योगी राज में अपराधियों और गुंडों के एनकाउंटर पर स्क्रीन काली करने वाले पत्रकार और मानवाधिकार का झुनझुना बजाने वाले एक्टिविस्ट, बंगाल में जो हो रहा है उस पर कुछ नहीं बोलेंगे।
हेमताबाद से बीजेपी विधायक, देबेन्द्र नाथ रॉय की आज हत्या करके शव को खम्भे से लटका दिया गया। #Bengal
अपराध की रिपोर्टिंग करने से पहले ये देखा जाता है कि अपराध किस राज्य में हुआ, वहाँ सत्ता में कौन है। वो सेक्युलर है या कम्यूनल - उनकी नज़र में। उसके बाद रिपोर्ट की शक्ल कैसी होगी, प्राइम टाइम पर होगा या फुट नोट में डाला जाएगा? आंसू बहाने हैं या नहीं? ये सब तय होता है। #Bengal
और सबसे बड़ी बात है कि ये सब एकदम खुलकर हो रहा है। पत्रकार और एक्टिविस्ट का जो नेक्सस है, वो कह रहा है कि हम तो ऐसे ही रिपोर्टिंग करेंगे, जो उखाड़ना है उखाड़ लो। कोई कानून नहीं है, कोई मर्यादा नहीं है, सेल्फ रेगुलेशन का एक फरेब है। #Bengal
बंगाल में, केरल में चाहे जितनी हत्यायें हो जाये, लेकिन आप इस वर्ग विशेष को कभी उस पर हो हल्ला मचाते नहीं देखेंगे। हाल के दिनों तक मध्य प्रदेश में भी यही हाल था। छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब भी। इसी टेक्निक से महाराष्ट्र बेस्ट स्टेट और ठाकरे बेस्ट सीएम बन जाते हैं। #Bengal
लेकिन अगर आप ने इनको गलती से भी प्रेस्टीट्यूट बोल दिया तो ये ऐसा माहौल बना देंगे जैसे देश में आपातकाल लागू हो गया हो। दिन भर दूसरों के उपर कीचड़ उछालते रहते हैं लेकिन चाहते हैं कि इनकी क़मीज़ पे छींटे न पड़े।
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