अर्पित भार्गव Profile picture
न कंचित शाश्वत://देहाती // अंग्रेज़ी नहीं आती//

Aug 18, 2019, 11 tweets

बाटला हाउस(फ़िल्म) और मेरा अनुभव :-

पहली बात कोई फ़िल्म के रिव्यू नही लिख रहा, एक आम भारतीय होते हुए मैंने फ़िल्म में क्या महसूस किया वो साँझा कर रहा हूँ ।

फ़िल्म वाकई अच्छी है, 4 सीन फ़िल्म के ऐसे है जो मेरे करीब है ।

पहला सीन - जब जॉन अब्राहम ,फ़िल्म में इंसेप्क्टर "मोहन चन्द्र शर्मा" का किरदार निभा रहे रवि किशन कि धर्म पत्नी "माया शर्मा" (असली नाम) को वीरगति की खबर देने जाते है बोलते है :- "मोहन चन्द्र शर्मा" एक बहादुर अफसर थे ।

कितना पीड़ादायक होता है ये "था" शब्द एक झटके में कोई "है" से "था" हो जाता है ।
एक परिवार की पूरी दुनियां लूट जाती हैं ।

दूसरा सीन:- जब गृह मंत्रालय से निकलते वक्त तिरंगे को देख कर एसीपी "संजीब कुमार यादव" (असली नाम ) (फ़िल्म में अदाकर जॉन अब्राहम) रुक जाते है और 2 मिनट निहारते

तब उनके सीनियर भी जॉन अब्राहम को ये करते देख कर हौसला देकर बोलते है वो (कांग्रेस पार्टी) तुम्हे अपनी मजबूरी में वीरता चक्र दे रहे हैं,लेकिन तुम इसके असली हकदार हो ।
कोई कुछ भी कहे तुम सही हो ।।

तीसरा सीन :- जब जनता, NGo एक्टिविस्ट लोगो के भयंकर दबाव और मीडिया में दोषी साबित..

होने पर जब जॉन अब्राहम खुद को घर मे गोली से मारने का प्रयास करते है, तब जिस तरह उनकी पत्नी उन्हें संभालती हैं वाकई देखने लायक है,पुरूष को सिर्फ स्त्री ही संभाल सकती है, जिस तरह गले लगाती है ऐसा प्रतीत होता है जैसे मां ने बेटे को गले लगाया है ।
रियल में देखे तो ACp संजीब कुमार पे.

कितना प्रेशर रहा होगा ना देश का एक वर्ग उन्हें विलन मानता होगा इंसान का दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है चाहे कितना ही मजबूत पुरुष हो ।
Acp संजीब कुमार का परिवार भी उनके पीछे खड़ा रहा होगा,मेरा सलाम उस परिवार को ।

चौथा सीन :- जब कोर्ट में NGO ,एक्टिविस्ट(देश का चूतिया) वर्ग के वकील .

साहब जब एसीपी संजीब कुमार के सामने सवाल दागता है मोहन चन्द्र शर्मा को लेकर एक घटिया तरीके से तब तपाक से संजीब कुमार का जवाब देना इज्जत से बात कीजिए "अशोक चक्र सम्मानित श्री मोहन चंद्र शर्मा"जी कहिए ।।
ऐसे भावुक सीन ने ही इस फ़िल्म को मजबूत बनाया है ।

कांग्रेस का क्या कहे,राजमाता तो रोने लगी थी, दिग्विजयसिंह को अब तक ये एनकाउंटर फेक लगता हैं ,केजरी,अखिलेश , मायावती
जिसको जो बोलना है बोलने दो,हमारे हीरो एसीपी संजीब कुमार और वीरगति प्राप्त इंस्पेक्टर मोहन चन्द्र शर्मा जी है ।
हमे ये विश्वास बनाए रखना है

मोहन चन्द्र शर्मा जी भी जब ऊपर से ये सब देखते होगे तो कैसा लगता होगा उन्हें जिन लोगो के लिए उन्होंने प्राण त्याग दिए आज उनकी नजर में ही वो विलेन थे जो व्यक्ति प्राण त्यागते वक्त भी अपनी आंखों से एक कतरे तक को बाहर नहीं आने दिया ,ये सब देख के उस व्यक्ति के आंसू जरूर निकले होगे ।

रोज अपने पे इल्जाम सुनकर दर्द तो मोहन चंद्र शर्मा को भी हुआ होगा ।।
लेकिन ये दर्द दुबारा नही होना चाइए, ये आंसू दोबारा नही निकलने चाइए अगर ऐसा हुआ तो देशभक्ति से लोगो का विश्वास उठ जाएगा ।
धरती पे प्रलय आ जायेगा, शिव अपनी तीसरी आंख खोल देगे ।

फिर कोई अशोक चक्र समान्नित इंसेप्क्टर श्री मोहन चन्द्र शर्मा पैदा नहीं होगा ।

अपने हीरो पहचानिए, इस देश मे चल रहे एक वर्ग के जाल में मत फंसिए ।।

जय जय ।।

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