Puneet Sharma Profile picture
Poet, Lyricist, Scriptwriter and a software waiting for the next update. (ना मैडम की करी गुलामी, ना साहेब सलामी हो, ना दीदी ना अम्मा, ना ही भैया का अनुगामी हो)

Jul 30, 2020, 9 tweets

एक सरपंच अपने गाँव में राहत कोष के पैसे से लाइसेंसी बन्दूक लेकर आया। पूरे गाँव में मुनादी हुई कि सरपंच साहब ऑटोमेटिक बन्दूक लेकर आए हैं। कुछ मुनादी करने वालों ने बन्दूक की तारीफ़ करने में इतनी छूट ले ली कि चार दिन बाद चौपालों की चर्चाओं में बन्दूक, तोप बन चुकी थी।
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इस बीच लोग भूल गए कि गाँव में अकाल पड़ा है। नहर का काम एक साल से अटका है। गाँव का अस्पताल बंद हैं। भुखमरी और बीमारियों ने सर उठा रखा है। कुछ दिनों पहले पड़ोसी गाँव के दबंगों ने ज़मीन के विवाद में गाँव के चार जवानों को मार डाला था और सरपंच ने उनका नाम तक नहीं लिया था।
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पूरे गाँव में अभी बन्दूक की चर्चा उफ़ान पर थी। सरपंच और उसके चमचों का कहना था कि गाँव में बन्दूक आते ही, आसपास के गाँव में उसकी शान बढ़ेगी। भूखे सोते हुए बच्चों को उनकी माँ जादुई बन्दूक की कहानी सुनाती कि कैसे ये बन्दूक एक दिन भूख को भी मार गिराएगी।
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कुछ गाँववाले इस निर्णय से नाराज़ थे। उनका कहना था कि अस्पताल बंद है, नहर नहीं बन रही है, तो बन्दूक खरीदने से क्या फ़ायदा होगा? फिर बन्दूक की कीमत भी बहुत ज़्यादा है और सरपंच उसका बिल भी नहीं दिखा रहा है। लेकिन गाँववालों ने इन लोगों को चुप करा दिया।
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गाँववालों को तो ये लग रहा था कि कम से कम अब पड़ोस के गाँववालों की दबंगई तो कम हो जाएगी। कुछ ही दिनों में दशहरा आने वाला था। दशहरे के दिन आसपास के बीच-पच्चीस गाँव देवी के मंदिर जाते थे और शस्त्र पूजा करते थे। गाँववालों को लगा कि इस बार तो पूजा में हमारी ही धाक होगी।
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दशहरा आया और गाँववाले सरपंच के साथ मंदिर जाने की प्रतीक्षा करने लगे। सरपंच के चमचों ने कहा कि आज उनकी तबियत ठीक नहीं है। गाँववालों ने कहा कि आज तो मंदिर जाकर अपना शक्ति प्रदर्शन करना बहुत ज़रूरी है। बहुत ज़ोर देने पर सरपंच किसी तरह मंदिर जाने के लिए तैयार हुआ।
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कुछ लोगों को छोड़कर लगभग सारा गाँव ढोल-नगाड़े के साथ मंदिर पहुँचा और वहाँ पहुँचते ही उनके होश उड़ गए। ऑटोमेटिक बन्दूक केवल उनके पास नहीं थी, दूसरों के भी पास थी और वो भी एक नहीं। किसी के पास दो, तो किसी के पास पाँच। दबंगों के गाँव के पास तो वैसी ही 10-15 बंदूकें थी।
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फिर एक गाँववाले ने हिम्मत कर के, दूसरे गाँववाले को कोने में ले जाकर बन्दूक की कीमत पूछी। उसकी असली कीमत जानकर उसके गुस्से का ठिकाना नहीं था। बन्दूक की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर सरपंच ने उन्हें लूट लिया था। जब तक गाँववाले कुछ समझते सरपंच गाड़ी लेकर अपने घर जा चुका था।
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रात को गाँववालों ने सरपंच का घर घेर लिया और उसे बाहर आने को कहा। उसके चमचे उसका बचाव करते रहे लेकिन गाँववाले नहीं माने। फिर कुछ देर बाद सरपंच बाहर आया, अपनी बन्दूक के साथ। उसने हवा में कुछ फ़ायर किए और मुस्कुरा दिया। गाँववाले अब जाकर समझे कि गाँव में बन्दूक किसलिए आयी थी।
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