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२. बिना कुछ आर्थिक योगदान के मेरे मां बाप के बरसों कि मेहेनत की कमाई से बने/ मेरे और मेरे भाई बहन की कमाई से बने घर की मालकिन बनने / उसे खुद के नाम पे करवाने का जाल बनेगी। ऐसा नहीं होने पर दहेज कानून, मेंटेनेंस, तलाक आदि कानूनों में फंसाने कि धमकियां देगी।
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३. मेरे बूढ़े मां बाप को उनके ही घर से बाहर निकालने के लिए घरेलू हिंसा के कानून का दुरुपयोग करेगी। मेरे बूढ़े मां बाप को एक दिन वृद्धाश्रम में जाने या फिर आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर देगी।
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४. मुझे मेरे बच्चे से अलग करने के लिए डिलेवरी के आस पास, मायके जा बैठेगी। वहां से अनेकों प्रकार के झूठे केसेस मेरे और मेरे घर वालों पर कर देगी। #ParentalAlienation #FatherChildAlienation को समाज कि सहानुभूति लेते हुए और कोर्ट कचहरी का सहारा लेते हुए अंजाम देगी।
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५. वैवाहिक समस्याओं से त्रस्त पतियों के आत्महत्या की संख्या बढ़ रही है, फिर भी पत्नी ऐसे जताएगी की जैसे प्रसव से भयानक कोई और बीमारी नहीं। खुद भले ही सरकारी दवाखाने में पैदा हुई हो पर पति के पैसे पर स्वयं प्राइवेट दवाखाने में सिझेरियन करवाएगी और स्पेशल रूम लेकर आराम फरमाएगी।
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६. हर पल, पल पल केवल मेरे घर की नींव हिलाने का जाल बुनेगी, मुझे मेरे भाई बहन, मां बाप, रिश्तेदारों, दोस्तों से अलग करने की साजिशें रचना शुरू रखेगी।
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७. मेरी सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक, मानसिक पद परिस्थिति, जमा पूंजी, पोहोच का पूरा पूरा फायदा अपने स्वार्थ के लिए उठाएगी और फिर एक दिन अपने अहम के लिए मेरी जमा पूंजी को मिट्टी में मिलाएगी या सब कुछ अपने मायके ले भाग जाएगी।
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८. क्योंकि वो अपने मां बाप पर बोझ बन गई थी, उन्हें बोझ बांटने के लिए दूसरे आर्थिक रिसोर्सेस की जरूरत थी, इसीलिए वो अपने मां बाप को छोड़ के नही बल्कि उनकी सिखाई को दिमाग में पूरा उतार कर मेरी मेहेनत की कमाई फुकट खाने आई, और एक दिन मेरा सब लूट कर वापस अपने मां बाप के पास जाएगी।
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९. उसने किसी अपने से नाता तोड़ा नहीं, बल्कि मेरे मां बाप रिश्तेदारों भाई बहन दोस्तों से झगड़े लगवा दिए है। अपनों से तो वो रोज देर रात तक facebook, watsapp voice call, video call, Google meet आदि से जुड़ी रहती है। मुझे ही मेरे अपनों से तोड़कर रख दिया है। अकेला कर दिया है।
आज देश भर के अनेकों पुरुषों की ये सच्ची कहानी है।
पुरुषों को महिलाओं के सामने झुकाने में ना समाज, ना academics, ना कानून ने कोई कसर छोड़ी है।
इससे ज्यादा पुरुषों का अपनी गरिमा से नीचे गिरना पुरुषों के अधिकार, आत्मसम्मान को ही ठेस नहीं पहुचायेगा बल्कि ये केवल समानता की सही व्याख्या के विपरीत ही होगा।
महिला पुरुष समानता दोनों को बराबर के अधिकार और जिम्मेदारी बांटने में महसूस होनी चाहिए ना कि पुरुषों को झुकाने को जस्टिफाई करने में।
जमाना और कानून तो महिलावाद में पूरे डूब चुके है, झूठे केसेस और उसके द्वारा पुरुष और उनके घर वालों पर विवाहिता महिला द्वारा कानूनी आतंकवाद बढ़ रहा है।
अब समय है कि पुरुष इससे ज्यादा गिरने की बजाए उठे और अपने आत्मसम्मान तथा अपने मां बाप को इन महिलावादी ढकोसलों से बचाए। इन महिला आतंकवाद कानूनों से बचाए।

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