आज यह अत्यंत जरूरी है कि #आधार_संशोधन_विधेयक के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए राज्य सभा के सदस्य हस्तक्षेप करें| उनके पास अभी भी मौका है।
हम उनसे अनुरोध करते हैं कि कम से कम #AadhaarAmendmentsBill को राज्य सभा की प्रवर समिति को भेजें|
UIDAI के पूर्व अधिकारी एवं iSpirt के बीच हुई बातचीत के खुलासे से साफ़ है कि आधार प्रणाली पर कॉर्पोरेट लॉबी हावी है और सरकार निजी कंपनियों को आधार डेटा उपलब्ध करवा रही है। निःसंदेह सरकार निजी कंपनियों को उच्चतम न्यायालय के निर्णय से अधिक प्राथमिकता दे रही है।
शुक्रवार 4 जनवरी को लोक सभा मे #AadhaarAmendmentsBill का नाम-मात्र चर्चा के बाद पारित हो जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि राज्य सभा के सदस्य इस विधेयक का अधिकतम प्रतिरोध करेंगे। हमारी माँग है कि संसद इस भयानक विधेयक पर गहन समीक्षा और पुनर्विचार करे।
उच्चतम न्यायालय ने आधार अधिनियम, 2016, की धारा 7 के तहत कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार के उपयोग को वैध ठहराया था। इसका अनुपालन करते सरकार को विधेयक द्वारा पहचान के वैकल्पिक साधन निर्धारित करना चाहिए| लेकिन सरकार ने यह कार्य अनुरोधक संस्थाओं पर छोड़ दिया है|
#आधार_संशोधन_विधेयक, 2018, उच्चतम न्यायालय के न्यायिक निरीक्षण के स्पष्ट निर्देश का उल्लंघन करता है। आधार अधिनियम, 2016, की धारा 33, जिसको भी उच्चतम न्यायालय ने असंवैधानिक ठहराया था, को इस विधेयक द्वारा सजीव किया गया है।
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