#अंधा_युग
ये कथा बहुत पुरानी है लेकिन हर युग की गाथा है।पृथ्वी पर हर समय कहीं ना कहीं ये कहानी सत्य मे घटित होती ही रहती है..भ्रम का जाल कुछ ऐसा फैलाया गया कि लोगों ने श्रेष्ठ दृष्टिहीन, मानसिक रुप से विकृत को राज्य के सिंहासन पर बैठा दिया।फिर एक अंधा युग अवतरित हुआ। उस धनधान्य
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से परिपूर्ण राज्य मे विकृत मनोवृत्तियों से युक्त पथभ्रष्ट, आत्महीन आत्माएँ एक झुंड के रुप एकत्रित होकर राज्य के मंत्रणा मंडल का हिस्सा हो जाती है और राज्य के सभी प्राकृतिक और लोगों के श्रम से खड़े राज्य के व्यापार, मर्यादाओं और गौरव को खंड-खंड करना शुरु कर देती है।
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राज्य के बुद्धिमान एवं श्रेष्ठजन को राष्ट्र का द्रोही कहकर चुप करा दिया जाता है। जो साहसी थे उन्हे या तो रास्ते से हटा दिया गया या राज्य छोड़ने को मजबूर कर दिया गया। ये गिद्दों का गिरोह राज्य के प्रचारतंत्र को पूरी तरह से अपने कब्जे मे ले लेता है और फिर अव्यवस्था को ही व्यवस्था
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कहा जाने लगता है। राज्य से जारी होने वाली सभी घोषणायें बदलाव कर ऐसै प्रचारित और प्रसारित की जाने लगती है कि लोगो को लगे वर्तनमान काल राज्य का स्वर्णकाल है। नये युग के अवतरित होने के संदेश प्रजा को दिये जाने लगते है।
प्रजा हैरान! ये कौन सा प्रगति और नवीन सृजन का सूरज है जिसके
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सिर्फ संदेश मिल रहे है लेकिन दिख नही रहा? तो पूर्व योजनानुसार सम्राट के सभामंडल के दूतों के संदेशवाहक प्रजा के बीच जाकर समझाते कि अमुक स्थान पर यह अवतरित हो चुका है और आपके बीच भी शीघ्र ही यह सूर्योदय होने वाला है। आशा और विश्वास के आधार पर प्रजा
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भरोसा कर खुद को वस्त्रहीन होता देखती रही..जिसका ना कभी अंत हुआ और ना कभी ऐसा सूर्योदय हुआ है और ना होगा। एक बहुत पतली डोरी मर्यादा की पर वह भी उलझी है और अंधकार मे फंसा सूरज उगने को आतुर..🙏
5 @BramhRakshas
मैंने इंग्लिश मीडियम को-एड पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की, ग्रेजुएशन आयुर्वेद कॉलेज से, जहाँ बैच में अकेली मुस्लिम लड़की थी, रूममेट्स ब्राह्मण, जैन, ठाकुर, महाराष्ट्रीयन रहीं, हॉस्टल और जब रूम लिया तब भी अकेली मुस्लिम थी, कभी किसी को मुझसे या मुझे किसी से प्रॉब्लम नहीं हुई।
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स्कूल में 10thतक ट्यूनिक स्कर्ट्स थे,11वीं से सलवार-कुर्ता।3rd के बाद घरवालों ने स्कूल प्रशासन से बात की,स्कूल बदलें या यूनिफॉर्म। स्कूल ने यही कहा लड़की पढ़ने में बहुत अच्छी है,कोई दिक़्क़त नहीं सलवार-कुर्ता यूनिफॉर्म वाला पहनकर आए।स्कूल बदलने की नौबत नहीं आई।
आज का माहौल देखो
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तो यक़ीन नहीं होता, वह समय भी था जब छोटे शहर के धार्मिक पेरेंट्स अकेली लड़की को 250 किमी दूर अनजान शहर में उस कॉलेज में पढ़ने भेजते,जहाँ ब्राह्मण वर्चस्व है और दिन की शुरुआत धन्वन्तरि पूजन से होती है और उससे बड़ी बात,मैंने यूनिवर्सिटी टॉप किया, धर्म की वजह से बहस-विवाद होते थे
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योगी आदित्यनाथ के थाईलैंड ट्रिप के मीम, जोक्स,तंज का भरपूर मजा लीजिए।तनिक भी सोचने की जरूरत नही कि इसमे सत्यता कितनी है।
क्योकि यदि सत्य है,तो है। अगर नही है,तो उसी ट्रेंड के मुताबिक है,जो आग खुद भाजपा ने लगाई है। देश के तमाम प्रधानमंत्रियों,विपक्ष के नेताओ,और शख्सियतों का, 4/1
भले वो जिंदा या मुर्दा, खूब कैरेक्टर एसासिनेशन किया है।
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तमाम मिस इन्फॉर्मेशन और डिस इन्फॉर्मेशन को इतनी बार, इतने स्रोतो से, खुलकर या इशारों में रिपीट करना कि आम आदमी की जुबान का हिस्सा बन जाये।
बल्कि सत्यता की पुष्टि के रूप में किसी के ट्वीट, अज्ञात लेखक नाम,
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काल्पनिक किताबो का हवाला देना, या फिर एक चवन्नी छाप ब्लॉग में कुछ भी लिखवाकर उसका लिंक चिपका देना... भारतीय जनमानस और उसके विमर्श में ये लेन्टाना खरपतवार भाजपा ने रोपी हैं।
पर्यटन् पृथिवीं सर्वां,गुणान्वेषणतत्परः,अर्थात जो गुणों की खोज में तत्पर है,वे लोग सारी पृथिवी घुमते है।
थाईलैंड इस पृथ्वी का अभिन्न हिस्सा है।इसे इतिहास में स्याम देश भी कहा गया है।प्राचीन काल से ही तमाम कांग्रेसी,भाजपाई और आपायी, स्याम देस का भ्रमण करते आये है।
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भारतवर्ष के मध्य भाग के रायपुर मे बने विवेकानंद"अंतरास्ट्रीय"विमानतल से मात्र एक देश को ही"अंतराष्ट्रीय विमान'जाते है।वह स्याम देश है।
बड़ी मात्रा में सुर,नर,और व्यापारी बिजनेस ट्रिप पर स्याम देश आते जाते रहतेहैं।भारतके शेष विमानतलोका अधिकतम व्यापार भी स्याम देश के बूते चलताहै।2
वस्तुतः जो भी बुद्धिमान औऱ वाक कुशल होते है, वे थाईलैंड अवश्य जाते हैं। चार धाम, द्वादश ज्योतिर्लिंग, इक्यावन शक्तिपीठ एवं स्याम देश का भ्रमण किये बगैर मनुष्य का जीवन व्यर्थ है।
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पर्यटन अनिवार्य है,विशेषकर यदि आप पर बड़ी जिम्मेदारियां हो। शास्त्र कहते हैं-" हृदि श्रीर्मस्तके
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अभी ख़बर आई हैं कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कोविड प्रतिबंधों का विरोध करने वालो को कुचलने के लिए कनाडा में इमरजेन्सी लागू कर दी है ..... पूरे कनाडा में कोविद प्रतिबंध के नियमो के खिलाफ़ गुस्सा देखा जा रहा है, इस आन्दोलन का नेतृत्व वहा के ट्रक ड्राइवर्स कर रहे हैं
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कनाडा में कोरोना वैक्सीन को अनिवार्य किए जाने को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन सिर्फ कनाडा तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे यूरोप में फैल गया है कनाडा से प्रेरणा लेते हुए जर्मनी के बॉन शहर में हर सोमवार को वैक्सीन की अनिवार्यता के खिलाफ लंबा मार्च निकाल रहे हैं.जर्मनी के शहर बॉन में
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जनवरी 2022की शुरुआत से लगातार हर सोमवार को वैक्सीन के विरोध में रैली निकाली जा रही है.
यहां के लोग कह रहे हैं कि वे वायरस के होने ना होने की बात नहीं कर रहे वे बस अनिवार्य वैक्सीन के खिलाफ है वे इसे उनके निजी अधिकारों का बहुत बड़ा हनन मान रहेहैं
एक सिद्ध गुरु जी ने30वर्षीय युवक को भरी सभा में खडा कर पूछा कि आप मुम्बई मेँ जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है तो आप क्या करोगे ?
युवक ने कहा -उस पर नजर जायेगी, उसे देखने लगेंगे।
गुरु जी ने पूछा - वह लडकी आगे बढ गयी तो क्या पीछे मुडकर भी देखोगे ?
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लडके ने कहा - हाँ, अगर धर्मपत्नी साथ नहीं है तो। (सभा में सभी हँस पडे)
गुरु जी ने फिर पूछा - जरा यह बताओ वह सुन्दर चेहरा आपको कब तक याद रहेगा ?
युवक ने कहा 5 - 10 मिनट तक, जब तक कोई दूसरा सुन्दर चेहरा सामने न आ जाए।
गुरु जी ने उस युवक से कहा - अब जरा सोचिए,
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आप जयपुर से मुम्बई जा रहे हैं और मैंने आपको एक पुस्तकों का पैकेट देते हुए कहा कि मुम्बई में अमुक महानुभाव के यहाँ यह पैकेट पहुँचा देना। आप पैकेट देने मुम्बई में उनके घर गए। उनका घर देखा तो आपको पता चला कि ये तो बडे अरबपति हैं। घर के बाहर 10 गाडियाँ और 5 चौकीदार खडे हैं।
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आज वैलेंटाइन डे पर 3राज्यों की165सीटों पर मतदान होगा।
इसमें यूपी की 55 सीटें हैं, जबकि उत्तराखंड की 70 और गोवा की 40सीटें हैं।
प्रधानमंत्री ने यूपी में पहले चरण की 58 सीटों के पहले चरण से पहले चुनाव आयोग को ठेंगा दिखाते हुए ANI से "एकालाप" किया था। नतीज़ा यह रहा कि 58 में 4/1
से 35+ सीटों पर बीजेपी साफ़ हो गई।
आज दूसरे चरण में योगी बाबा उसी ANI से 30 मिनट का "एकालाप" करेंगे। ज़ुबां से नफ़रत फिर टपकी है। (वीडियो देखें)
ज़मीनी रिपोर्ट कहती है कि दूसरे चरण में भी बीजेपी 40+ सीटों पर साफ़ हो सकती है।
उत्तराखंड में अमित शाह द्वारा कल हरीश रावत की
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"कुत्ताघसीटी" ने उत्तराखंडियों का जो अपमान किया है,वह आज वोटिंग पैटर्न में दिख सकता है।
गोवा में बीजेपी की हालत कुछ ठीक नहीं। छोटे दलों ने बीजेपी का रास्ता रोक दिया है। माना जा रहा है कि 2017 की तरह इस बार भी वहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है।