इस चित्र में सम्राट अशोक के हाथ में जो राजदंड है
उस पर बैल की प्रतिमा है।
दक्षिण भारत में सतपुडा, सह्याद्री रेंज के निचले हिस्से में कृषि कार्य के लिए भैंसे का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि गंगा और सिंधु क्षेत्र में बैल का इस्तेमाल किया जाता था ।
1)
भारतीय इतिहास में आर्यावर्त और दक्षिणापथ को एक करने वाले प्रथम शासक मौर्य ही थे।यानि उस समय खेती के यंत्रों का विकास हुआ औरनांगर (हल)को लोहे का फाल जोड़ा गया उसी तरह संपूर्ण जंबूद्वीप को एक सूत्र में बांधने के लिए कृषि उत्पादन पर चलने वाले व्यापार और निर्यात का
2)
विपुल विकास हुआ । इस समय अशोक ने जो भिक्खु भारत भर भेजे उनमें अर्हत महादेव को सतपुड़ा आंध्र अमरावती क्षेत्रों कीतरफ भेजा गया ।उन्होंने महाराष्ट्र व कर्नाटक के किसानों को कृषि कार्य के लिए रेड़े (भैंसे) की जगह बैलों के इस्तेमाल के लिए बेंदुर और पोला जैसे
3)
उत्सव शुरू किये ।
बैलों के प्रचलन को शुरू करने वाले बलिराजा अशोक व अर्हत महादेव भिक्खु की स्मृति में आज भी मिट्टी के बैल बनाकर उन्हें पूजने की प्रथा हमारे इलाके में दिखाई देती है।सम्राट अशोक के राजदंड की ये पूजा पद्धति है। उस पोला पर्व में महादेव का
4)
आव्हान किया जाता है।
तान्हा पोला के बाद फोटो में दिखाया गया अशोक का
राजदंड लेकर घर-घर रोटी मांगने (पैसे-सिक्के)की
रूढ़ परंपरा हैं ये सम्राट अशोक के राजस्व अधिकार का
प्रतीक है ।
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#Aditya_wele
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