खण्डित मंदिरों और मुर्तियों की पूजा नहीं की जाती। हिन्दू धर्म में पवित्रता का महत्व म्लेच्छ जानते थे इसीलिए वे मन्दिरों का विध्वंस करने के बाद गर्भगृह में गौ-वध और ब्रह्महत्या आदि कृत्य करते ताकि फिर से वह मन्दिर पूजा-योग्य ना रहे।
सिर्फ शिवलिंग ही है जिसे खण्डित होने के बावजूद पूजा जाता है। इसका भी कारण है, कभी फुर्सत में चर्चा करेंगे।
अपवित्र किए गए मन्दिर का जिर्णोद्धार नहीं कर सकते। वैसे भी अब यह सभी प्राचीन मन्दिर हमारे लिए कला स्थापत्य की विरासतें बन चुके हैं इसलिए बेहतर होगा अक्षरधाम जैसे नये भव्य मन्दिरों का निर्माण किया जाए।
अयोध्या, मथुरा, वाराणसी को अपवाद रखा जाए क्योंकि वह खण्डित नहीं ध्वस्त किए गए थे। अब ये सभी मन्दिर प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके हैं।
हिंदू मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा के केन्द्र होते थे। इसे बनाने में लगने वाली सामग्री और श्रम की पवित्रता सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती। संभवतः इसीलिए म्लेच्छों द्वारा अपवित्र किए गए मन्दिरों को छोड़ दिया जाता होगा।
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