आज मोदी जी के फिटनेस कार्यक्रम"फिट इंडिया" में विभिन्न हस्तियों के साथ विराट कोहली भी शामिल किया जा रहा है
ये विराट कोहली है
1.जो एक प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार द्वारा कश्मीर पर सवाल पूछने पर टका सा जवाब देते हुए कहते हैं:- हम क्रिकेटर्स हैं।राजनीति से हमारा क्या लेना-देना?
2. ये वही कोहली है जिनकी पत्नी अनुष्का दो-दो वेब सीरीज में बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है. और उस पर अड़ी रहती है.
3. वही कोहली जिन्हें दीपावली के पटाखों में पशु पीड़ा नजर आती है. लेकिन कुर्बानी पर केवल बधाई निकलती है.
4. ये वही विराट कोहली है जो चैम्पियन्स ट्राफी के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ मैच की रणनीति बनाने की बजाए, अपने ईगो को मैच, खेल व देश से ऊपर रखकर कोच कुंबले को हटाने की रणनीति बनाते हैं. भारत मैच हार जाता है.
5. चाटूकारिता पसन्द कोहली रायडू को वर्ल्डकप से बाहर रखते हैं.
6 देश से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर कोहली चुप्पी साध लेते है.
ऐसे व्यक्ति को युवा आइकॉन के रूप में फिटनेस कार्यक्रम में बुलाने का क्या औचित्य ??.
एक तरफ देश IPL के बहिष्कार की मुहिम चला रहा है. ऐसे वक्त पर विराट कोहली को राष्ट्रीय खेल मंत्रालय स्तर के
बड़े कार्यक्रम में बुलाकर क्या जाने-अनजाने IPL का अप्रत्यक्ष प्रमोशन नही हो रहा है ??.
प्रधानमंत्री संवाद स्तर के कार्यक्रम में IPL के दौरान क्रिकेटर बुलाने की आवश्यकता ही क्या है. और यदि इतनी ही आवश्यकता थी तो ऐसे क्रिकेटर को चुना जाता जो, IPL न खेल रहा हो.
केवल भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान होना ही युवा आईकॉन होने की शर्त नही है. और भी "फिट" खिलाड़ी हैं.
राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमो में हस्तियों को बुलाने के पूर्व देश के मिजाज और जनता की भावनाओं का ख्याल अवश्य रखा जाना चाहिए.
किन्तु दुःखद सोशल मीडिया पर चल रही #boycottipl2020 की मुहिम के बीच... जाने-अनजाने ही सही,
आज IPL को #संजीवनी अवश्य मिल गई..
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