात स्मरणशक्ति, बुद्धि, ज्ञान इत्यादि! ज्ञान के सम्बंधित सारे विषयों को जो अपनी बुद्धि में समेट लेता हें वह प्रज्ञावान कहलाता हें! जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से सम्बंधित ज्ञान के साथ-साथ भीतर एक चेतनापुंज जाग्रत रहता हें।
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को #अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है. चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की उपासना की जाती है.14 गांठों वाला रक्षा सूत्र बांह में बांधा जाता है. कहते हैं कि गांठे 14 लोकों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
ऐसी मान्यता है कि जब पाण्डव जुए में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी. धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनंत सूत्र धारण किया.
हिंदू धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार, इस दिन महिलाएं अपने बाएं हाथ पर और पुरुष अपने दाएं हाथ पर अनंत बांधते हैं यह अनंत सूत्र दीर्घ आयु और अनंत जीवन का प्रतीक माना जाता है।
गणेश चतुर्थी के दिन स्‍थापित किए गए गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है ।
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बिना किसी सेटेलाइट या बिना किसी दूरबीन के महर्षि पराशर ने आज से 2200 वर्ष पूर्व इन सप्तर्षि तारा मंडल पर सटीक जानकारी अपने ग्रंथ में दी थी महर्षि पराशर ज्योतिष शास्त्र के महान ऋषि थे । ।
उन्हों ने ही सप्तर्षि तारा मंडल की सभी जानकारी दी है , आज तक नासा या दुनिया की कोई स्पेस
एजंसी वहां तक नही पहुच पाई , पराशर मुनि ने अपने पुस्तक में लिखा है कि सप्तर्षि में कश्यप नामसे एक तारा है जिसमे में हमारा सूर्य उत्पन्न हुआ है इसलिए आज भी हिन्दू लोग सूर्य को कश्यपनंदन मानते है , हालांकि आज तक दुनिया की किसी भी वैज्ञानिक संस्था ने इस पर अभी खोज भी शरू नही की यदि
भविष्य में सूर्य के बारे में ऐसी बात सामने आती है तो हम भारतीय सनातनियो को आश्चर्य नही होगा लेकिन आज भी भारत के कश्मीर व हिमाचल प्रदेश में एक सवंत चलती है जिसे लौकिक सवंत कहते है , जो सप्तर्षि तारा मंडल के आधार पर चलती है , लौकिक सवंत यानी सप्तर्षि तारा मंडल एक नक्षत्र में
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बहुत ही अच्छा लगा पढ़ने के बाद आप लोग भी पढ़िए.... ।।।👇

#नागासाधू
जब अहमद शाह अब्दाली दिल्ली और मथुरा में मार काट करता गोकुल तक आ गया और लोगों को बर्बरतापूर्वक काटता जा रहा था. महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहे थे, तब गोकुल में अहमदशाह अब्दाली का सामना नागा साधुओं से हो गया।
कुछ 5 हजार चिमटाधारी पूज्य नागा साधु तत्काल सेना में तब्दील होकर लाखों की हबसी, जाहिल जेहादी सेना से भिड गए।
पहले तो अब्दाली साधुओं को मजाक में ले रहा था किन्तु कुछ देर में ही अपने सैनिकों के चिथड़े उड़ते देख अब्दाली को एहसास हो गया कि ये साधू तो अपनी धरती की अस्मिता
के लिए साक्षात महाकाल बन रण में उतर गए।
तोप तलवारों के सम्मुख चिमटा त्रिशूल लेकर पहाड़ बनकर खड़े 2000 नागा साधू इस भीषण संग्राम में वीरगति को प्राप्त हो गए लेकिन सबसे बड़ी बात ये रही कि दुश्मनों की सेना चार कदम भी आगे नहीं बढ़ा पाई जो जहाँ था वहीं ढेर कर दिया गया या फिर पीछे हटकर
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# श्री महाराणा प्रताप

#वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है। जिसने अमेरिका जैसे बड़े बलशाली देश को झुका दिया। लगभग 20 वर्षों तक चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ। अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष से एक पत्रकार ने एक सवाल पूछा...

जाहिर सी बात है कि सवाल यही
होगा कि आप युद्ध कैसे जीते या अमेरिका को कैसे झुका दिया... ??

पर उस प्रश्न का दिए गए उत्तर को सुनकर आप हैरान रह जायेंगे और आपका सीना भी गर्व से भर जायेगा।
दिया गया उत्तर पढ़िये...!!

सभी देशों में सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को हराने के लिए मैंने एक महान व श्रेष्ठ भारतीय
राजा का चरित्र पढ़ा।
और उस जीवनी से मिली प्रेरणा व युद्धनीति का प्रयोग कर हमने सरलता से विजय प्राप्त की..!!

आगे पत्रकार ने पूछा...
"कौन थे वो महान राजा ?"

मित्रों जब मैंने पढ़ा तब से जैसे मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया,, आपका भी सीना गर्व से भर जायेगा...!!

वियतनाम के
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शाहजहां को उसके बेटे औरंगजेब ने 7 वर्ष तक कारागार में रखा था। वह उसको पीने के लिए नपा-तुला पानी एक फूटी हुई मटकी में भेजता था तब शाहजहाँ ने अपने बेटे औरंगजेब को पत्र लिखा जिसकी अंतिम पंक्तियां थी-
"👇👇
ऐ पिसर तू अजब मुसलमानी,
ब पिदरे जिंदा आब तरसानी,
आफरीन बाद हिंदवान सद बार,
मैं देहदं पिदरे मुर्दारावा दायम आब"
अर्थात्
हे पुत्र
तू भी विचित्र मुसलमान है जो अपने जीवित पिता को पानी के लिए भी तरसा रहा है। शत शत बार प्रशंसनीय हैं वे 'हिन्दू जो अपने मृत पूर्वजों को भी पानी देते हैं🙏
इसाई धर्म:-
ईसा एक है
बाइबिल एक।
फिर भी, लेटिन कैथलिक, सीरियन कैथलिक, मारथोमा, पेंटेकोस्ट, सैल्वेशन आर्मी, सेवेंथ डे एडवांटिष्ट, ऑर्थोडॉक्स, जेकोबाइट जैसे 146 फिरके आपस में किसी के भी चर्च में नहीं जाते।
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#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है🙏🚩
जब भी कोई सेकुलर कहता है कि #सभी_धर्म_समान है सबकी शिक्षा एक है तब मुझे इतना गुस्सा आता है कि उसके मुह में जुता निकाल के घुसेड़ दु,सारे धर्म समान नही है मजहब ,रिलीजन, ओर धर्म को एक समान कहना भी पाप है। 1/2👇
@anshi_v20
महजबी किताब की शिक्षा मानव मात्र के लिए संकट पैदा करती है जबकि सनातन धर्म की शिक्षा वसुदेव कुटुम्बकम की नींव रखती है ,मज़हब की शिक्षा स्त्री को सेक्स की वस्तु समझती है पर सनातन धर्म की शिक्षा नारी तू नारायणी देवी का रूप समझती है 2/3👇
मजहबी शिक्षा 5से 10 साल की बच्ची से सेक्स जायज बताती है तो सनातन की शिक्षा उन्ही बेटियो को नवरात्रि में कन्या पूजन कराती है।
धरती ,पानी,नदी,पहाड़,पेड़ सबमे ईश्वर देंखने वाले पवित्र सनातन धर्म की तुलना कबाइली जिहादी मजहबों ओर रिलीजनो से करना पाप समान है। 3/4👇
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#Thread
श्रावणी उपाकर्म क्यों ज़रूरी है ?

गुरूर्ब्रम्हा गुरूर्विष्णु गुरूर्देवो महेश्वरा:
गुरू साक्षात परब्रम्ह तस्मै श्री गुरूवे नम:

सनातन धर्म मे एक वर्ण व्यवस्था है।जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, क्षुद्र ये चार वर्ण है।
सभी वर्णों के कर्म व त्योहार अलग अलग है।

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जैसे क्षत्रिय का मुख्य त्योहार दशहरा है, वैश्य का दिवाली है,
उसी तरह ब्राम्हण का "श्रावणी उपाकर्म" मुख्य त्योहार है।
वैसे ब्राह्मण को ब्राह्मणत्व मे रहने के लिये निचे दिये गये दैनिक कर्म अत्यावश्यक है....

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"सन्ध्या स्नानं जपश्चैव देवतानां च पूजनम्।
वैश्वदेवं तथा आतिथ्य षट् कर्माणि दिने दिने।।

जो इस प्रकार है...
संध्या,
स्नान,
जप,
देवता पूजन,
वैश्वदेव बलि,
अतिथि सत्कार,
ये कर्म दैनिक नियम है। इस से हम हमारे पुण्य को बढ़ा कर पाप का क्षय करते है।
@Anshulspiritual

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#Thread
कौन से ऋषि का क्या है महत्व:

अंगिरा ऋषि :-

ऋग्वेद के प्रसिद्ध ऋषि अंगिरा ब्रह्मा के पुत्र थे। उनके पुत्र बृहस्पति देवताओं के गुरु थे। ऋग्वेद के अनुसार, ऋषि अंगिरा ने सर्वप्रथम अग्नि उत्पन्न की थी।

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विश्वामित्र ऋषि :-

गायत्री मंत्र का ज्ञान देने वाले विश्वामित्र वेदमंत्रों के सर्वप्रथम द्रष्टा माने जाते हैं। आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत इनके पुत्र थे। विश्वामित्र की परंपरा पर चलने वाले ऋषियों ने उनके नाम को धारण किया। यह परंपरा अन्य ऋषियों के साथ भी चलती रही।

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वशिष्ठ ऋषि :-

ऋग्वेद के मंत्रद्रष्टा और गायत्री मंत्र के महान साधक वशिष्ठ सप्तऋषियों में से एक थे। उनकी पत्नी अरुंधती वैदिक कर्मो में उनकी सहभागी थीं।

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#Thread
आरती, स्त्रोत्र विशेष

आरती को आरात्रिक , आरार्तिक अथवा नीराजन भी कहते हैं। पूजा के अंत में आरती की जाती है। जो त्रुटि पूजन में रह जाती है वह आरती में पूरी हो जाती है।

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स्कन्द पुराण में कहा गया है

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं यत् कृतं पूजनं हरे:।
सर्वं सम्पूर्णतामेति कृते निराजने शिवे।।

अर्थात - पूजन मंत्रहीन तथा क्रियाहीन होने पर भी नीराजन (आरती) कर लेने से उसमे सारी पूर्णता आ जाती है।

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आरती करने का ही नहीं, देखने का भी बड़ा पूण्य फल प्राप्त होता है। हरि भक्ति विलास में एक श्लोक है-

नीराजनं च यः पश्येद् देवदेवस्य चक्रिण:।
सप्तजन्मनि विप्र: स्यादन्ते च परमं पदम।।

अर्थात - जो भी देव चक्रधारी श्रीविष्णु भगवान की आरती देखता है

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सनातन धर्म पहले संपूर्ण धरती पर व्याप्त था..!!

पहले धरती के सात द्वीप थे... जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक एवं पुष्कर...इसमें से जम्बूद्वीप सभी के बीचोबीच स्थित है.. राजा प्रियव्रत संपूर्ण धरती के और राजा अग्नीन्ध्र सिर्फ जम्बूद्वीप के राजा थे।

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जम्बूद्वीप में नौ खंड हैं..!!

इलावृत..
भद्राश्व..
किंपुरुष..
भारत..
हरि..
केतुमाल..
रम्यक..
कुरु और हिरण्यमय...
इसमें से भारतखंड को भारत वर्ष कहा जाता था..

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भारतवर्ष के 9 खंड हैं..

इन्द्रद्वीप..
कसेरु..
ताम्रपर्ण..
गभस्तिमान..
नागद्वीप..
सौम्य..
गन्धर्व और वारुण तथा यह समुद्र से घिरा हुआ द्वीप उनमें नौवां है.. भारतवर्ष के इतिहास को ही हिन्दू धर्म का इतिहास नहीं समझना चाहिए...

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आइए जानते है विवाह के 7 फेरे और उनके पवित्र वचनों के मंत्र और अर्थ, सुंदर जीवन के लिए जरूरी है इनका पालन।

विवाह के समय पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे को सात वचन देते हैं जिनका दांपत्य जीवन में काफी महत्व होता है।

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आज भी यदि इनके महत्व को समझ लिया जाता है तो वैवाहिक जीवन में आने वाली कई समस्याओं से बचा जा सकता है। विवाह समय पति द्वारा पत्नी को दिए जाने वाले 7 वचनों के महत्व को देखते हुए उन वचनों के बारे में विशेष जानकारी दे रहा हूँ।

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1. तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी!

यहां कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे..

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#Thread
हिंदू परम्पराओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारण अवश्य जाने!

1.कान छिदवाने की परम्परा:

भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है। वैज्ञानिक तर्क-दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्ति बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है..

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और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।

2. माथे पर कुमकुम/तिलक

महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं। वैज्ञानिक तर्क–आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है। कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। #सनातनधर्मसर्वोपरि 👇👇
माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है।
#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है

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#तुलसीदासजी का जन्म संवत्‌ 1554 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन #सरयूपारीण #ब्राह्मण के परिवार में हुआ था
जन्मते समय बालक तुलसीदास रोए नहीं, किंतु उनके मुख से
#राम का शब्द निकला। उनके मुख में बत्तीसों दाँत मौजूद थे जिसे देखकर पिता अमंगल की शंका से भयभीत हो गए थे।
तुलसीदास लगभग साढ़े पाँच वर्ष अनाथ हो गए थे। ऐसी मान्यता है #माता #पार्वती ब्राह्मणी का वेश धारण कर प्रतिदिन उसके पास जातीं और उसे अपने हाथों से भोजन करा जातीं। संवत्‌ 1561 माघ शुक्ल पंचमी श्री नरहरि ने उसका यज्ञोपवीत संस्कार कराया और उनका नाम #रामबोला रखा।
बिना सिखाए ही बालक रामबोला ने #गायत्री-मंत्र का उच्चारण किया, जिसे देखकर सब लोग चकित हो गए।
अयोध्या में ही रहकर उसे विद्याध्ययन कराने लगे।
बालक रामबोला की बुद्धि बड़ी प्रखर थी। एक बार गुरुमुख से जो सुन लेते थे, उन्हें वह कण्ठस्थ हो जाता था।
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#Thread
हम क्यो नही मानते 1 जनवरी को नया साल..?

न ऋतु बदली.. न मौसम
न कक्षा बदली... न सत्र
न फसल बदली...न खेती
न पेड़ पौधों की रंगत
न सूर्य चाँद सितारों की दिशा
ना ही नक्षत्र...!

1 जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं ,मानो कितना बड़ा पर्व है।
@desh_bhkt

👇👇
नया केवल एक दिन ही नहीं होता..
कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए। आखिर हमारा देश त्योहारों का देश है।

ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर: 👇👇
@kshatriyarch
@nutan_jyot
1. प्रकृति-
1 जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी.. चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही होI

2. वस्त्र-
दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर..
@Shomes_quest
👇👇
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सौ साल बनने में लगे तोड़ने में तीन सौ साल लग गये विदिशा के विजय मंदिर को जो तीन सौ फ़िट ऊँचा था।मुग़ल इतिहासकार अलबरूनी ने लिखा है कि यह मंदिर 100 गज ऊँचा था और मीलों दूर से इसका शिखर दिखाई देता था।

तीन सौ साल के ध्वंस के बाद भी जब दीवारें नहीं टूटी तब औरंगज़ेब ने इसे तोप (1/4) ImageImageImageImage
के गोलों से उड़ाने का आदेश दिया।मंदिर को ध्वस्त कर इस विशाल मंदिर के मलवे से ही आलमगीरी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया। और शहर का नाम भी विदिशा से आलमगीरपुर कर दिया गया।

नब्बे के दशक में तेज बारिश से मस्जिद का मसला धसका और मंदिर का आधार सामने आया भारतीय पुरातत्व ने खुदाई की (2/4)
तब इस एक हज़ार साल पुराने मंदिर से जुड़े तथ्य और अभिलेख प्राप्त हुये।उत्खनन का विरोध हुआ और काम रोक दिया गया।तब से यही स्थिति है इस मंदिर की।
विध्वंस के अवशेष एक किलोमीटर के दायरे में जगह-जगह आज भी बिखरे पड़े हैं।कभी आईये और देखिये कि इतिहास की हत्या यहाँ कितनी बेरहमी से (3/4)
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