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Aug 21, 2020, 5 tweets

🌻 "क्रोध हमारे भीतर होता है" - तथागत सम्यक बुद्ध 🌻
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#एक बौद्ध साधक ने अपने मठ से दूर एकांत में साधना करने का निर्णय लिया | उसने अपनी नाव ली और नदी के मध्य पहुंच गया , लंगर डाला , आंखें बंद की और
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साधना शुरू कर दी | कुछ घंटों की निर्विघ्न शांति के बाद अचानक उसे किसी अन्य नाव के उसकी नाव से टकराने से धक्का लगा | अपनी आंखें बंद किए हुए, उसने अपने क्रोध को ऊपर आते हुए देखा और जब तक उसने अपनी आंखें खोली वह दूसरे नाविक पर जिसने उसकी साधना में विघ्न डाला था ,
2)

पर चिल्लाने को तैयार था किन्तु जैसे ही उसने अपनी आंखें खोली , उसने पाया कि यह एक खाली नाव थी जिसकी शायद रस्सी खुल गयी थी और तैरते हुए नदी के मध्य तक आ गई | उसी क्षण बौद्ध साधक को आत्म बोध हुआ और वह समझ गया कि क्रोध उसके भीतर है | उसे बाहर आने के लिए किसी बाह्य तत्व का
3)

उकसावा मात्र चाहिए | उसके बाद , जब भी कोई उसे खिजाता या क्रोध करने के लिए उकसाता , वह अपने आप को स्मरण दिलाता , "दूसरा व्यक्ति मात्र एक खाली नाव है | क्रोध मेरे भीतर है |"

#सीख- हमें अगली बार जब भी क्रोध आए, इस बात को सदा अपने दिमाग में अवश्य रखना चाहिए |
4)

चलो बुद्ध की ओर !
चलो धम्म की ओर !!
चलो संघ की ओर !!!

#प्रस्तुति- रमेश गौतम , धम्म प्रचारक

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