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हिंदू ही हिंदू का सहायक नहीं

Jul 8, 2020, 10 tweets

#जयश्रीकृष्ण🙏
एक यूरोपियन व्यक्ति थे रोनाल्ड निक्सन, उनका पूरा नाम रोनाल्डो हेनरी निक्सन था। उनका जन्म 10 मई 1898 को इंग्लैंड में हुआ था, वो एक ब्रिटिश और अध्यात्म गुरु थे -
वह रूढ़िवादी वैष्णववादी हिंदू धर्म को आगे बढ़ाने वाले पहले यूरोपीय लोगों में से एक थे।

यह अंग्रेज थे लेकिन आज लोग इन्हें “कृष्ण प्रेम” के नाम से जानते हैं, यह इंग्लैंड से थे, 18 वर्ष की उम्र में प्रथम जर्मनी युद्ध में श्री रोनाल्ड निक्सन ने उत्साह पूर्वक भाग लिया, वह उस युद्ध में हवाई डेरे में एक ऊंचे अफसर थे,

युद्ध का उन्माद उतर जाने पर उनके हृदय में भयंकर घटना अपनी आंखें से देखी थी।
हत्या, मारकाट, मृत्यु का तांडव, रक्तचाप और लोगों का शोर इन सब ने उनकी शांति हरण कर ली थी, उनकी शांति को छीन लिया था। फिर वह एक दिन कैंब्रिज विश्वविद्यालय जा पहुंचे, फिर वहां से निक्सन अधाय्त्म से जुड़े।

उन्होंने अल्मोड़ा, भारत के पास मर्तोला में एक आश्रम की स्थापना की। एक सख्त गौड़ीय वैष्णव जीवन के बाकी हिस्सों में रहकर, वह बहुत माने जाते थे।
रोनाल्ड निक्सन का परिचय वेदांत ईश्वर ज्ञान के बारे में हुआ, और ईश्वर प्राप्ति की खोज में भारत आ गए।

भगवान की खोज में भारत की तरफ से श्री कृष्ण प्रेरणा से ब्रज में आकर बस गए। पर उनका कृष्ण से इतना गहरा प्रेम था कि वह कन्हैया को कृष्ण को अपना छोटा भाई मानने लगे थे, एक दिन उन्होंने हलवा बनाकर कृष्ण जी को भोग लगाया, पर्दा हटा कर देखा तो हलवे में छोटी छोटी उंगली के निशान थे,

जिसे देख निक्शन की आंखों से अश्रुधारा बहने लगे,क्योंकि इससे पहले वह कई बार भोग लगा चुके थे किन्तु पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था,
एक दिन ऐसी घटना घटी कि सर्दियों का समय था, निक्सन कुटिया के बाहर सोते थे,

इनका प्रतिदिन का नियम था, कृष्ण जी को अंदर विधिवत सुलाकर रजाई ओढ़ाकर फिर खुद सोते थे। एक दिन की बात है निक्सन सो रहे थे, मध्यरात्रि को अचानक उनको ऐसा लगा जैसे किसी ने उन्हें आवाज दी- हो दादा, हो दादा इन्होंने जब उठकर देखा तो कोई नहीं दिखा, वह सोचने लगे हो सकता है यह मेरा भ्रम हो

थोड़ी देर बाद उनको फिर सुनाई दिया... "दादा हो दादा" उन्होंने अंदर जाकर देखा तो पता चला कि आज वह कृष्ण जी को रजाई ओढा़ना भूल गए थे, वह कृष्ण जी के पास जाकर बैठ गए और बड़े प्यार से बोले आपको भी सर्दी लगती है क्या?

निक्सन का इतना कहना था कि श्री कृष्ण जी के आँखों से आंसुओं की धारा बह चली, ठाकुर जी को इस तरह रोता देख निक्सन भी फूट-फूट कर रोने लगे,

उस रात्रि ठाकुर जी के प्रेम में अंग्रेज भक्त इतना रोया उनकी आत्मा उनकी पंचभौतिक शरीर को छोड़कर श्री कृष्ण जी में समां गयी। फिर निक्सन कृष्ण प्रेम नाम से विख्यात हुए🙏🙏🙏🙏🙏

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