हजारों साल से सुनते आए हैं कि सम्राट असोक के पुत्र महिंद बौध धम्म के संदेशों को लेकर श्री लंका गए थे।
श्री लंका के एक मामूली स्तूप के एक मामूली पत्थर पर, जो अम्पारा जिले के Rajagala में स्थित है, इसका प्रमाण मिला है कि महिंद थेर श्री लंका गए थे।
1)
धम्म लिपि और सिंहली भाषा में लिखा है कि यह स्तूप इदिका ( इथ्थिया ) थेर और महिंद थेर का है, जो इस भूमि के उज्ज्वल भविष्य के लिए यहाँ आए थे।
और महिंद थेर की मृत्यु वहीं हुई, Rajagala क्षेत्र में, इस क्षेत्र में रक्ष जनजाति के लोग रहते थे, जो कालांतर में राक्षस हुए।
2)
श्री लंका नाम 1972 में पड़ा उसके पहले सिलोन और उसके पहले सिंहल द्वीप उसके पहले अनुराधपुरम ।
आज के आधुनिक श्रीलंका का नाम सम्राट अशोक के समय तम्बपण्णी (ताम्रपर्णी) था संघमित्रा एवं महेंद्र को ताम्रपर्णि भेजा गया था
सम्राट अशोक के पुत्र महिन्द थेर के साथ
3)
Itthiya, Uttiya, Sambala, Bhaddasala, Samner Sumana भी धम्म प्रचार के लिए श्रीलंका गये थे।
सामणेर सुमन संघमित्ता के पुत्र थे। संघमित्ता सम्राट अशोक की पुत्री और महिन्द थेर की बहन थीं, यह भी भिक्खुणी थी,
जो श्रीलंका के राजा देवानंपिय तिस्स के आग्रह पर बोधिवृक्ष की शाखा को
4)
लेकर श्रीलंका गई थीं और श्रीलंका में भिक्खुणी संघ की स्थापना की थीं।
सबसे पुराना वृक्ष संघमित्रा द्वारा द्वारा ले जाया गया बोधिवृक्ष ही है, जो श्रीलंका में आज भी मौजूद है।
हनुमान लंका गए उसका कोई साक्ष्य नही,
राम लंका गए उसका कोई साक्ष्य नही,
सीता लंका गयी कोई
5)
साक्ष्य नही,
लंका पे पथ्थर पे राम लिख के पुल बनाया कोई साक्ष्य नही
तब भारत का मीडिया दिन-रात वैदिक सभ्यता
वैदिक सभ्यता चिल्लाता है और बड़े जोर शोर से मीडिया में दिखाता है
और जो बौद्ध धर्म ऐतिहासिक सत्य है भारतीय मीडिया उससे से दूरी बनाए हुए हैं
6)
कभी एक कहावत सुनी थी ऐतिहासिक चोर एक जगह झुंड बनाकर इकट्ठे होकर दूसरों को चोर साबित करते हैं क्या भारतीय मीडिया इसी किरदार को अदा कर रहा है
क्या भारतीय मीडिया ऐतिहासिक चोरों का अड्डा बन चुकी है
7)
#Rajendra_Prasad_Singh
Share this Scrolly Tale with your friends.
A Scrolly Tale is a new way to read Twitter threads with a more visually immersive experience.
Discover more beautiful Scrolly Tales like this.
