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एक सत्य और झेलिए। जैसे ही सर्वे टीम को पता चला कि बाबा का शिवलिंग मिल चुका है, हिंदू पक्षकार के वकील विष्णु जैन दौड़े-दौड़े अदालत गए। क्यों गए? ताकि जिस स्थान पर शिवलिंग प्राप्त हुआ है उसी स्थान पर सुरक्षा घेरा लगाया जा सके। लेकिन क्या होता यदि सुरक्षा घेरा नहीं लगाया जाता?
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क्या मुसलमान लोग उस शिवलिंग को वहां से निकालकर कहीं असुरक्षित कर देते? नहीं। बिल्कुल नहीं। होता यह कि नमाज के वक्त फिर जब भी वे आते, फिर उसी स्थान पर वजू करते। अर्थात् मुंह खंगालते, थूकते। फिर नमाज अदा करने जाते। और महाकाल की धरती काशी में महाकाल भक्तों को इतना भी (2/4)
स्वाधिकार नहीं कि वे ऐसा करने से रोक पाते।

इसलिए वकील विष्णु जैन को अदालत का रुख करना पड़ा। अदालत ने जब जाकर प्रोटेक्शन प्रदान किया है, अब जाकर सुरक्षा घेरा लगाया जाएगा। सत्य को जानना और महसूस करना दोनों में कितना अंतर है, (3/4)
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अयोध्या में मन्दिर निर्माण हो रहा है। काशी में ऐसे साक्ष्य मिल रहे कि कोटि -कोटि जन भावविह्वल हैं।

इतने पर भी जिन्हें धर्मनिरपेक्षता, उदारता, सर्वधर्मसमभाव, दंगा-दमनी तहजीब आदि कूड़े में फेंकने योग्य विचारों के प्रति लगाव झुकाव रहा हो, सनातन के प्रति किसी भी प्रकार की (1/4)
हीनभावना रही हो, स्वयं के हिन्दू होने पर लज्जित अनुभव करते रहे हों, किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव से अथवा भय के कारण हिंदुत्व शब्द से ही घृणा रही हो, उन सभी बन्धु बांधवों का अपने गुरुजनों, मित्रों, अग्रजों, अनुजों की ओर से आह्वान करता हूँ कि आज पुनः अवसर है, त्यागिए थोपी (2/4)
गयी तुच्छ मानसकिता को, त्यागिए अपने भय, हीनता को।

हम सभी आपका हृदय से वन्दन, अभिनन्दन, स्वागत करने को तैयार हैं।

आप हमारे अपने हैं। सुबह का भूला संध्या को घर वापिस आ जाये तो उसे भूला नहीं कहते।

आपको कभी कोई उलाहना न देंगे। विश्वास कीजिये। हम सब तो भाव के भूखे हैं। (3/4)
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#नन्दी_के_महादेव

महादेव ने नन्दी के सर को अपने विशाल हाथों में लिया और उसे माथे पर सहलाते हुए दिव्य स्वर में बोले “उठो नन्दी ! आँखे खोलो ! देखो मैं आ गया हूँ !”

नन्दी की आँखों से अश्रु बहते ही जा रहे थे... आँखों के नीचे अश्रुओं की धारा उसके चेहरे से होती हुई टप-टप (1/15) Image
बहती हुई धरती को निरन्तर भिगोती चली जा रही थी... उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यह महादेव का स्वर है...

महादेव ने नन्दी को चूमा और फिर से कहा “उठो नन्दी ! तुम्हारी प्रतीक्षा समाप्त हुई मेरे बच्चे ! उठो अब तुम्हारी पीड़ा का अन्त आ गया है!”

नन्दी ने अपनी आँखें खोली (2/15)
और सामने उसी प्रकाश के पुँज को पाया जिसके दर्शन वह बचपन से करता आया था... नन्दी ख़ुशी के मारे झूम उठा... उसने अपने सर को उठाया और अपने चारों ओर देखा... चहुँओर उल्लास के स्वर गूँज रहे थे... नन्दी ने आगे बढ़ कर महादेव की गोद में अपना सिर रख दिया और कातर स्वर में बोला (3/15)
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पता नहीं... वजू के तालाब में बाबा कितने बरसों से पड़े हैं महादेव!!

डाले तो कुएं में थे... तालाब में कैसे पहुँच गए।

रोजाना सैकड़ों लोग वजू करते होंगे... तो क्या किसी को भी नजर नहीं आए।

करीब 13 फीट व्यास के इतने विशाल शिवलिंग भी किसी को दिखाई नहीं पड़े?

बात अचम्भे की है (1/2)
घोर आश्चर्य की... मतलब सर्वे न होता तो न जाने कब तक उस गंदे पानी में पड़े रहते।

वैशाख पूर्णिमा के पूर्ण दिन प्रकट भए भोलेनाथ।

तुम सच्चे थे नंदीबाबा... आज तुम्हारे बाबा तुम्हें भी मिले और जगत को भी!!

यह पूर्णिमा भी अमरत्व को प्राप्त हुई।

#साभार
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19वीं सदी के शुरुआत में इंडीज के पहाड़ी के ऊपर से विमान गुजर रहा था...

विमान के पायलट को इंसानों द्वारा बनाया गया एक पूरा शहर नजर आया... कई मंदिर और मूर्तियाँ नजर आए। फिर उसने यह बात पेरू की सरकार को बतायी। उसके बाद रिसर्च करने वाले लोग हेलीकॉप्टर से रस्सियों से उतरे और (1/6) ImageImageImageImage
फिर जब पूरी तरह से तहकीकात की गई तो पूरी दुनिया की नजरें फटी की फटी रह गई और इस तरह से एंडीज के पहाड़ के 3000 मीटर पर बसा एक खूबसूरत शहर माचू पिचू सामने आया।

माचू पिचू सभ्यता पूरी तरह एक हिंदू सभ्यता ही है। इसे इंका या माया सभ्यता भी कहते हैं। इस सभ्यता के लोग पूरी तरह (2/6) ImageImageImageImage
से उन्हीं बातों का फॉलो करते थे या उन्हीं चीजों पर यकीन रखते थे जिस पर हिंदू धर्म यकीन रखता है... यानी पूर्वजन्म, शक्ति की पूजा, सूर्य भगवान की पूजा, समुद्र देवता की पूजा, प्रकृति और पहाड़ की पूजा और पर्यावरण संरक्षण।

यहाँ सूर्य भगवान का एक विशाल मंदिर है। एक शक्ति की (3/6) Image
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#वजू (कुल्ला) क्यो करते थे मलेछ हमारे #ज्ञानलिंग पर!

हमारे पार्थिव देह में अपने ज्ञानबोध चेतना को अविरलता देने वाली दाहिने अंग की सूर्य शक्ति कही जाने वाली पिंगला नाड़ी में गंगा रस प्रवाहित होता है, जो दूषित हो तो माइग्रेन सरवाइकल जैसे रोग होते हैं। बुद्धि भ्रष्ट हो (1/9) Image
जाती है। चिंता तनाव आलस प्रमाद जैसे अनेक मानस रोग! दाहिने नाक का खुलना बन्द होना इसी पर निर्भर करता है। बाएं नाक की भी इसी प्रकार इड़ा नाड़ी, चन्द्रशक्ति में यमुना रस प्रवाहित होता है।

और बीच में ज्ञान शक्ति लिए सुषम्ना नाड़ी जिसने सरस रस अर्थात सरस्वती नदी प्रवाहित (2/9)
हैं। जब दोनों नाड़ी शुद्ध संतुलित रहती है तब बीच की नाड़ी में गुप्त सरस्वती प्रकट हो नीचे मूलाधार में बैठी शक्ति को ऊपर मस्तिष्क में भेजती है। जहाँ शिव शव की भांति प्रतीक्षा कर रहे। और तब शिवशक्ति के इसी मिलन को परम सत्य की उपलब्धता कहते हैं। जिसके बाद कुछ पाना नहीं होता। (3/9)
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दो बड़े सवाल उठाये जाते हैं।

पहला: जो इतिहास में हो चुका उसे आज क्यों उठाया जा रहा है... इससे क्या मिलेगा? इससे तो नफरत ही फैलेगी ना?

दूसरा: आज मंदिर मस्जिद में लगे हुए हैं... नौकरी, महंगाई, अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर कोई बात क्यों नहीं कर रहा?

पहले का उत्तर: इतिहास (1/21) Image
में अगर कोई गलत काम हुआ है तो उसे आज क्यों ना ठीक किया जाए? अगर अन्याय हुआ है तो उसे भुला दिया जाए? पीढ़ीत का क्या... वो कहाँ जाए?

न्याय शब्द सुना है?

न्याय की कोई उम्र नहीं होती... 100 साल पहले हुए किसी अन्याय के लिए भी लड़ाई लड़ी जा सकती है... लड़ी जानी चाहिए। क्या (2/21)
रंग भेद, छुआ छूत, जातिवाद जैसे मुद्दों पर आज तक वाद विवाद और कानूनी लड़ाई नहीं लड़ी जाती?

पश्चिम में क्या रंगभेद, नाज़ीवाद, फासिस्टवाद, गोरे काले जैसे अन्यायो पर चर्चा नहीं होती?

बात करते हैं मंदिर मस्जिद की... मान लीजिये 300 साल पहले किसी आक्रांता ने मंदिर को तोड़ कर (3/21)
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हम मानवाधिकार ग्राउंड्स पर भारत के सिखों का साथ देंगे और उनकी खालिस्तानी मूवमेंट में हमारा पूरा सहयोग रहेगा! : पाकिस्तान❗

पर इन कुत्ते की ओलादों से पूछो कि तुम्हारे यहां पर जो सिखों के साथ किया जा रहा है, ग्रंथियों की बेटियों के साथ बलात्कार करना जबरन उठा कर ले जाना आदि (1/4)
जो आप लोग कर रहे हो, वह कौन सा मानवाधिकार है?

पूरी दुनिया को धीरे-धीरे यह बात समझ आने लगी है कि पाकिस्तान जो बोलता है वह सिर्फ आतंकवादी भाषा है। इसीलिए यह देश आज भी फाटफ की ग्रे लिस्ट में पड़ा हुआ है। कोई भी देश इसको ना तो उधार दे रहा है और ना इस का साथ दे रहा है।
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"कश्मीर बनेगा पाकिस्तान!" "भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह" कहने वाले अब जल्द ही पाकिस्तान के साथ ऐसा ही सब कुछ होता हुआ देखेंगे।

क्योंकि पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर बनेगा भारत, और पाकिस्तान तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह... और बनेगा (3/4)
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#प्रतिमा_निर्माण_में_पत्थरों_के_चयन_का_तरीका

मन्दिरों में प्रतिमा निर्माण से पहले पत्थरों की परीक्षा की जाती है। मयमतम्, अग्नि पुराण और सूत्रधार-मण्डन जैसे ग्रंथों में पत्थरों की जांच के लिए नियम लिखे गए हैं और देवता मूर्ति प्रकरण के अनुसार पाषाण को तीन प्रकार में (1/6)
वर्गीकृत किया जाता है। पुंशिला, स्त्रीशिला और नपुंसक शिला।

जिस पत्थर से 'गजघंटारवाघोषा' मतलब हाथी के गले में बंधी घंटी जैसी मधुर आवाज उठती है उसे पुंशिला कहते हैं। पुंशिला सम-चोरस होती हैं और देवप्रतिमा तथा शिवलिंग निर्माण में इसका उपयोग किया जाता है।
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'कांस्यतालसमध्वनिः' कांसे जैसी ध्वनि उत्पन्न करने वाले पत्थरों का वर्गीकरण स्त्रीशिला के रूप में किया गया है, इनका आकार गोल होता है और सूत्रधार-मण्डन के अनुसार देवी प्रतिमा का निर्माण इससे किया जाता है। यह शिला मूल में स्थूल तथा अग्रभाग में कृश होती है।

अनियमित आकार (3/6)
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बाबा विश्वनाथ के प्रकट होने की खबर सुनते ही मन ही मन उनकी पूजा और प्रणाम करते हुवे मेरे मन में सबसे पहले यही विचार आया कि श्रीराम के लिए जो अयोध्या गए थे वो कार सेवक थे... वो मर्यादित थे क्योंकि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।

अब जब काशी में भोले बाबा प्रकट हो ही (1/4)
गए हैं तो गण भी वहीं पहुँचेंगे जहाँ उनके बाबा साक्षात विराजमान रहेंगे, और गण मर्यादित नही होते, गण किसी मर्यादा को नही मानते, वो केवल शिव को मानते हैं, वो केवल शिव के आदेश को मानते हैं। वो केवल शिव के तीसरे नेत्र की विध्वंशक भंगिमाओं को जमीन पर परिपूर्ण करते हैं।
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ये मेरा विश्वास है की आज बाबा ने स्वयम् को प्रकट करने के साथ ही उन लाखों करोड़ों गणों को भी आदेशित कर दिया है जो कही कंदराओं में, वनों में, हिमालय में झरनों के पास, बर्फीले पहाड़ों पर या गृहस्थ में बैठे सदियों से भोलेनाथ की भंगिमाओं पर टकटकी लगाए इंतजार कर रहे थे। (3/4)
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कौशल नरेश के पास बद्धरेक नाम का एक महाबलवान हाथी था। उसके बल और पराक्रम की कहानियां दूर दूर तक फैली थीं।

लोग कहते थे कि युद्ध में उस जैसा कुशल हाथी कभी देखा ही नहीं गया था। बड़े बड़े सम्राट उस हाथी को खरीदना चाहते थे पाना चाहते थे। बड़ो की नजरें लगी थी उस हाथी पर। वह (1/23)
अपूर्व योद्धा था हाथी।

युद्ध से कभी किसी ने उसको भागते नहीं देखा। कितना ही भयानक संघर्ष हो कितने ही तीर उस पर बरस रहे हो और भाले फेके जा रहे हो वह अडिग चट्टान की तरह खड़ा रहता था। उसकी चिंघाड़ भी ऐसी थी कि दुश्मनों के दिल बैठ जाते थे। उसने अपने मालिक कौशल के राजा की बड़ी (2/23)
सेवा की थी। अनेक युद्धों में जिताया था।

लेकिन फिर वह वृद्ध हुआ और एक दिन तालाब की कीचड़ में फंस गया। बुढ़ापे ने उसे इतना दुर्बल कर दिया था कि वह कीचड़ से अपने को निकाल न पाए।

उसने बहुत प्रयास किए लेकिन कीचड़ से अपने को न निकाल सका सो न निकाल सका। राजा के सेवकों ने भी (3/23)
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उत्तर तो देना ही होगा...

हमारे गुरु जी (वायु सेना के नव पायलटों के शिक्षक) मूर्ति सर का मिलट्री अस्पताल में शल्य चिकित्सा हुई है। हम विद्यार्थी गुरु जी के सम्मान में उनकी देखभाल के लिए बारी बारी से अस्पताल में रहते हैं, जब भी डॉ या नर्स हमें बुलाते हैं (1/14)
हम सेवा देने के लिए जाते हैं। कल रात्रि मुझे सेवा देने का सौभाग्य मिला था।

मैं वहाँ बैठ कर प्रतीक्षा करने लगा जहाँ अन्य अस्पताल में भर्ती लोगों के रिश्तेदार के लिए स्थान निर्धारित किया हुआ है। भारत के अनेक भागों के बंधू भगिनी वहाँ बैठे थे। ये स्थान एक बड़ा हाल कमरा (2/14)
है, जिस में बेंच लगी है बैठने के लिए।

एक सरदार आयु ६० के लगभग। बड़ी सफ़ेद दाढ़ी, नीली पगड़ी, हाथ में कड़ा, और गात्रा में किरपान, सफ़ेद कुरते पजामे में संत जैसे लग रहे थे। लोगों की भीड़ उन्हें सुनने के लिए उनके पास जमा हो गई थी। सरदार का पुत्र सेना में है और सरदार की पत्नी (3/14)
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ज्ञानवापी के तहखाने में मिला एक ओर तहखाना, जिसे ईंटों से बनाया गया है किसी अदृश्य शक्ति को छुपाने के लिए!?

ज्ञनवापी के एक तहखाने के भीतर भी एक तहखाना का पता चला है? जो चारों तरफ से बंद ईंट की दीवारों का एक कमरा है, जिसे बनाया गया है!! इसमें क्या है किसी को भी पता नहीं (1/8)
है!? इन दीवारों के बीच एक दरवाजा भी मिला है, जिसे आज खोलना संभव नहीं हो पाया... इसकी बनावट ऐसी लगती है जैसे एक खाली हिस्से को दीवारों से बंद किया गया है।

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही लगातार आज दूसरे दिन रविवार को भी शुरू हुई। इस दौरान मस्जिद और (2/8)
गुंबद के बाद तहखाने के भी कुछ हिस्सों का सर्वे के साथ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की गई! इसमें मस्जिद के गुंबदों की संरचना असामान्य पाई गई? ऐसा लगता है जैसे इन्हें अतिरिक्त रूप से बनाया गया है!? इन गुंबदों की बनावट जैसी बाहर से दिखती है, भीतर से काफी अलग है!? चर्चाओं के (3/8)
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तीन दिन पूर्व लन्दन में एक १९ वर्षीय युवती सविता गिडवानी की उसके २२ वर्षीय प्रेमी उस्मान द्वारा पीट पीट कर हत्या कर दी गई थी। सविता के माता पिता इन्दौर मध्यप्रदेश में व्यापार करते हैं, सविता लन्दन डॉक्टरी की पढ़ाई करने गई थी... उसका प्रेमी उस्मान इस्लामी (1/10)
देश ट्यूनीसिया से है और लन्दन में शरणार्थी बन कर रह रहा है।

ब्रिटेन ने अरब देशों में हुए सरकार विरोधी उपद्रव के कारण लाखों लोगों को अपने देश में शरण दी थी। उन में से एक उस्मान भी है। यूरोप में रहने वाले मुस्लिम शरणार्थियों को वहाँ की सरकारें मोटा भत्ता रहने को घर (2/10)
व अन्य सुविधाएं देती हैं।

दूसरी और सविता गिडवानी का परिवार १९४७ में भारत के विभाजन से उत्पन्न स्थिति के कारण सिंध प्रान्त को त्याग कर शेष भारत में आकर रहने लगा था। टी एस गिडवानी साहब ने कठिन परिश्रम से भारत में अपना व्यापार खड़ा किया और अपनी परिश्रम द्वारा कमाई (3/10)
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जागते जा रहे सनातन समाज द्वारा एक के बाद एक... ज्ञानवापी से शुरू हुआ वापस लेने का अभियान मथुरा से लेकर मध्य प्रदेश के धार तक और ताज महल से लेकर कुतुब मीनार तक पहुँच चुका है... हिंदुओ के जाग कर अपने अधिकार वापसी के इस जोश, उमंग और उत्साह से बौखलाई देश और धर्म विरोधी ताकतें (1/10)
अब लगभग विक्षिप्त सी होती जा रही हैं... यह मै नही... उनके टी.वी. डिबेट से लेकर प्रिंट और सोशल मीडिया पर दिये जा रहे उनके बेसिरपैर के कुतर्की बयान बता रहें है कि वो कितने बौखलाये हुये हैं... अब वो सोच नही पा रहे हैं कि लगातार संगठित होते जा रहे हिंदुओं को कैसे रोका जाय... (2/10)
संगठित होने से रोकने के लिये अब इन्हे कैसे बहकाया जाय... क्या किया जाय... अब यह सोच रहे हैं...!

तभी तो अपने बयानो और टी.वी की बहसो में कभी दलितों या बौद्धों का मुद्दा उठा कर एक तरफ अपने पाप को छिपाने के साथ हिंदुओं को बाँटना चाह रहे हैं...!!

फिर कह रहा हूँ कि जान और (3/10)
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मुंडका आग हादसे के देवदूत, क्रेन ड्राइवर अनिल तिवारी और दयानंद तिवारी ने 50 लोगों को बचाया, हिन्दू हैं इसीलिए दबा रहा लिबरल गैंग?

दिल्ली के मुंडका में लगी भीषण आग में लपटों के बीच फंसे लोगों के लिए शुक्रवार को देवदूत बनकर दो क्रेन चालक आए। मुंडका से गुजरते वक्त इन्होंने (1/10)
देखा कि एक 4 मंजिला इमारत धू-धू कर जल रही है और उसके अंदर कई सारे लोग फँसे हुए हैं। इसके बाद इन्होंने अपनी परवाह न करते हुए 50 से भी अधिक लोगों को बचाया।

न्यूज 18 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्रेन के ड्रायवर थे दयानंद तिवारी और उनके साथ एक अन्य ड्रायवर अनिल (2/10)
तिवारी थे। दयानंद बताते हैं कि वो लोग मुंडका उद्योग से लौट रहे थे। रास्ते में देखा कि एक बिल्डिंग धू-धू कर चल रही है। इस पर उन लोगों ने लोगों की मदद करने के लिए रॉन्ग साइड से क्रेन लेकर जाने का फैसला किया।

क्रेन ड्रायवर दयानंद तिवारी बताते हैं कि वो फुटपाथ पर क्रेन को (3/10)
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प्राइवेट स्कूल में ईसाई धर्मांतरण का धंधा, ‘हनुमान चालीसा’ पर आपत्तिजनक टिप्पणी, गरीब महिलाओं- बच्चियों को जुटाया, हिन्दू विरोधी भाषण।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक प्राइवेट स्कूल में ईसाई धर्मांतरण का मामला सामने आया है। बैरागढ़ इलाके में इसकी सूचना मिलने के बाद (1/7)
पुलिस मौके पर पहुँची। ये मामला ‘क्राइस्ट मेमोरियल स्कूल’ का है, जिसका संचालन करने वाले लोग ईसाई समुदाय से ही आते हैं। सूचना मिली कि यहाँ कुछ लोगों के ईसाई धर्मांतरण के प्रथम चरण की प्रक्रिया कराई जा रही है। हिन्दू समाज के कई महिला- पुरुष भी वहाँ पर उपस्थित थे।

कुल मिला (2/7)
कर स्कूल में शैक्षणिक कार्यों के नाम पर संदिग्ध गतिविधियाँ चल रही थीं। स्कूल के संचालक को भी हिन्दू धर्म के विरोध में भाषण देते हुए पाया गया। साथ ही कई ऐसी पुस्तकें भी मिली हैं, जिनमें हिन्दू धर्म के बारे में अनाप-शनाप लिख कर घृणा फैलाने का कार्य किया जा रहा था। बैरागढ़ (3/7)
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भोजपुरी, हिंदी, मराठी सब में गरजे फडणवीस, कहा, ‘अरे ओवैसी सुन ले, कुत्ता भी ना पेशाब करेगा, औरंगजेब की पहचान पर’, CM उद्धव पर भी निशाना।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने राजधानी मुंबई के गोरेगाँव स्थित नेस्को मैदान में आयोजित (1/9)
‘हिंदी भाषी महासंकल्प सभा’ में जम कर दहाड़ लगाई। हनुमान चालीसा के साथ अपनी रैली की शुरुआत करने के बाद भाजपा नेता ने कहा, "असदुद्दीन ओवैसी औरंगजेब की कब्र पर जाता है और माथा टेकता है, और तुम (राज्य सरकार) देखते रह जाते हो, अरे डूब मरो! चुल्लू भर पानी में डूब मरो।”
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देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा, "अरे ओवैसी सुन ले, कुत्ता भी ना पेशाब करेगा, औरंगजेब की पहचान पर। अब तो भगवा लहराएगा पूरे हिंदुस्तान पर।” उन्होंने ऐलान किया कि ‘हनुमान चालीसा’ की तो शुरुआत हो ही चुकी है, अब लंका दहन भी होगा। उन्होंने शिवसेना सुप्रीमो और राज्य के मुख्यमंत्री (3/9)
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काशी विश्वनाथ का मन्दिर महारानी अहिल्याबाई होल्कर की अमूल्य कीर्ति है। काशी के लिए अहिल्याबाई होल्कर का क्या योगदान है इसे इतिहास का अवलोकन किए बिना नहीं समझा जा सकता।

आनन्दवन काशी को पहला आघात 1194 में लगा था, जब मोहम्मद गोरी के सिपहसलार क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने काशी विश्वनाथ (1/14)
समेत यहाँ के प्रमुख मंदिरों को तोड़ दिया। बाद के कालखण्डों में हुसैन शाह सिरकी (1447-1458) और सिकंदर लोधी (1489-1517) ने काशी विश्वनाथ और काशी के अन्य प्रमुख मंदिरों को तोड़ा।

बार-बार काशी पर इस्लामिक हमलावर आघात करते रहे लेकिन शिवनगरी काशी पुनः पुनः हिन्दुत्व के (2/14)
अमृततत्व से सँवरती रही।

इसी मन्दिर को औरंगज़ेब के 18 अप्रेल 1669 के फ़रमान से तोड़ दिया गया। मन्दिर के ध्वस्त अवशेषों से ही उसी स्थान पर वर्तमान मस्जिद खड़ी कर दी गयी। पीछे की तरफ मन्दिर का कुछ हिस्सा छोड़ दिया गया ताकि इसे देख कर ग्लानि से हिन्दु रोते रहें।

काशी (3/14)
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अरे, आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा है...
😢

गणित के आधार पर... ज्ञानवापी के वज़ूखाने से गंदे पानी में प्राप्त... डूबे... 12 फुट आठ इंच... व्यास के भगवान शिव के लिंग अर्थात शिवलिंग की परिधि हुई लगभग 45 फिट!
परम विशाल-भव्य शिवलिंग काले पत्थर का बना है !... ऊँचाई अज्ञात !!
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भगवान शिव के जीवंत स्वरूप पर सदियों से गंदे हाथ-पैर और धूल-पसीने से सनी दाढ़ियाँ धोई जा रही थीं, नमाज़ी कुल्ला कर रहे थे ! धिक्कार है हम पर...!!

#साभार
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सत्य परेशान जरूर हो सकता है... लेकिन पराजित कभी नही हो सकता है... आज काशी मे यह विद्वत वचन साबित भी हो गया... लगता है कि हमारे नंदी महाराज की अपने आराध्य महादेव के प्रत्यक्ष दर्शन की प्रतीक्षा शायद शीघ्र समाप्त होने जा रही है...!

सबसे पहले तो नीचे तस्वीर मे देखिये जो (1/10)
औरगज़ेब का लिखित आदेश है, जो 9 अप्रैल 1669 का है, जिसमें हिंदू मंदिरों को तोड़ने के लिए फरमान जारी किया गया है... जो इस समय म्युजियम मे सुरक्षित रखा है... यह सबूत मुस्लिम पक्ष के गाल पर तमाचा लगा रहा है!!

औरगज़ेब के इसी फरमान या कहिये आदेश पर ही बनारस के काशी विश्वनाथ (2/10)
मंदिर और मथुरा का केशव राय मंदिर तुड़वाया गया था।

इसके बावजूद भी मुसलमान औरगज़ेब को अपना हीरो मानता है... क्या यही गंगा जमुनी तहजीब और भाईचारा है... जिसकी मुगली घुट्टी आजादी के बाद से हिंदुओ को काँगी नेता पिलाते रहे हैं...!!

बेचैन विपक्ष समझ ले कि च्युंटी! ये शब्द (3/10)
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ज्ञानवापी परिसर काशी (वाराणसी) में अदालत के आदेश पर चल रहे सर्वे के दौरान बहुत ही महत्वपूर्ण साक्ष मिले हैं सर्वे टीम को... इन साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी प्रशासन को देते हुए अदालत ने सख्त आदेश दिया है कि यदि इन साक्षों को कोई क्षति पहुंची तो उसके लिए (1/2)
जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर, सीआरपीएफ के कमांडेंट, डीजीपी और मुख्य सचिव जिम्मेदार होंगे।

#साभार
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भारत को पिछले 300 वर्ष से जो सबसे बड़ा खतरा है, वह ईसाई मिशनरियों का है। यह अच्छी बात है कि आज युवा पीढ़ी इस पर काम कर रही है।

हम ईसाई नहीं बने हैं, लेकिन हमारा नज़रिया, सोच पैटर्न औपनिवेशिक युग का है। मिशनरियों की कार्यपद्धति यह है कि धर्मपरिवर्तन करो, यदि (1/13)
यह न हो सको तो धर्म की सार्वभौमिकता को करो। इसका परिणाम होता है, संस्कृति अपनी विशिष्टता खो देती है, अब उनको एक सपाट रास्ता मिलता है आगे बढ़ने के लिये।

ईसाई मिशनरियों से निपटने का सबसे अच्छा रास्ता है कि आप अपनी विशिष्टता बनाये रखें।
अब मातृत्व दिवस ही लीजिये। कुछ (2/13)
दिन में यह एकादशी व्रत बनेगा। इसको मनाने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है। हम आप इनको समझ सकते हैं। लेकिन दूरदराज झुग्गी झोपड़ी में बैठा व्यक्ति तत्वज्ञानी नहीं है। वह एक दिन इसे एकादशी व्रत ही समझेगा। एक दिन जब ईसाई मिशनरी उसके पास पहुँचेगी, और 5 लाख का चेक देंगी, तो वह (3/13)
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अक्षय कुमार के फिल्म पृथिवीराज चौहान से मेरा कोई विरोध नहीं है... मैं देखूंगा... क्योंकि इसके दो कारण है...

पहला, हमें अपने एक पूर्वज का इतिहास पास से देखने को मिलेगा... हमको ये फिल्म राजा पृथ्वीराज के लिए देखनी है...

दूसरा, इस फिल्म के निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी (1/3)
जी (चाणक्य) हैं और उनके जैसा विद्वान पुरुष निश्चित रूप से पृथ्वीराज रासो का सही मंचन करवाएगा...

और रही बात एक्टिंग की, तो वो नजरअंदाज करो। एक्टिंग मत देखो, अपना इतिहास देखो, बहुत मुश्किल से बॉलिवुड में ऐसी फिल्मे बननी शुरू हुई है, (2/3)
अगर विरोध करोगे तो आगे कोई हिम्मत नही करेगा।

#साभार
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