एक फेकू राजा ने दर्जी रखा हुआ था, जिसका काम कपड़ा सिलना नहीं, राजा की बातें को ढकना था।
एक दिन राजा दरबार लगाकर शिकार की कहानी सुना रहे थे, जोश में आकर बोले :- एक बार तो ऐसा हुआ मैंने आधा मील दूर से निशाना लगाकर एक शेर को तीर मारा तो तीर सनसनाता हुआ शेर की बाईं आंख में
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लगकर दाएं कान से होता हुआ पिछले पैर के दाएं नाखून में जा लगा..!
जनता ने कोई दाद नहीं दी, वो इस बात पर यकीन करने को तैयार ही नहीं थे..! इधर राजा भी समझ गया कि मैंने ज़रूरत से ज़्यादा लम्बी छोड़ दी,और अपने दर्जी की तरफ देखने लगा..!
दर्जी उठा और कहने लगा:- मैं इस वाक़ये
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का चश्मदीद गवाह हूँ, दरसल राजा साहब एक पहाड़ी के ऊपर खड़े थे, शेर काफी नीचे था, हवा भी उधर की चल रही थी वरना तीर आधा मील कहाँ जाता है..?
हां जँहा तक बात 'आंख' , 'कान' और 'नाखून' की है, तो अर्ज़ करदूँ, जिस वक्त तीर लगा था, उस वक़्त शेर दाएं हाथ से दायाँ कान खुजला रहा था,
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इतना सुनते ही जनता जनार्दन ने दाद के लिए तालियां बजाना शुरू कर दीं...🤣🤣🤣
अगले दिन दर्जी बोरिया बिस्तरा उठाकर जाने लगा, तो राजा ने परेशान होकर पूछा कहाँ चले..! दर्जी बोला:- राजा साहब, मैं छोटी मोटी सिलाई कर लेता हूँ,
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शामियाना सिलवाना हो तो आप गोदी मीडिया को रख लीजिए..!! मुझसे नही हो पायेगा😄😛😜😂
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#घोरकलजुग
अपूर्व भारद्वाज
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