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Aug 29, 2020, 5 tweets

जे. एफ. फ्लीट ने " दी रुम्मिनदेई इंस्क्रिप्शन एंड दी कन्वर्शन आॅफ असोक टू बुद्धिज्म " (अप्रैल, 1908) में लिखा कि अशोक के रुम्मिनदेई स्तंभ के पास एक टीला है, टीला के ऊपर एक देवी का स्मारक है, जिनका नाम रुम्मिनदेई है....अर्थात रुम्मिन देवी है...
1)

यहीं रुम्मिनदेई ( लुंमिनि ) बुद्ध की माँ का असली नाम था...वैशाख पूर्णिमा को इनकी विशेष पूजा होती है....इसी दिन बुद्ध का जन्म हुआ था...

रुम्मिनदेई की यह प्रतिमा अशोक कालीन है...इसमें जो पत्थर लगे हैं....वे वहाँ मौजूद अशोक स्तंभ के पत्थर से मेल खाते हैं....
2)

यह प्रतिमा बुद्ध की माँ की है....दाएँ हाथ से शाल वृक्ष पकड़े और बाएँ तीन परिचारिकाएँ साथ हैं.....यह प्रतिमा बुद्ध के जन्म- प्रसंग पर आधारित है....

रुम्मिनदेई पुरातत्व के हिसाब से प्राचीन नाम है.....अशोक ने " लुंमिनि " लिखवाया.....फाहियान ने " लुंमिन " कहा....
3)

ह्वेनसांग ने " ला- फा- नी " कहा.....ये सभी नाम रुम्मिनदेई के अलग - अलग उच्चारण हैं....

रुम्मन देई ( लुंमिनि/ लुंबिनी) के बेटा बुद्ध थे।
4)

( पाठकों की सुविधा के लिए रुम्मिनदेई उर्फ रुम्मन देवी उर्फ लुंमिनि की वह प्राचीन प्रतिमा दी जा रही है, साथ में जे. एफ. फ्लीट का वह लेख भी। )
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#Rajendra_Prasad_Singh

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