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Sep 19, 2020, 12 tweets

मिथ्या सूचनाएं और हम

एक समय था जब सूचनाओं के प्रसारण का एकमात्र माध्यम समाचार पत्र हुआ करते थे. पत्रकारों पर एक नैतिक जिम्मेदारी होती थी अपने पाठकों तक सिर्फ सच पहुंचाने की...
लेकिन अब दौर बदल चुका है, लोगो के पास सूचनाओं की प्राप्ति के अनंत माध्यम हो चुके है

अब पत्रकार भी सच्चाई के बजाय रोचकता खोजते है... तथ्यों को घुमा-फिरा, मोड़-तोड़ के इस तरह की शक्ल दी जाती है कि पढ़ने-सुनने वाले को चटपटा लगे...
इस मिर्च मसाले के चक्कर में देश का कितना नुकसान हो रहा है कोई अंदाजा भी नही लगा सकता...
इन खबरों से हमारे मन मे नफरत भरी जा रही है

मसलन किसी चोर को किसी ने पीट दिया ये तो आम खबर हो गई... इसको कोई नही पढ़ेगा...
लेकिन अगर हम चोर का धर्म/जाति और पीटने वाले का धर्म/जाति लिख दे और चोरी वाली बात को गायब कर दे, सिर्फ पीटने वाली बात पर फोकस करे तो बन गई मसालेदार खबर...
जल्द ही ये एक राजनीतिक मुद्दा बन जायेगा

जैसे कोई व्यक्ति किसी के घर की बहन बेटी के साथ दुर्व्यवहार करे और वो उससे झगड़ा कर ले तो इसको भी प्रेम-संबंध और जाति/धर्म से जोड़ दिया जाएगा...
महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपा कर खबर कितनी खतरनाक बन जाती है इसका प्रसिद्ध उदाहरण महाभारत के युद्ध के समय का है.

गुरु द्रोण का मनोबल तोड़ने के लिए उन्हें उनके पुत्र के निधन की मिथ्या सूचना दी जाती है... उनके विश्वास नही करने पर अश्वथामा नामक हाथी को मारा जाता है और यही सूचना युधिष्ठिर से उनको दिलवाई जाती है
गुरु द्रोण के पूछे जाने पर युधिष्ठिर कहते है -
अश्वत्थामा हतः इति नरो वा कुंजरो वा

अर्थात अश्वथामा मारा गया, "मनुष्य नही हाथी"...
और इस नरो वा कुंजारा शब्द को ढोल नगाड़ों से इस तरह से दबा दिया जाता है की गुरु द्रोण अपने पुत्र को मृत मानकर युद्ध छोड़ देते है.
हमारा व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी वाला समाज भी यही करता है... हम महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपा कर सूचना देते है..

कई बार मीडिया जल्दबाजी में किसी ऐसे व्यक्ति को हीरो बना देता है जो बाद में जाकर विलेन साबित होता है...
हमारी आंखों पर इस मिथ्या सूचना की पट्टी बांध दी गई है...
अब हमारी आंखे सत्य देखने की आदि नही रही, हमारे कान तथ्यात्मक और मजेदार में से हमेशा मजेदार को चुनते है...

हम इतने आलसी होते जा रहे है कि 30 सेकंड के लिए भी हम तथ्य की जांच करने की जहमत नही उठाते...
ये नरो वा कुंजरा हमारे समाज मे नफरत फैला रहा है...
हम किसी भी भाषण में से 30 सेकंड की क्लिप निकालते है और बिना उसका संदर्भ समझे उसे वायरल कर देते है..!

राहुल गांधी जी के आलू से सोना निकलने वाली बात हो या मोदीजी के खाते में 15 लाख आने वाली बात
दोनो ही बातो को हम जब संदर्भ के साथ सुने तो उनका कुछ और ही अर्थ निकलता है, लेकिन हमें तो मसाला फैलाना है. हमे तो नरो वा कुंजरा को दबाना है. यही क्रियाविधि झूटी खबर फैलाने में काम ली जाती है

राहुल गांधी किस संदर्भ में मशीन की बात कर रहे है या मोदीजी किस संदर्भ में 15 लाख की बात कर रहे है उससे हमे क्या...?
हमको तो बस मनोरजंन चाहिए...
मैं सभी से आग्रह करना चाहता हूं कि मित्रो, इस दुनिया मे कोई भी पूरी तरह गलत या पूरी तरह सही नही होता... नजरिया महत्वपूर्ण होता है..

हम एक लोकतंत्र में जी रहे है तो हमे इस बात को मान लेना चाहिए कि सामने वाले के विचार भी आदरणीय है... मिथ्या खबरों के झांसे में आकर ही हम एक दूसरे से नफरत करते है
किसी भी झूटी खबर को अपने मस्तिष्क को नियंत्रित न करने दे..
अगली बार आपको कोई भी फॉरवर्ड आये तो कृपया उसका सन्दर्भ जांचे

अगर एक भी व्यक्ति मेरे इस थ्रेड को पढ़कर खबर की सत्यता और संदर्भ की जांच करना शुरू कर देगा तो मेरी इतना सब टाइप करने की मेहनत को मैं सफल मानूंगा...!!

जय हिंद... जय भारत..!!

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