@Jollyboy Profile picture

Sep 15, 2020, 6 tweets

*महापरिनिर्वाण के बाद बुद्ध का अस्तित्व *

तथागत बुद्ध के समय वंदनीय खेमा भिक्खुणी संघ मे सबसे प्रज्ञावान भिक्खुणी कहलाई गई ! तथागत बुद्ध जेतवन , श्रावस्ती में निवास कर रहे थे ! तब भिक्खुणी खेमा कौशल देश में प्रवास कर रही थी । वह साकेत और श्रावस्ती नगर के बिच
1)

तोरणवत्थु गांव में वर्षावास के लिए रुकी हुई थी । राजा पसेनदि, साकेतसे श्रावस्ती की और जा रहे थे , बिच में तोरणवत्थु मे विश्रामके लिए ठहर गये । उनके मन में धम्म उपदेश ग्रहन की इच्छा जागृत हुई, उस समय खेमा के अलावा कोई दूसरा उपलब्ध नहीं था । तो राजा भिक्खुनी खेमा के पास
2)

गये, नमस्कार करके एक ओर बैठ गये, और पुछा की -

राजा - मरणोत्तर तथागत होते हैं की नहीं?
खेमा - महाराज, तथागत ने यह बताया नहीं ।
राजा - क्या कारण हो सकता है?
खेमा - महाराज, क्या आपके दरबार में एैसा कोई हैं, जो गंगा की रेत के कणों की गिनती कर सके? समुद्र के जल को माप सके?
3)

राजा - कैसे मुमकिन है? समुद्र जल एवं रेत अप्रमाण है ।
खेमा - ठिक उसी प्रकार महाराज, तथागत के जिस रुपको गिना जा सकता है, वह तथागत का रुप नष्ट हो चुका है । जिस वेदनासे, जिस संज्ञासे, जिन संस्कारोंसे, जिस विज्ञान से तथागतको गिना जा सकता है वो विज्ञान नष्ट हो चुका है । इसलिए
4)

मरणोत्तर तथागत होते है या नहीं, इसका प्रश्न ही नहीं उठता ! यह गलत सवाल है !

राजा, भिक्खुणी खेमा का अभिनंदन करके श्रावस्ती आये, वहां पर तथागत से यही सवाल उन्होने किये । तथागतने खेमा के समानही उत्तर दिये । राजा आश्चर्यचकित हो गये। राजा के सवालोंके उत्तर, तथागत
5)

और भिक्खुणी खेमा के उत्तर एक समान थे । इसपर से स्पष्ट होता है की भिक्खुणी संघमे सबसे प्रज्ञावान भिक्खुणीमे अग्रस्थान प्राप्त हुवा था ।

नमो बुद्धाय !!

(साभार : बुद्ध और उनका धम्म - डॉ बाबासाहेब आंबेडकर)

(संकलन - नारायण बनसोडे)
6).

#Prem_Prakash

Share this Scrolly Tale with your friends.

A Scrolly Tale is a new way to read Twitter threads with a more visually immersive experience.
Discover more beautiful Scrolly Tales like this.

Keep scrolling