कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा यानी आज की तिथि वर्ष की तीन अत्यन्त प्रमुख शुभ तिथियों में परिगणित है। #धर्मसिन्धु में आया है कि कार्तिक चतुर्दशी व उसके आगे के तीन दिन #दीपावली की संज्ञा से विभूषित हैं। #भविष्योत्तरपुराण ने कहा है कि इस तिथि पर किए गए स्नान व दान सौ गुना फल देते हैं। १/२
धर्मशास्त्र का वचन है- आज यानी बलि प्रतिपदा पर किए दीपदान से लक्ष्मी स्थिर होती है। इस दीपदान से ही #दीपावली कही गई है। इस दिन बहुत-से कृत्य होते हैं- बलिपूजा, दीपदान, गाय व बैलों की पूजा, गोवर्धन की पूजा, मार्गपाली, नव-वस्त्र धारण और पुरुषों एवं सधवा नारियों के समक्ष दीप घुमाना।
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