subhash sharma, Profile picture
Jun 16 16 tweets 4 min read Twitter logo Read on Twitter
अबकी बार कार्नवालिस सरकार ...
लार्ड साहिब असल लार्ड थे, उच्चकुल शिरोमणी गर्वनर जनरल। इसके पहले क्लाईव और वारेन हेस्टिंग्ज दलित टाइप के जीव थे। याने वो कंपनी एम्पलॉयी, छोटी मोटी नौकरी से शुरूआत, और प्रमोट होते होते गर्वनर बने।
लेकिन लार्ड कार्नवालिस,एक दिन अचानक हाईकमान के आदेश पर गुजरात के गवर्नर बन गए।
गुजरात टाइपो इरर है, बंगाल पढा जाए।तो असल मे अमरीका जाकर जार्ज वाशिंगटन से माफी मांगने के कारण कार्नवालिस की प्रसिद्धि चहुं ओर फैली थी। उन्होने संसद को बताया कि अमेरिका मे न कोई घुसा है,न आया है ..
बस वो इलाका हमारे हाथ से निकल गया है। इस पर खुश होकर जब भारत की गवर्नरी ऑफर की गई, तो पहले पहल उन्होने मना कर दिया।

दरअसल कार्नवालिस को नंदकुमार केस का पता चल चुका था। इसके कारण हेस्टिंग्ज के इंपीचमेण्ट की तैयारी चल रही थी। कार्नवालिस कोई लोचा नहीं चाहते थे।
उन्होने शर्त रखी - कैबिनेट की पूरी पावर मुझे दो।
मै गवर्नर जनरल,मै कमांडर इन चीफ,मै ही नेता, मै ही काउंसिल, झंडी भी अपुन हिलाएगा, और डंडी भी अपुन हिलाएगा।मै अकेला सब पर भारी .. मंजूर है तो बोलो।
मंजूर हो गया।कार्नवालिस सर्वशक्तिमान होकर भारत आए।उनका वादा था,अच्छे दिन लाऐंगे।
पब्लिक के नही, कंपनी के ..
और कंपनी को पैसे चाहिए थे। तब बेचने को एलआईसी, रेल्वे तो थे नही, कार्नवालिस ने सरकार ही बेच दी। पूरी सरकार ठेके पर चलने लगी, इसे पर्मानेन्ट सेटलमेण्ट कहते है।

सरकार बेचने का मतलब - टैक्स वसूली की पावर आउटसोर्स करना। आय का स्रोत भू भाटक था।
फसल उत्पादन के अनुरूप, इनकम हर साल कम ज्यादा होती रहती। कार्नवालिस ने हर इलाके का एक रेट फिक्स किया, और उसे ठेकेदारो को बेच दिया।

आजकल जैसे शराब के ठेके बिकते हैं, सरकार को फिक्स पैसा दो, फिर जीभर दारू, चाहे जिस कीमत पर बेचो। कार्नवालिस के राज मे जमींदार ठेका लेते,
किसानों से मन भर टैक्स वसूलते।

फिक्स राशि सरकार को देते, और बाकी बल्ले बल्ले .. इससे एक अच्छा दलाल वर्ग पैदा हुआ। यह सरकार के हर अच्छे बुरे काम के समर्थन मे खड़ा रहता। जमींदारो के नौकर, मालिशवाले, सफाईवाले, गुमाश्ते, गुण्डे, चौकीदार भी बड़ी संख्या मे अंग्रेजो भक्त हुए।
इसे लाभार्थी वर्ग समझ लें।
आम किसान खून के आंसू रो रहा होता, ये "नव-दलाल वर्ग" सरकार का अंधभक्त था। इससे बंगाल मे मामला सेट हो गया।

उत्तर भारत मे ब्रिटिश राज की जड़ें गहरी हुई।
इसी समय ब्रिटिश बंगाल मे अफीम की खेती होने लगी। यहां उगाया अफीम कौड़ियों के भाव लेकर चीन ले जाते।
वहां अफीम के बदले रेशम, चाय, पोर्सेलिन वगैरह लेकर ब्रिटेन मे सोने के भाव बेचते। चीनियों को मामले की गंभीरता समझने मे अभी 50 साल और लगने थे।

लेकिन एक बंदा था, जिसे भारत का भविष्य दिखाई दे रहा था।
दक्षिण का टीपू सुल्तान ...

उसके पिता हैदर ने दो बार अंग्रेजो को शिकस्त दी थी।
दक्षिण मे वह बेहद मजबूत था, फ्रेंच की ताकत से वह वाकिफ था, और उनके संपर्क मे था।

अंग्रजो ने पांडिचेरी पर हमला किया तो हैदर ने ब्रिटिश को अच्छा सबक सिखाया। मंगलौर की संधि हो गई। अब हैदर का स्वर्गवास हो चुका था, फ्रांस मे क्रांति मे उलझ गया था। ये मौका शानदार था।
पहले तो त्रावनकोर के राजा को उकसाया गया, जिसने टीपू के संरक्षित इलाको मे घुसपैठ की। टीपू मालाबार मे घुसा, विद्रोह दबाया, तो उसके अत्याचारों के बारे मे खूब प्रोपगंडा किया गया। यह प्रोपगण्डा आज तक संघी इस्तेमाल कर रहे हैं।

बहरहाल मलाबार को न्याय दिलाना था। टीपू की घेराबंदी की।
कार्नवालिस को छठी का दूध और जार्ज वाशिंगठन दोनो याद आ गए।

क्येाकि टीपू की तोपों ने बम मारकर वो धुआं धुंआ किया, कि लार्ड कार्नवालिस को श्रीरंगपट्नम से बकरे पर बैठकर भागना पड़ा। ये बात मै नही, उस वक्त ब्रिटिश अखबारों मे छपा कार्टून कहता है।

कॉपी लगाई है।
कार्नवालिस को समझ आ गया कि अकेले "टीपू मुक्त भारत" नही बना पाऐंगे। उसने "राष्ट्रीय धनतांत्रिक गठबन्धन" बनाया। इस गठबंधन मे मराठे थे, निजाम थे, त्रावणकोर का राजा था।

ये सब जो एक दूसरे का फूटी आंख नही देखते थे, मगर यहां, मामला दौलत का था, इलाकों का था। वे अंग्रेजो से मिल गए।
टीपू बहादुरी से लड़ा,मगर हार गया।
कभी हैदर ने कांची मठ का पुर्ननिर्माण कराया था। टीपू ने वहां स्वर्णमूर्तियां स्थापित करवाई थी,और शंकराचार्य को बुलाकर पूजा पाठ करवाये थे। सिकुलर टीपू को सबक सिखाने के लिए, मराठा सरदार रघुनाथ भाउ,और राघुनाथ राव पटवर्धन ने श्रृगेरी का मंदिर लूटा ,
60 लाख का सोना चांदी भरकर ले गए।
टीपू का आधा राज्य छीनकर बंदरबांट कर ली गई। उसके बेटे बंधक रखे गए। दक्षिण भारत मे ब्रिटिश राज की जड़े गहरी हुई।
उत्तर और दक्षिण दोनो सेटल था।

भारतीयों ने जुलमिलकर लार्ड कार्नवालिस के माथे से अमेरिकी हार का कलंक धो दिया था।
ये 1793 था, जब वह भारत से वापस जा रहा था, तो एयरपोर्ट पर मराठों को गले लगाकर फूट फूटकर रोया। वो जानता था .. कि अगर ये लोग अमेरिका मे भी होते ...
तो वहां भी अंग्रेजी राज का सूरज न डूबता।

#वायसराय_औऱ_गवर्नर_जनरल (09)
#स्वतंत्र Image

• • •

Missing some Tweet in this thread? You can try to force a refresh
 

Keep Current with subhash sharma,

subhash sharma, Profile picture

Stay in touch and get notified when new unrolls are available from this author!

Read all threads

This Thread may be Removed Anytime!

PDF

Twitter may remove this content at anytime! Save it as PDF for later use!

Try unrolling a thread yourself!

how to unroll video
  1. Follow @ThreadReaderApp to mention us!

  2. From a Twitter thread mention us with a keyword "unroll"
@threadreaderapp unroll

Practice here first or read more on our help page!

More from @sharmass27

Jun 16
क्या आप judge कर सकते हैं कि इन तीनों में से सबसे बढ़िया और अच्छा आदमी कौन है?
..
Mr. A - उसकी गंदे नेताओं से दोस्ती थी, ज्योतिषियों की बातों में ज्यादा भरोसा करता था, उसकी 2 पत्नियां थी, chain smoker था सारे दिन सिगरेट पीता रहता था, दिन में 8 से 10 बार शराब पीता था.
..
Mr. B - उसे ऑफिस से 2 बार धक्के मार के बाहर निकाला गया, दोपहर तक वो सोता था, कालेज में अफीम खाता था और रोजाना शाम को व्हिस्की पीता था.
..
Mr. C - वह एक संवारा हुआ और पुरस्कृत योद्धा था, शुद्ध शाकाहारी था, उसने कभी बीड़ी सिगरेट नहीँ पी,कभी दारू नहीँ पी
1 ही घरवाली थी उसकी और उसे कभी धोखा नहीँ दिया.
,,
,,
,,
आप कहेंगे Mr.C सबसे बढ़िया है
..
..
Right?
..
..

But..
,,
,,

Mr. A : Franklin Roosevelt ( USA का 32वां राष्ट्रपति था)
,,
,,
,,
Mr. B : Winston Churchill (भूतपूर्व British प्रधान मंत्री था )
,,
,,
,,
Read 5 tweets
Jun 16
पहले मनोज मुंतशिर की गान का संधान किजिए प्रभु,

दशानन की नाभि से बाद में निपट लेंगे ..😎
कपड़ा तेरे बाप का,
तेल तेरे बाप का,
आग भी तेरे बाप की,
तो जलेगी भी तेरे बाप की"

____ यह डायलॉग हनुमानजी बोलते हैं मेघनाद से लंका में आग लगाते समय !

ऐसे अशिष्ट हनुमान से पाला पड़ा था कभी आपका ! स्वयं श्रीराम हनुमान को 'सकलगुणनिधानम्' और 'ज्ञानिनामग्रगण्यं'
अर्थात् ज्ञानियों में अग्रगण्य कहकर प्रशंसा करते हैं। वाल्मीकि रामायण में सीता का पता लगा कर जब हनुमान राम को सकल वृतांत सुनाते हैं तब मुस्कुराते हुए श्रीराम प्रभु ने लक्ष्मण से कहा था कि देखो लक्ष्मण, इतने लंबे समय से बोल रहे हनुमान ने एक भी व्याकरण की ग़लती नहीं की !
Read 4 tweets
Jun 16
"छोटे बिरजू महाराज" की चार्जशीट में क्या लिखा है ये मीडिया नहीं बता रहा है..पर मुझे सूत्रों से पता चला है कि क्या लिखा हुआ है..आप भी पढिए👇

बिरजू तो पहलवानों को ताड़े जा रहा था
बिरजू तो व्हिस्की पिए जा रहा था
बिरजू तो पहलवानों को घूरे जा रहा था
ताड़े जा रहा था, व्हिस्की पिए जा रहा था, घूरे जा रहा था
सबको मिर्ची लगी तो बिरजू क्या करे

जले चाहे सारा ज़माना
बिरजू है पहलवानो का दीवाना
पहलवानो को ले कर भाग जाए
नज़र किसी को भी ना आए
लोग बिरजू के प्यार से यार जलते हैं
कैसे बताए क्या-क्या चाल चलते हैं
बिरजू तो बैंकॉक में जा रहा था
बिरजू तो सीटी बजा रहा था
बिरजू तो पहलवानों पर हाथ फिरा रहा था
बैंकॉक में जा रहा था, सीटी बजा रहा था, हाथ फिरा रहा था
पहलवानो को बुरा लगा तो बिरजू क्या करे

सबको मिर्ची लगी तो बिरजू क्या करे
Read 4 tweets
Jun 16
क्या आप जानते हैं कि 1938 में शुरू किया गया "नेशनल हेराल्ड" जब बंद हुआ तब केन्द्र में कांग्रेस की ही सरकार थी?

साल था 2008.

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस ऐतिहासिक न्यूज़पेपर को आर्थिक कारणों से बंद किया गया था जबकि उस वक्त देश की अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी
पी. चिदंबरण वित्त मंत्री थे. 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर यूपीए सरकार ने शिक्षा का बजट 35 हज़ार करोड़ कर दिया था. हम सब खुश थे.

ध्यान दीजिए इधर सिर्फ शिक्षा का बज़ट बढ़ाकर कांग्रेस सरकार ने 35 हज़ार करोड़ रुपये किया था, उधर "नेशनल हेराल्ड" बंद हो रहा था.
कांग्रेस की मुट्ठी में
ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी थी लेकिन फिर भी "नेशनल हेराल्ड" बंद हो रहा था. "नेशनल हेराल्ड" को लूटकर गांधी परिवार को अमीर होना था.क्या इसलिए ?

उस परिवार को अमीर होना था जिसके घर से 3 व्यक्ति पहले ही प्रधानमंत्री हो चुके थे.जिसने 1947 के पहले ही 200 करोड़ की अपनी निजी प्रॉपर्टी देश के
Read 8 tweets
Jun 16
My first love my city of joy कोलकाता কলকাতা।
ये संगतराशों का शहर ये बुतनिग़ारों का शहर है
ज़न्नत ज़रदारों की ये बेघर बंजारों का शहर है ।

ज़िक्र कलकत्ते का छिड़ा ‘पर’ कलम को निकले
लफ्ज़ बोल उठे यही मिरे अश’आरों का शहर है
ये इमारतें ये गलियाँ ये चौराहे ये सड़कें ये कूचे ।
कहने को हमें भी अपना एक पत्थरों का शहर है

कन’आँ में क्या है ऐसा जो कलकत्ते में नहीं है
होंगे युसुफ़ ज़ुलेखा ये देवदास -पारो का शहर है

यहाँ की हर रह रवां ए ख़ाक़ पहचानती है हमें
ये मेरे मुरादों के दिलक़श नज़ारों का शहर है

इस शहर के बाहम बह रही है पवित्र हूगली ।
ये मौज़ ए दरिया के हसीन किनारों का शहर है ।
Read 7 tweets
Jun 16
गर्मी के पागल
वह बिजली आफिस में काम करते थे और प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम में एक महीने तक पगला जाते थे. पगलाने के लिए वह दफ्तर से एक महीने की छुट्टी लेते थे.

बनारस के भदैनी मुहल्ले में रहते थे. पगलाने के दौरान वह सिर्फ अंग्रेजी बोलते थे. अच्छी अंग्रेजी..!
वैसे तो अस्सी-भदैनी मुहल्ले में अनेक पागल सड़क पर टहलते थे. उनकी अपनी अलग-अलग विशेषताएं थीं.

एक महोदय बंगाली टोला इंटर कालेज में मैथ के टीचर थे. वह जब गर्मी में पगलाते थे तो एकदम चुप हो जाते थे. वह सड़क पर किसी बरामदे में चुपचाप बैठे रहते थे. कोई छात्र आ जाता तो
उसका सवाल भी हल कर देते थे लेकिन बिजली विभाग के पागल के टक्कर का दूसरा कोई नहीं था. जब भी वह घर में अंग्रेजी बोलने लगते तो उनके परिवार के सदस्य समझ जाते की अब इनके पगलाने का मौसम आ गया है.

मजे की बात यह थी कि ठीक होने पर वह अंग्रेजी बोलना बंद कर देते थे. एक दूसरे सज्जन
Read 6 tweets

Did Thread Reader help you today?

Support us! We are indie developers!


This site is made by just two indie developers on a laptop doing marketing, support and development! Read more about the story.

Become a Premium Member ($3/month or $30/year) and get exclusive features!

Become Premium

Don't want to be a Premium member but still want to support us?

Make a small donation by buying us coffee ($5) or help with server cost ($10)

Donate via Paypal

Or Donate anonymously using crypto!

Ethereum

0xfe58350B80634f60Fa6Dc149a72b4DFbc17D341E copy

Bitcoin

3ATGMxNzCUFzxpMCHL5sWSt4DVtS8UqXpi copy

Thank you for your support!

Follow Us on Twitter!

:(