राजीव पटेल Profile picture
ओबीसी हूं,पर सनातनी।भीमटों और पेरियार वादी,मंडल के चाटुकारों से अजय

Sep 27, 2020, 9 tweets

कल 28 तारीख सोमवार से #KBC शुरू हो रहा है। हमनें अमिताभ के पाखण्ड और KBC की असलियत का खुलासा पिछले वर्ष भी किया था। यदि जनता ने पिछले वर्ष ही जागरूक होकर केबीसी का बॉयकॉट किया होता तो आज ये दिन न देखने पड़ते।

कल से शुरू हो रहे KBC पर न सिर्फ अमिताभ व केबीसी टकटकी लगाए बैठे हैं,

बल्कि सम्पूर्ण बॉलीबुड, विज्ञापन कम्पनिया तथा बड़े-बड़े ब्रेंड की भी निगाहे जमी हुई है।

KBC की सफलता, असफलता आगे का रास्ता तय करेगी। यदि केबीसी फ्लॉप हो गया तो अमिताभ सहित सभी बड़े स्टार्स व विज्ञापन जगत की अक्ल ठिकाने आ जाएगी।

लेकिन यदि KBC हिट हो गया तो आज जो सितारे ncb के दफ्तर में मुंह छुपाए जा रहे हैं। विदेश भाग रहे हैं या चुप्पी साधे है, वे सभी सीना तानकर खड़े हो जाएंगे।

आज सितारों के दिख रहे झुके सिर उनकी शर्म नही है बल्कि आपके बायकॉट का डर है। उसे बनाए रखें।

पिछले वर्ष की पोस्ट, #BoycottKBC

जिस तरह कौन बनेगा करोड़पति मे इस बार एक के बाद एक सामाजिक कार्यकर्ता, सामाजिक सरोकार हेतु कार्य करने वाले लोग, प्रतिभागी बनकर बुलाए जा रहे हैं। उससे यही प्रतीत होता हैं, इस बार का केबीसी अमीर खान का सीरियल "सत्यमेव जयते" पार्ट-2 बनकर रह गया हैं।

हाल ही मे केबीसी मे राजस्थान की रूमा देवी को आमंत्रित किया गया। जिसमें उन्होंने घूँघट को कुप्रथा कहते हुये उसका तीखा विरोध किया। यहां तक कि उन्होंने घूँघट को स्त्रियों पर बंधन एवं नारी स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया। उनके इस बयान पर खूब तालियां भी बजी।

अमिताभ बच्चन ने भी भूरि-भूरि प्रशंसा की।

क्यों न इसी विचार को आगे बढ़ाते हुये, केबीसी और अमिताभ अपने कार्यकृम की अगली कड़ी में, मुस्लम महिलाओं के हित के लिये #तीन_तलाक की लंबी लड़ाई लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता "शायरा बानो" को भी बुलाए।

क्योंकि उनकी लड़ाई रूमा देवी से कहीं अधिक कठिन थी। रूमा को हिन्दुओ के एक बड़े वर्ग के समर्थन के साथ फमिनिस्ट का साथ भी मिला। किन्तु शायरा बानो को मुस्लमो का समर्थन तो दूर फमिनिस्ट का साथ भी नही मिला।

तो क्यों न केबीसी और अमिताभ शायरा बानो को भी बुलाए,

ताकि महिला चिंतकों का दोगलापन भी देश के सामने उजागर हो सके। शायरा भी खुलकर केबीसी के मंच से कह सके कि "बुर्का" मुस्लम महिलाओं के लिये बंधन हैं। उनकी आजादी के खिलाफ हैं। और महिलाओं को बुर्का पहनने के लिये मजबूर किया जाता हैं।
फिर जब अमिताभ बच्चन शायरा बानो की

इन बातों के लिये ताली बजाकर प्रशंसा करेंगे, जैसे उन्होंने रूमा देवी की प्रशंसा की थी, तो निश्चित तौर पर मुस्लम महिलाओं को नया जीवनदान मिलेगा।

क्या अमिताभ और #KBC कर पायेंगे ये हिम्मत ??.. या इनकी सामाजिक चिंता, सामाजिक सरोकार भी सत्यमेव जयते की तरह एकतरफ़ा और एजेंडाधारी हैं।

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