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छप्पनभोग प्रसाद का कथा और सभी का नाम --

जब इंद्र देवता गोवर्धन वासियों पर क्रोधित हो गए थे और अपना गुस्सा दिखाने के लिए झमझम बरसने लगे थे। इतना बरसे कि कहर बरपा दिया, ना किसी को और, ना किसी को ठौर। पूरा गाँव जैसे डूब ही गया था कि सबने कन्हैया से बिनती की।

#जयश्रीकृष्ण
#छप्पनभोग
अब कन्हैया का तो था ही ऐसा कि किसी ने भी पुकारा और बस चल दिए। उस दिन भी कन्हैया को आना ही पड़ा। सीधे गए और गोवर्धन पर्वत को ही उठा लिया अपनी कनिष्ठा पर और सारे गाँव वालों को खड़ा कर लिया उसके नीचे।

#छप्पनभोग #जय_श्री_राधे_कृष्ण
बस सात दिनतक बिना कुछ खाये-पिए कान्हा सबको संभाले रहे जबतक कि इंद्र थक कर हार नहीं मान लिए।अब कान्हा तो बढ़िया जमकर आठों पहर खाना खाया करते थे पर गाँव वालों को बचाने के लिए कुछ ना खाया ना पीया।बाद में गाँव वालों ने मिलकर सात दिन और आठ पहर छप्पन भोग बनाकर कान्हा को अर्पण करते दिए।
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सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे।
तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुमः॥
!१/१!

सच्चिदानन्दस्वरूप भगवान् श्रीकृष्णको हम नमस्कार करते हैं, जो जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और विनाशके हेतु तथा आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक~ तीनों प्रकारके तापोंका नाश करनेवाले हैं॥१!!#जयश्रीकृष्ण Image
यं प्रव्रजन्तमनुपेतमपेतकृत्यं
द्वैपायनो विरहकातर आजुहाव।
पुत्रेति तन्मयतया तरवोऽभिनेदु-
स्तं सर्वभूतहृदयं मुनिमानतोऽस्मि॥
!१/२!

जिस समय शुकदेवजीका बिना यज्ञोपवीत-संस्कार हुए संन्यासके लिए जाते देखकर पिता व्यासजी पुकारने लगे~बेटा!कहां जारहे हो?उस समय वृक्षोंने उत्तर दिया था॥२!!🙏 ImageImage
नैमिषे सूतमासीनमभिवाद्य महामतिम्।
कथामृतरसास्वादकुशलः शौनकोऽब्रवीत्॥
!१/३!

एक बार भगवत्कथामृतका रसास्वादन करनेमें कुशल मुनिवर शौनकजीने नैमिषारण्य क्षेत्रमें विराजमान महामति सूतजीको नमस्कार करके उनसे पूछा॥३!!

#श्री_भगवत_भागवत_सेवा_संस्थानम्
#Shri_Bhagavat_Bhagwat_Seva_Sansthanam Image
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#जयश्रीकृष्ण🙏
एक यूरोपियन व्यक्ति थे रोनाल्ड निक्सन, उनका पूरा नाम रोनाल्डो हेनरी निक्सन था। उनका जन्म 10 मई 1898 को इंग्लैंड में हुआ था, वो एक ब्रिटिश और अध्यात्म गुरु थे -
वह रूढ़िवादी वैष्णववादी हिंदू धर्म को आगे बढ़ाने वाले पहले यूरोपीय लोगों में से एक थे। Image
यह अंग्रेज थे लेकिन आज लोग इन्हें “कृष्ण प्रेम” के नाम से जानते हैं, यह इंग्लैंड से थे, 18 वर्ष की उम्र में प्रथम जर्मनी युद्ध में श्री रोनाल्ड निक्सन ने उत्साह पूर्वक भाग लिया, वह उस युद्ध में हवाई डेरे में एक ऊंचे अफसर थे,
युद्ध का उन्माद उतर जाने पर उनके हृदय में भयंकर घटना अपनी आंखें से देखी थी।
हत्या, मारकाट, मृत्यु का तांडव, रक्तचाप और लोगों का शोर इन सब ने उनकी शांति हरण कर ली थी, उनकी शांति को छीन लिया था। फिर वह एक दिन कैंब्रिज विश्वविद्यालय जा पहुंचे, फिर वहां से निक्सन अधाय्त्म से जुड़े।
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