संघी/बीजेपी वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर व्हाट्सएप से जहर फैला रहे है..सच जानिए..
1. झूठ : राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने AMU की स्थापना की थी..
सच : AMU की स्थापना 1875 में हुई और राजा साहब का जन्म 1886 में हुआ था..
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2. झूठ : राजा महेंद्र प्रताप सिंह हिन्दुमहासभा/आरएसएस से जुड़े हुए थे..
सच : राजा साहब ने 1906 के कोलकाता कांग्रेस में कांग्रेस की सदस्यता ली थी..राजा साहब गांधी/लेनिन से प्रेरित थे..1913 के बाद 1946 तक राजा साहब विदेश में थे..कब आरएसएस की सदस्यता ली?
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3. झूठ : राजा साहब ने हिन्दू राष्ट्र का समर्थन किया था
सच : 1915 मे अफ़ग़ानिस्तान में बनी भारत की निर्वासित सरकार में राजा साहब प्रेसिडेंट थे.. PM थे बरकतुल्लाह साहब और गृहमंत्री थे ओबैदुल्लाह साहब..राजा साहब सेक्युलर थे..
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4. झूठ : राजा साहब ने जिन्नाह को जहरीला नाग कहा था
सच : राजा साहब ने जिन्नाह के बारे में एक शब्द भी नही कहा..राजा साहब जिन्नाह से कभी नही मिले..अगर राजा साहब ने जिन्नाह को जहरीला नाग कहा था तो श्यामाप्रसाद/सावरकर ने जिन्नाह से गठबंधन क्यो किया था?
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5. झूठ : राजा साहब को सम्मान नही दिया गया
सच : राजा साहब भारत के हर बोर्ड/यूनिवर्सिटी में पढ़ाए जाते है.भारत सरकार ने समय समय पर राजा साहब के सम्मान में डाकटिकट जारी/सभाएं आयोजित की.
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6. झूठ : राजा साहब को AMU ने सम्मान नही दिया..
सच : 1977 मे एंग्लो मोहमड्डन कॉलेज के शताब्दी समारोह में राजा साहब मुख्य अतिथि रहे..AMU की सेंट्रल लाइब्रेरी में राजा साहब की तस्वीर आज भी लगी हुई है
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7. झूठ : राजा साहब की जमीन पर AMU बना
सच : AMU में कुल 58,000 लोगो का दान था..राजा साहब ने 3 एकड़ जमीन AMU को 2₹ सालाना लीज पर दी थी जिसे 2019 में वापस रिन्यू किया गया..(राजा साहब के वंशजों ने तो AMU से जमीन वापस मांगी थी)
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8.झूठ : AMU को हिंदूओ ने बनवाया पर मुसलमानो ने हड़प लिया.
सच : AMU के दानकर्ताओं की लिस्ट
- 10,000₹ : थॉमस बैरिंग, गवर्नर जनरल
- 1000₹ : नार्थ वेस्टर्न प्रॉविंस गवर्नर
- 58,000₹ : राजा महमदार सिंह, पटियाला
- 60,000₹ : राजा शंभू नारायण, बनारस
- 5,00,000₹ : निजाम हैदराबाद
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- ये केवल 5 नाम है ताकि सच सामने आ जाए..हर दानकर्ता का नाम AMU में है..तो क्या 58,000 लोगों की तिथियां मनाई जाएगी? तिथि मनाना है या पढ़ाई करनी है?
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राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर यूनिवर्सिटी बनाना अच्छा कदम है..पर यूनिवर्सिटी बनाना और उसे पढ़ने योग्य बनाने में फर्क है..BHU की तरह बरबाद मत कर देना..
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