1.ई. पू. प्रथम शताब्दी में' पश्चिमोत्तर भारत' पर कुछ समय के लिए 'पार्थियन' (पहलव) शासकों ने भी शासन किया।
2.'पहलव' शक्ति का 'वास्तविक संस्थापक' यूक्रेटाइडीज का समकालीन 'मिथ्रेडेट्स' था।
3.'पार्थियन या पहलव' पार्थिया के मूल निवासी थे। 'सिस्तान, कंधार व काबुल' से
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प्राप्त इनके सिक्के 'बैक्ट्रिया' के साथ-साथ इन भागों पर भी 'इनके अधिकार' को दर्शाते हैं।
4.भारत का प्रथम पार्थियन शासक 'माउस' (90-70 ई. पू.) था जिसे 'स्वात घाटी व गांधार प्रदेश' से प्राप्त 'खरोष्ठी' लिपि के सिक्कों में 'मोय' कहा गया है।
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5.पार्थियन (पहलव) शासकों में सर्वाधिक ख्यातिलब्ध शासक 'गोन्दोफर्नीज' (20-41 ई.) था।
6.'गोन्दोफर्नीज' को पेशावर के 'युसुफजई प्रदेश' से प्राप्त 'खरोष्ठी लिपि' के अभिलेख 'तख्तेबही' में 'गुन्दहर' कहा गया है।
7.'गोन्दोफर्नीज' का 'फारसी भाषा' में नाम
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'विन्दफर्ण' (यज्ञ विजयी) मिलता है।
8.'गोन्दोफर्नीज' के शासनकाल में प्रथम ईसाई धर्म प्रचारक 'सेंट थामस' भारत आया। 'सेंट थामस' की हत्या मद्रास के निकट 'म्यालपुर' में की गई।
9.यू-ची' (कुषाण, टोचारियन) जाति के कबीलों ने 'भारतीय-पार्थियन सत्ता' को
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तहस-नहस कर दिया।
10.'शकों' (मध्य एशिया के खानाबदोश) की जानकारी सर्वप्रथम ईरानी शासक 'दारा' के 'नक्शे-रुस्तम' अभिलेख से मिलती है।
5).
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