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अमूल्य अवसर
दिनांक 17 मई , वैशाख वदी १३ , बुधवार ,
श्री शांतिनाथ भगवान का
जन्म एवं मोक्ष कल्याणक

दिनांक 18 मई , वैशाख वदी १४ , गुरुवार ,
श्री शांतिनाथ भगवान का दीक्षा कल्याणक

जिसको भी जीवन में
सुख - शांति - सुविधा - संतति - संपत्ति - समृद्धि - सन्मति - Image
सन्मार्ग - सद्गति - समभाव - समाधि एवं सिद्धगति की अपेक्षा हो उनको विशेष रूप से

छट्ठ ( बेला, 2 उपवास) अथवा
2 आयंबिल नही तो
2 एकासना या
2 बियासन करके
शांतिनाथ भगवान के नाम की दो दिन में 125 या
20 + 20 माला गिननी चाहिए ।
मंत्र :
ॐ ह्री अर्हम श्री शान्तिनाथाय नमः
#Jainism 🙏
दोनों दिन ........
भव्य स्नात्र महोत्सव , प्रभुजी की नयनरम्य अंगरचना , सामायिक , प्रतिक्रमण , पूजा , जाप , भक्ति - भावना करें ,

घर - घर रंगोली , दिप प्रज्वलन व तोरण लगाएं ।

क्यों कि तीर्थंकर #शांतिनाथ भगवान

विश्व शांति के आधार हैं
कल्याण के कारक हैं
सब के तारणहार हैं
तन की
मन की
परिवार की
जीवन की
शांति के दाता हैं
शान्तिनाथ भगवान की आराधना से आपके कष्ट दूर हो जाये
आपको भगवान शान्तिनाथ के जन्म मोक्ष एवं दीक्षा कल्याणक की हार्दिक शुभकामनाएं ✨🙏 Image

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May 18
24 तीर्थंकरों में से 16वे तीर्थंकर भगवान शान्तिनाथ में क्या खास बात है ?

श्री शांतिनाथ दादा के भवों के अद्भुत तथ्य

उनके बारह भव हुए (सम्यकत्व प्राप्त होने के बाद)

हर एक भव पहले भव से बढकर था I

1. शांतिनाथ दादा ऐसे है, जो बारह भव में से एक भी भव में तिर्यंचगती में नहीं गए I Image
2. बारह भवमें से एक भी भव में वे नरक में नहीं गए I

3. बारह भव में से एक भव में बलदेव बने..

4. एक बार 16000 देशों के राजा बनें I

5. इन बारह भवमें दो बार चक्रवर्ती बने I

6. बारह भव में से एक बार तीर्थंकर के पुत्र बनें I
7. एक भव में 32000 देशों के राजा बनें I
#जैनधर्म #Jainism Image
8. अंत में वे स्वयं तीर्थंकर बनें I

9. वे पाँच भव में जन्म से ही अवधीज्ञान साथ में लेकर आए थे ।

10. दूसरे किसी तीर्थंकर परमात्मा के पाँच भव अवधीज्ञान के साथ नहीं हुए है I

11. एक भव में वे जीवरक्षा हेतू अपने शरीर का संपूर्ण मांस देने के लिए भी तैयार हुए थे I

#शान्तिनाथ भगवान
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Nov 20, 2022
जैन धर्म में 18 प्रकार के पाप बताए गए हैं :
1. प्राणातिपात : हिंसा , कोई भी जीव के प्राण को घात करना , पीड़ा देना , मानसिक त्रास देना वो द्रव्य हिंसा है। रागादि भाव के साथ आत्मगुण को दबाना या घात करना वो भाव हिंसा है।

2. मृषावाद : असत्य बोलना , छल , कपट , मान और माया
माया अर्थात बाहर कुछ मन मे कुछ और। धन , धान्य के परिवार के लाभ या लोभ के कारण असत्य वचन बोलना। झूठी साक्षी देना।

3. अदत्तादान : अदत्त - चोरी , आदान लेना। चोरी से छुपा के लेना। पूछे बिना लेना। राज्य के कर आदि छुपाना वो भी चोरी है। एक परमाणु जितना भी चोरी करना भी अदत्तादान है।
4. मैथुन : विषयभोग , काम वासना , इन्द्रियों का असंयम , पांचेय इन्द्रियों के भोगों की लोलुपता , विजातीय की भोग वासना।

5. परिग्रह : धन धान्यादि संग्रह करके उसमें मान, दिखावा, ममत्व करना। आवश्यक संग्रह करके भी ज्यादा की तृष्णा करना। जितना भी है उसके उपयोग में नियंत्रण नही रखना।
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