कुसुम शर्मा Profile picture

Apr 2, 2020, 14 tweets

अत्यंत आवश्यक पोस्ट, सभी पढ़े। मन मैला करके, पूर्वाग्रह व कुंठा के साथ पढ़ेंगे तो सब गलत ही लगेगा।

कोरोना से जंग में आम नागरिकों का मनोबल मनोरंजन के साथ मजबूत रहे इसलिए रामायण और महाभारत का प्रसारण प्रांरभ हुआ है। दुर्बुद्विजीवी ये देखकर अवसाद में है कि लोग इस बहाने....

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वो सत्य न जान जाये जो महाभारत या रामायण के बारे में फैलाकर दुर्बुद्विजीवियों ने वैमनस्य का बीज बोया हुआ है। लोग महाभारत या रामायण देखेंगे या पढ़ लेंगे तो शायद वे यह जान जायेंगे कि

1.दासी की कोख से पैदा हुआ विदुर हस्तिनापुर का महामंत्री था....

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और विदुर नीति के आधार पर हस्तिनापुर अपना प्रशासन चलाता था। स्वयं नीतिशास्त्र के महान गुरु बृहस्पति के शिष्य भीष्म,विदुर से सलाह मशविरा कर प्रशासनिक कार्यो में राजा को सलाह देते थे।

2. वनवासी एकलव्य जो द्रोणाचार्य से धर्नुविद्या नहीं पा सका था वह आगे चलकर मगध नरेश जरासंध का..👇

प्रधान सेनापति बना था और कृण्ण के विरुद्व युद्व किया था।

3. महाप्रतापी राजा भरत ने अपना उत्तराधिकारी अपने पुत्रों में से न चुनकर ऐसे व्यक्ति को चुना था जो राजा पद के लिए अत्यंत योग्य था, अतएव उस समय तक योग्यता के सिद्वांत को पूर्ण मान्यता पूरे समाज में थी।

4. नाव खेने वाले दासराज द्वारा पाली पोसी गयी पुत्री सत्यवती और हस्तिनापुर सम्राट शांतनु का विवाह हुआ था। यहीं सत्यवती आगे चलकर पांडवों और कौरवों की परदादी बनी थी। सबसे बड़ी बात सत्यवती जिनका पालन पोषण नाव खेने वाले ने किया था, उन्होंने एक ब्राम्हण पुत्र को भी जन्म दिया था, 👇

उसी ब्राम्हण पुत्र वेदव्यास ने महाभारत को जयसंहिता नाम से लिखा था।

5. महर्षि वाल्मिकी ने रामायण लिखी, पूरे उत्तर भारत में वाल्मिकी समाज महर्षि वाल्मिकी से अपने जड़े जोड़ता है। महर्षि वाल्मिकी की रचित रामायण में ही प्रभु श्रीराम का उल्लेख है जो क्षत्रिय वंश के है और

शबरी के झूठे बेर खाते है और निषादराज के साथ एक ही गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करते है।

6. महाभारत में महाबलशाली भीम कामरुप क्षेत्र के वन में रहने वाले दैत्य हिंडिम्बा की बहन हिंडिम्बी से विवाह करता है और भीम व हिंडिम्बी से उत्पन्न महापराक्रमी पुत्र घटोत्कच महाभारत के युद्व में

कर्ण द्वारा मारा जाता है। राजा शांतनु का सत्यवती से विवाह एवं भीम का हिंडिबी से विवाह ये दिखाता है कि उसी समय गैरक्षत्रिय कुलों में भी विवाह संपन्न होते थे और मान्य भी थे।

7.युद्व में एकलव्य व घटोत्कच की भागीदारी दिखाती है कि उस समय वन में रहने वाले युद्व करते थे।

यदि वे क्षत्रिय गुण रखते हो। स्वयं द्रोणाचार्य, भगवान परशुराम भी ब्राम्हण होते हुए भी युद्व करते है, क्योंकि उन्हें शस्त्र विद्या का ज्ञान था। इसलिए कर्म का सिद्वांत हमें यहां भी दिखता है।

8.द्रोपदी विवाह हो, सुभद्रा विवाह हो ( स्वयंवर विवाह नहीं था,

श्रीकृष्ण की मदद से उनकी बहन सुभद्रा को अर्जुन वरण करके ले गए थे) या कुंती का विवाह (स्वयंवर)हो, ये सभी विवाह दिखाते है कि महिलाओं को अपनी इच्छा का वर चुनने की आजादी थी और परिवारजन इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि ऐसे पुरुष से विवाह न हो जो पंसद का न हो।

इस संबंध में काशी नरेश अंबा के विवाह का अध्ययन अवश्य करना चाहिये जो आगे चलकर भीष्म जैसे महापराक्रमी के लिए विषाद का बड़ा कारण बना।

9. विध्यं क्षेत्र में रहने वाले निषाद राजा गुह ने श्रीराम को गंगा पार करने में मदद की, कहा जाता है कि राजा गुह ने गुरुकुल में श्रीराम के साथ

शिक्षा ग्रहण की थी। श्रीराम ने शबरी के झॅूठे बेर खाये थे अर्थात् पहले जाति की वजह से छूआछूत की मान्यता नहीं थी....मुझे लगता है कि बाद में रोग, महामारियों के प्रकोप से छूआछूत की मान्यता पनपी और कालांतर में इस मान्यता को जाति व्यवस्था का सामाजिक आधार मिल गया।

अब इतने सत्य एक साथ सामने आ जायेंगे तो निश्चित ही दुर्बुद्विजीवियों द्वारा समाज में विषवमन का जो कार्य चल रहा है, वो निश्चित ही बंद हो जायेगा। ध्यान दीजिए रामायण, महाभारत में मानवजीवन की गाथा है, जाति विजय या उत्कृष्टता की नहीं।

रामायण, महाभारत जीवन का गहन अध्य्यन कर जीवन जीने की उत्कृष्ट कला की सीख देती है।😊🙏

#रामायण

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