Princess Diana was truly the princess of humanity 🧵 - A Thread
1. This video shows this
2. Princess Diana responding to rumors about her mental health (1996)
3. The fact that Princess Diana cried the whole morning of her wedding. She was 20, about to marry the future king and he was in love with another woman.
4. This is how Princess Diana found Prince Charles was cheating on her, 1996
5. Interview with Princess Diana about how she will never be Queen, 1995
6. Princess Diana participating in a school race of her son Harry, 1991
7. Princess Diana in her purest form
8. Princess Diana, Portofino Italy, 1997
9. Princess Diana playing with baby Prince William, 1983
10. This is how Princess Diana found Prince Charles was cheating on her, 1996
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सोनिया गाँधी का असली नाम सोनिया नहीं बल्कि ऐंटोनिया माईनो (Antonia Maino) है। 🧵
यह बात इटली के राजदूत ने २७ अप्रैल १९८३ को लिखे एक पत्र में स्वीकार की है। यह पत्र गृह मंत्रालय ने अपनी मर्जी से कभी सार्वजनिक नहीं किया। एंटोनिया नाम सोनिया गाँधी के जन्म प्रमाण पत्र में अंकित है।
असली पिता
सोनिया के कथित पिता (सोनिया की माँ के असली पति) का नाम स्टीफानो माईनो (Stefano Maino) है। सोनिया के जन्मप्रमाण पत्र के
अनुसार जन्म १९४४ व जन्म स्थान लूसियाना है। स्टीफानो माईनो द्वितीय विश्व युद्ध के वक्त सन् १९४२ से १९४५ तक रूस में युद्ध बन्दी थे, जब तक कि इटली ने इंग्लैण्ड व उसके मित्र देशों की सेना के आगे आत्म-समर्पण नहीं कर दिया था। इससे साफ पता चलता है कि स्टीफानो माईनो सोनिया का पिता हो ही नहीं सकता इसलिए इस सच्चाई को छुपाने के लिए सोनिया की जन्मतिथि व जन्म स्थान दोनों बदल देने पड़े। इस धोखाधड़ी की जांच-पड़ताल करने की बजाय, उसकी नई जन्मतिथि ९ दिसम्बर १९४६ कर दी गयी और उसका नया जन्म स्थान ओरबेस्सानो कर दिया गया। रूस में बिताये जेल के लम्हों में सोनिया के पिता धीरे-धीरे रूस समर्थक बन गये थे।
सोनिया का जन्म इटली के लूसियाना (Luciana) में हुआ, न कि जैसा उन्होंने संसद में दिये अपने शपथ पत्र में उल्लेख किया है कि उनका जन्म ओर्बेस्सानो में हुआ। शायद वे अपना जन्म स्थान लूसियाना छुपाना चाहती हैं, क्योंकि इससे उनके पिता के नाजियों और मुसोलिनी से सम्बन्ध उजागर होते हैं जबकि युद्ध समाप्ति के पश्चात् भी उनका परिवार लगातार नाजियों और फासिस्टों के सम्पर्क में रहा। लूसियाना नाजियों के नेटवर्क का मुख्य केन्द्र था और यह इटली स्विस सीमा पर स्थित है। इस झूठ का कोई औचित्य नजर नहीं आता और न ही आज तक उनकी तरफ से इसका कोई स्पष्टीकरण दिया गया है।
1. Kakanmath Mandir, Morena – A 1000-year-old Shiva temple believed to be built by ghosts in one night, Madhya Pradesh. 115 feet high, standing for centuries without mortar, baffling both devotees and scientists.
2. Vaijnath Mahadev Mandir, Gujarat – A 1000+ year old Shivling with 25 holes, from which holy water flows endlessly. Its mystery remains unsolved even today
3. Xiaozhai Tainkeng, present in Fengjie, Chongqing Municipality in China, is regarded as the deepest and largest natural well on earth globally.
प्रेमो की रहस्यमयी कहानी - मृत्यु के बाद की दुनिया का अनुभव 🧵
हरियाणा के जींद जिले के एक छोटे से गाँव मोरखी में एक ऐसी घटना घटी, जिसने न केवल एक परिवार को हिलाकर रख दिया, बल्कि सुनने वालों के मन में भी कई सवाल छोड़ दिए।
यह कहानी है प्रेमो की, एक 27 साल की महिला, जिसने अपने परिवार को बार-बार बताया कि वह रात को मर चुकी थी। लेकिन उसका सच सुनकर सभी के होश उड़ गए। आइए, इस रहस्यमयी कहानी को जानते हैं।
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प्रेमो एक साधारण गृहिणी थी, जिसकी शादी मोरखी गाँव में हुई थी। तीन बच्चों की माँ, प्रेमो अपने ससुराल में खुशी-खुशी जीवन बिता रही थी। वह अपने पति से बहुत प्यार करती थी और अपने बच्चों की देखभाल में डूबी रहती थी। लेकिन एक दिन, 27 साल की उम्र में वह अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गई।
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प्रेमो की बीमारी ऐसी थी कि कोई दवा काम नहीं कर रही थी। वह बिस्तर पर पड़ी रहती, कमजोर और असहाय। पूरा परिवार उसकी देखभाल में जुटा था। बच्चे, सास-ससुर, जेठानी-देवरानी, ननदें - सभी उसका ध्यान रखते। लेकिन उसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी।
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एक शाम, प्रेमो बिस्तर पर लेटी थी। वह बीमार थी, लेकिन उस रात कुछ असामान्य हुआ। रात के समय उसकी बेटी को बाथरूम जाना था। उसने अपनी माँ को पुकारा, “माँ, आप जाग रही हो?” लेकिन प्रेमो ने कोई जवाब नहीं दिया। बेटी ने सोचा कि माँ सो रही है, और वह चुपचाप चली गई।
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रात में प्रेमो का बेटा भी उठा और उसने माँ को पुकारा, लेकिन फिर कोई जवाब नहीं मिला। बच्चे यह मानकर वापस सो गए कि माँ गहरी नींद में है। उसी रात, प्रेमो के पति ने भी उसे हल्के से हिलाया और पूछा, “तुम ठीक हो?” लेकिन प्रेमो ने कोई हलचल नहीं दिखाई। पति ने सोचा कि वह बीमारी की वजह से थक गई होगी और उसे सोने दिया।
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सुबह हुई। बच्चे उठे और माँ के लिए खाना तैयार करने लगे। लेकिन जब उन्होंने प्रेमो को जगाने की कोशिश की, तो वह नहीं उठी। पति ने उसे झकझोरा, लेकिन प्रेमो की कोई प्रतिक्रिया नहीं थी। परिवार में हड़कंप मच गया। क्या प्रेमो को कुछ हो गया था? तुरंत गाँव के एक डॉक्टर को बुलाया गया।
जहाँ तांत्रिक विद्या और आध्यात्मिक शक्ति के बीच एक अनोखा संघर्ष हुआ। यह कहानी न सिर्फ़ आस्था की ताकत को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि साधारण उपाय भी कितने चमत्कारी हो सकते हैं।
कहानी की शुरुआत
एक छोटे से गाँव में एक सुखी-संपन्न परिवार रहता था। इस परिवार में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। घर में कुलदेवी का स्थान था, जो दादी माँ की आस्था का प्रतीक था। परिवार के लोग सुख-शांति के साथ रहते थे, कोई विशेष पूजा-पाठ नहीं करते थे, बस सामान्य रूप से दीप जलाते, कभी-कभार हनुमान चालीसा या दुर्गा चालीसा पढ़ लेते। नवरात्रि में मंदिर जाकर पूजा कर लेते, और यही उनकी आध्यात्मिक दिनचर्या थी। कुलदेवी का आशीर्वाद था, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती थी।
लेकिन, जैसा कि अक्सर होता है, सुखी परिवार को देखकर कुछ लोग जलन की आग में जलने लगते हैं। गाँव में ही एक व्यक्ति था, जो तांत्रिक विद्या में पारंगत था। उसने इस परिवार के खिलाफ तांत्रिक प्रयोग कर डाला। उसने घर के देवी-देवताओं का बंधन कर दिया, जिससे घर में की जाने वाली कोई भी पूजा-पाठ बेअसर होने लगी। तांत्रिक विद्या का असर ऐसा था कि परिवार में अचानक कलह, अशांति और परेशानियाँ शुरू हो गईं। पूजा-पाठ का कोई लाभ नहीं मिलता था, और घर का माहौल भारी होने लगा।
परेशानियों का दौर
परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है। पहले तो छोटी-मोटी बातों पर झगड़े होने लगे। फिर पशु-पक्षियों की अचानक मृत्यु होने लगी, जो गाँवों में तांत्रिक विद्या का एक सामान्य लक्षण माना जाता है। परिवार के लोग डर गए। उन्होंने गाँव के ही उस तांत्रिक से संपर्क किया, जिसने यह सब किया था। उसने उल्टा ही कह दिया, “कोई बड़ी बात नहीं है। तुम्हारी कुलदेवी नाराज़ हैं। थोड़ी पूजा कर लो, सब ठीक हो जाएगा।” उसने कुछ सामग्री दी और कहा कि इसे देवी स्थान पर रख दो। लेकिन यह सामग्री भी उसकी तांत्रिक विद्या का हिस्सा थी, जिससे हालात और बिगड़ गए।
परिवार की हालत ऐसी हो गई कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। गाँव में कोई बड़ा विद्वान या पंडित नहीं था, जो इस समस्या का समाधान कर सके। सामान्य लोग थे, जो ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे और न ही बड़े अनुष्ठान कर सकते थे। लेकिन उनकी आस्था अटल थी।
जिसने गरुड़ पुराण की बात को सिद्धि से दी, ये वही कहानी है , अलीगढ़ में ऐसा बच्चे ने जन्म लिया जिसके जन्म से ही शरीर पर गोलियों के निशान थे 🧵
कहानी है ये आए कैसे !? एक सच्ची घटना
ग्रेटर नोएडा में एक 24-25 साल का लड़का ठेला लगाता था। वह बड़ी-बड़ी कॉलोनियों में अपना फास्ट फूड या चाट का ठेला चलाता था, जिस पर “भंडार” जैसा कुछ लिखा होता था। वह अपनी जिंदगी खुशी-खुशी जी रहा था। एक दिन एक अमीर व्यक्ति उसके पास आया और उसे धमकाने लगा। उसने कहा, “तू दो कौड़ी का इंसान है, फिर भी मुझे ऐटिट्यूड दिखा रहा है? जल्दी से मेरे लिए एक प्लेट तैयार कर, वरना तेरे गाल पर तमाचा मारूंगा।”
यह सुनकर लड़के की आंखों में आंसू आ गए। उसने पीठ फेरकर अपने आंसू पोंछे और चुपचाप काम करने लगा। उसकी यह हालत देखकर अमीर व्यक्ति को शर्मिंदगी महसूस हुई। उसने कहा, “क्या मेरी बातों से तुझे बुरा लगा? मेरा इरादा तेरा दिल दुखाने का नहीं था।” तब लड़के ने जवाब दिया, “कोई बात नहीं साहब, जिस ऊंचाई पर आप हैं, मैं भी कभी वहां था।
यह सुनकर अमीर व्यक्ति हंसने लगा और तंज कसते हुए बोला, “क्या मजाक कर रहा है? तू सपने में मेरी तरह अमीर था? तू तो ठेले पर काम करता है और मेरे जैसा स्टैंडर्ड रखने की बात करता है! मैं तेरे साथ सहानुभूति दिखा रहा हूं और तू मुझसे बदतमीजी कर रहा है।”
लेकिन बाद में जब उस अमीर व्यक्ति को इस लड़के की असल कहानी पता चली, तो वह खबर आग की तरह फैल गई। सोशल मीडिया पर यह कहानी वायरल हो गई। लोग इस लड़के के बारे में जानकर हैरान रह गए और भगवान की माया की बात करने लगे। क्या यह लड़का कोई करोड़पति था? क्या इसके पास सचमुच करोड़ों की संपत्ति थी? अगर थी, तो फिर वह ठेला क्यों लगा रहा था? क्या उसने कोई सपना देखा था?
अमीर व्यक्ति ने उससे माफी मांगी और कहा, “मुझे इस माया का पता नहीं था। तुम्हें देखकर अब सब समझ आ गया।”
इस कहानी का राज जानने के लिए हमें अलीगढ़ के एक गांव, इंदौरखेड़ा, चलना होगा। वहां एक गरीब राजपूत परिवार रहता था। उस परिवार की एक महिला बड़ी मुश्किलों के बाद गर्भवती हुई। उनकी जिंदगी साधारण थी, लेकिन एक बच्चे की उम्मीद ने उनकी खुशियों को दोगुना कर दिया। वे सोचते थे, “हम भले गरीब हैं, लेकिन हमारी संतान हमारे साथ रहेगी।
समय बीता, और महिला का नौवां महीना शुरू हुआ। एक दिन वह खेतों में पशुओं का चारा काट रही थी, तभी उसे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उसे तुरंत घर लाया गया।
यह कहानी महावीर नामक एक व्यक्ति की है, जिसने 2021 के मार्च में एक असाधारण घटना का सामना किया। यह घटना न केवल उसके जीवन को बदल देती है,
नरक देखने पश्चात् बन गया कृष्ण भक्त
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आध्यात्मिक अनुभवों के उदाहरण: महावीर की लंबी यात्रा
यह एक विस्तृत और गहन कथा है जो आध्यात्मिक अनुभवों की अनोखी परतें उजागर करती है। प्रस्तुत दस्तावेज़ और छवियों के आधार पर, यह कहानी महावीर नामक एक व्यक्ति की है, जिसने 2021 के मार्च में एक असाधारण घटना का सामना किया। यह घटना न केवल उसके जीवन को बदल देती है, बल्कि आध्यात्मिकता, कर्म, और परलोक के रहस्यों को समझने की दिशा में एक मार्ग प्रशस्त करती है। नीचे इस लंबी कहानी को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें हर पहलू को बिना काटे और पूरी गहराई से शामिल किया गया है।
शुरुआत: एक साधारण जीवन का अप्रत्याशित मोड़
महावीर, जो चरखी दादरी, हरियाणा में रहता था, एक साधारण परिवार का व्यक्ति था। उसका परिवार सुखी था, हालांकि वह थोड़ी शराब पीता था, जो उसके बच्चों को भी पता था। 2021 के मार्च में एक शाम, वह अपने बेटे मुकेश से कहता है कि वह लेट हो रहा है और चारपाई पर लेट जाता है। अचानक उसके सामने अंधेरा छा जाता है और उसे चक्कर आते हैं। परिवार सोचता है कि वह सो रहा है, लेकिन रात भर वह बेहोशी की हालत में रहता है। सुबह बेटा उसे चाय पीने के लिए कहता है, लेकिन वह नहीं उठता। पत्नी उसे जगाने की कोशिश करती है, पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती।