बौद्ध साहित्य मे * मार * का अर्थ *
सिद्धार्थ गौतम , गया (बिहार) , में पीपल वृक्ष ने निचे पद्मासन लगाकर " बोधि " प्राप्त करने का दृढ संकल्प करते हुए निश्चय किया - चाहे मेरी त्वचा , नसें और हड्डियां ही बाकी रहें , चाहे मेरा सारा मांस एवं रक्त शरीर में ही सूख जाए ,
1)
किंतु बिना बोधी प्राप्त किए मै इस स्थान का परित्याग नहीं करुंगा ! जब वह ध्यान हेतू दृढ आसन लगाकर बैठे तो * बुरे - विचारों और बुरी - चेतनाओं के झुण्ड ने उनपर आक्रमण किया ! इसी आदमी के मन में होने वाले बुरे विचारों को भारतीय पौराणिक भाषा में मार या मार - पुत्र कहां गया है * !
2)
फोटो में यह मन के बुरे विकार केवल प्रतिकात्मक रुप से प्राणीओं में दर्शाएं गये है !
सिद्धार्थ गौतम को डर लगा की कहीं ये * मार * उनपर काबू न पा जायें और उनकी साधना को विफल न कर दे क्योंकी इस मार युद्ध में बहुत से ऋषी पराजीत हो चुके थे ! इसलिए गौतम ने अपना सारा साहस
3)
बटोरकर मार से कहा -
मुझमें श्रद्धा , शक्ती , प्रज्ञा , है ! हे मार - तु मुझे कैसे पराजीत कर सकता है ? चाहे वायु इस नदी के स्त्रोत को सुखाने में भी सफल हो जाये किंतु तु मेरे निश्चय से नहीं डिगा सकता ! पराजीत होकर जीते रहने की अपेक्षा संग्राम में मर जाना मेरे लिये अधिक
4)
श्रेयस्कर है ! उस कौए की भांती जो बहुत सी चरबी प्राप्त करने की आशा में किसी पत्थर पर जाकर ठोंगे मारता है की यहां से कुछ मधुर मधुर मेरे हात लगेगा , मार ने भी गौतम पर आक्रमण किया था ! जब कौए को कहीं भी कुछ मधुर नहीं प्राप्त होता तो वहां से चल देता है ! ठीक उसी कौए की तरह जब
5)
मार को भी कहीं कुछ गुंजाईश न दिखाई दी तो वह निराश होकर गौतम को छोडकर चल दिया ! मार का पराभव हुआ !
संक्षेप में - ध्यान साधना में आनेवाली पांच बाधाएं -
१. इंद्रिय इच्छा
२. कमजोर इच्छा
३. अनुत्साह एवं आलस
४. अशांती , चिंता , नाराजी
५. शंशय , शंका !
6)
इन्ही को * मार * कहां गया है !
कडी तपश्र्चर्या के बाद अंत में वैशाख पौर्णिमा के दिन गौतम को - दुःख , दुःख का कारण , दुःख निरोध एवं दुःख निवारण हेतू अष्टांगिक मार्ग - का साक्षात्कार हुआ ! उनको बोधि प्राप्ती हुई ! वह अब सिद्धार्थ गौतम से तथागत बुद्ध बन गये ! पीपल वृक्ष
7)
के निचे गौतम को बोधि प्राप्ती हुई , इसलिए इस वृक्ष को - बोधि वृक्ष - कहते है !
नमो बुद्धाय !
(साभार - १. बुद्ध और उनका धम्म - डॉ बाबासाहेब आंबेडकर : हिंदी अनुवादक - डॉ भदंत आनंद कौशल्यायन ! २.व्हाट दि बुद्धा टाट - डॉ वालपोला श्री राहुल)
संकलन - नारायण बनसोडे
#Prem_Prakash
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