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Mar 29, 2022, 6 tweets

एक राजा था।उसने दस खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे।उसके दरबारियों और मंत्रियों से जब कोई मामूली सी भी गलती हो जाती तो वह उन्हें उन कुत्तों को ही खिला देता।

एक बार उसके एक विश्वासपात्र सेवक से एक छोटी सी भूल हो गयी..

राजाने उसे भी उन्हीं कुत्तोंके सामने डालनेका हुक्म सुना दिया।
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उस सेवक ने उसे अपने दस सालकी सेवा का वास्ता दिया..मगर राजा ने उसकी एक न सुनी।

फिर उसने अपने लिए दसदिन की मोहलत माँगी जो उसे किसी तरह मिल गई।

अब वह आदमी उन कुत्तों के रखवाले सेवक के पास गया और उससे विनती की कि वह उसे दस दिनके लिए अपने साथ काम करनेका अवसर दे।किस्मत उसके साथ थी,
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उस रखवालेने उसे अपने साथ रख लिया।

दस दिनों तक उसने उन कुत्तोंको खिलाया,पिलाया,नहलाया,सहलाया और खूब सेवा औऱ प्यार किया।

आखिर फैसलेवाले दिन राजाने जब उसे उन कुत्तोंके सामने फेंकवा दिया तो वे उसे चाटने लगे, उसके सामने दुम हिलाने और लोटने लगे।

राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ।उसके पूछने
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पर उस आदमी ने बताया कि महाराज इन कुत्तों ने मेरी मात्र दस दिन की सेवा का इतना मान दिया औऱ मेरे प्रति वफ़ादार हो गए।

लेकिन आपने मेरी वर्षों की सेवा को एक छोटी सी भूल के कारण भुला दिया।

राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया।

और उसने उस आदमी को तुरंत
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भूखे मगरमच्छोंके सामने डलवा दिया।

सीख:-आखिरी फैसला मैनेजमेंट का ही होताहै उसपर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता..औऱ ख़ुद को क़भी भी बड़ा चालाक काबिल या तीसमारखाँ न समझें..

प्राइवेट और सरकारी दोनों दुखियारे कर्मचारियों को समर्पित..

राजा कौन है यहतो आप सभी भलीभाती जानते हीहैं 😝🤣
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