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I write stories. Stories of “Bhārata”. ✍️ @B_Parikrama ॥ Tapori »» Pramey »» Trushar ॥

Jul 28, 2020, 5 tweets

ऋग्वेद के ऐतरेय ब्राह्मण में शुन:शेपाख्यान में हरीशचंद्र के पुत्रप्राप्ति का प्रसंग है। निःसंतान हरीशचंद्र ने संतानप्राप्ति के मोह में वरुण देव का आह्वान किया, वरुण देव ने सशर्त संतानप्राप्ति का वरदान दिया और रोहित का जन्म हुआ लेकिन…

लेकिन वरुण की शर्त के अनुसार पुत्र का चेहरा देखने का मोह पूरा कर रोहित को वापस वरुण को सौंप देना आवश्यक था। हरीशचंद्र यह नहीं कर पाए, क्रोधित वरुण ने राजा को उदर-रोग का श्राप दिया। अब रोहित एक पुख्त पुरुष बन चुका था, उसने लोभी अजीर्गत से सौ गायों के बदले पुत्र शुनःशेप मांग लिया।

विप्रों ने रोहित के बदले शुनःशेप की नरबलि देने से मना कर दिया पर लोभांध अजीर्गत पुत्र वध करने के लिए भी तैयार था। स्थितप्रज्ञ शुनःशेप ने बलिवेदी से उषा-प्रार्थना कर देवताओं को प्रसन्न किया और अपनी प्राण रक्षा के साथ राजा हरिश्चंद्र का उदर-रोग का श्राप भी निर्मूल किया! »»

शुनःशेप और रोहिताश्व का बाद में क्या हुआ? क्या यह कथा नरबलि को उचित ठहराती है? इस कथा से क्या बोधपाठ मिलता है? इस चर्चा का अब कोई औचित्य नहीं है क्योंकि हमारे लिए “Tajmahal is overrated” ही अन्तिम सत्य है!

रोहिताश्व द्वारा निर्मित दुर्ग भी रहस्यमय है।

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