Shastri Kosalendradas Profile picture
Head, Deptt of Philosophy in Jagadguru Ramanandacharya Rajasthan Sanskrit University, Jaipur. I give as good as I get. शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् 🙏
Feb 24, 2025 4 tweets 1 min read
जो है, उसे देने की महिमा व संपदा होने पर भी न देने का कलंक #श्रीहर्ष के #नैषधीयचरितम् (12.67) में पढ़िए-

अर्थिभ्रंशबहूभवत्फलभरव्याजेन कुब्जायितः
सत्यस्मिन्नतिदानभाजि कथमप्यास्तां स कल्पद्रुमः।
आस्ते निर्व्ययरत्नसंपदुदयोदग्रः कथं याचक-
श्रेणीवर्जनदुर्यशोनिबिडितव्रीडस्तु रत्नाचलः॥ Image याचकों (मांगने वालों) के अभाव में यह सर्वदायी उदार कल्प-वृक्ष अपने फलों के भार से झुककर किसी तरह जीवित रह सकता है। लेकिन वह रत्नों से भरा पर्वत, जो अपने संचित (दान न किए गए) रत्न-धन के कारण ऊँचा हो गया है, याचकों द्वारा उपेक्षित होने के कारण अपयश से भरकर कैसे जीवित रह सकता है?