@Jollyboy Profile picture

Aug 19, 2020, 12 tweets

दो पोस्ट एक साथ :- बिन्दुसार के निधन के बाद उसका बेटा अशोक राजगद्दी पर बैठा। अशोक के शासन काल में मेरठ का महत्व कई गुना बढ़ गया। अशोक ने अपने राज्यारोहण के 26वें वर्ष में मेरठ में अपना स्तम्भ लेख स्थापित करवाया। सन 1364 ईस्वी में फिरोजशाह तुगलक शिकार खेलता

1)

हुआ मेरठ आया और वह मेरठ में स्थापित शिलालेख को दिल्ली ले आया जिसे आज भी बड़ा हिन्दू राय के पास देखा जा सकता है। इस स्तम्भ को अशोक के द्वितीय स्तम्भ लेख के रूप में जाना जाता है। इस स्तम्भ लेख पर ब्राह्मी लिपि में अशोक के आदेशों को लिखा गया है। ब्राह्मी लिपि को

2)

जेम्स प्रिन्सेप की वजह से पढ़ा जाना संभव हो पाया है। इस स्तम्भ पर लिखे आदेश निम्नवत हैं-
“देवताओं के प्रिय प्रियदर्शी राजा का कहना है कि धर्म करना अच्छा है। पर धर्म क्या है? धर्म यही है कि पाप से दूर रहें, बहुत से अच्छे काम करें। दया, दान, सत्य और शौच (पवित्रता) का

3)

पालन करें। मैंने कई प्रकार से चक्षु का दान या आध्यात्मिक दृष्टि का दान भी लोगों को दिया है। दोपायों, चौपायों, पक्षियों और जलचरों पर भी मैंने कृपा की है। मैंने उन्हें प्राणदान भी दिया है और भी बहुत से कल्याण के कार्य मैंने किये हैं। यह लेख मैंने इसलिए लिखवाया है कि लोग

4)

इसके अनुसार आचरण करें और यह चिरस्थाई रहे जो मनुष्य इसके अनुसार आचरण करेगा, वह पुण्य का कार्य करेगा।"
उपरोक्त दिए अभिलेख से यह अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि अशोक ने किस प्रकार से धर्म और दर्शन के प्रचार-प्रसार का बीड़ा उठाया था। यह लेख मेरठ की महत्ता पर भी

5)

दृष्टिगोचर करता है।

मेरठ अपने में करीब 3000-4000 वर्ष तक का इतिहास दबाये बैठा है यहाँ पर विभिन्न राजवंशों ने शासन किया तथा यहाँ पर कई सभ्यताओं ने पैर पसारा है। सनातनी से लेकर जैन धर्म तक का यहाँ पर विकास हुआ। यहाँ के ही हस्तिनापुर को ललित विस्तर में महानगर की

6)

संज्ञा दी गयी है। पूरे मेरठ में कई स्थान से मिट्टी के बर्तनों व मूर्तियों की प्राप्ति होती है जो यहाँ पर विभिन्न सभ्यताओं व संस्कृतियों के झलकियों को प्रस्तुत करती हैं। मेरठ के हस्तिनापुर के अन्त के विषय में यदि देखा जाये तो पुराणों से ज्ञात होता है कि कृष्ण के

7)

पुत्र के शासनकाल में यहाँ पर गंगा की बाढ ने इस महानगर का अंत कर दिया। मेरठ से बौद्ध धर्म से सम्बन्धित कई पुरास्थल प्राप्त हुये हैं जिससे यह सिद्ध होता है कि यह नगर बौद्ध धर्म का केन्द्र भी था। मेरठ में अशोक ने एक स्तम्भ की स्थापना करवाया था जो की फिरोज़ शाह तुगलक के

8)

समय में दिल्ली लेते आया गया था। यह स्तम्भ वर्तमान में दिल्ली में हिन्दू राव अस्पताल के पास स्थित है। यह स्तम्भ फिरोज़ शाह तुगलक ने अपने शिकार महल (कुष्क-ए-शिकार) में सन् 1358 ई. में स्थापित करवाया था। यह स्तम्भ नदी के रास्ते मेरठ से दिल्ली लाया गया था। यह
9)

स्तम्भ फारुखसायर के शासन काल में 5 हिस्सो में टूट गया था (1713-19)। यहाँ के इस स्तम्भ का अभिलेख कई खण्ड में टूट गया था जिसे कलकत्ता के एशियाटिक सोसाइटी में भेजा गया, वहाँ पर इसके अभिलेख का संरक्षण किया गया तथा इसे सन् 1867 में पुनः खड़ा किया गया। वर्तमान

10)

में यह स्तम्भ 10 मीटर ऊँचा है। इस स्तम्भ पर अभिलेख लिखने के लिये ब्राम्ही लिपि का प्रयोग किया गया है तथा भाषा प्राकृत है। इस स्तम्भ का लेख अशोक के धर्म के प्रचार व प्रजा के हित की बात की गयी है। 1.

11)

भारतीय पुरातत्व और प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ, डॉ. शिव स्वरूप सहाय, मोतीलाल बनारसीदास
12)

#Prem_Prakash

Share this Scrolly Tale with your friends.

A Scrolly Tale is a new way to read Twitter threads with a more visually immersive experience.
Discover more beautiful Scrolly Tales like this.

Keep scrolling