Hindu Nationalist | Socio-Political Analyst | Swayamsevak | Literary Devotee | Entrepreneur | Backup @iarvindmohan मौन तपस्वी साधक बन कर हिमगिरि सा चुपचाप गलें
Sep 16, 2022 • 7 tweets • 6 min read
भविष्य में भारत का कोई PM न तिलक लगाने से हिचकेगा, न गङ्गा स्नान करने से और न ही कोई मंदिर में स्वयं मुख्य यजमान बन पूजा करने से डरेगा! भारतीय राजनीति में 'वोट कटने का भय' बहुत प्रभावी था,
प्रधानमंत्रीश्री @narendramodi जी ने उस भय को मार दिया #HappyBdayModiji
क्रमश 1/7
जैसे पहले से तय हो, कि देश का प्रधानमंत्री और कुछ भी हो सकता है, बस स्वाभिमानी हिन्दू नहीं हो सकता। अब भविष्य में यह गुलामी नहीं दिखेगी।
जब श्रधेय प्रताप महाराणा बने तो मेवाड़ युद्ध हारा हुआ, अकबर के जेहाद से रक्तरंजित, अस्त्मान सूर्य था, सीमाए सिकुड़ गई थी!
महाराणा मेवाड़ की जनता, कोल-भील, व्यापारी, सैनिक और सामंतों के लाडले थे, प्रिय थे
थ्रेड 1/11 #महाराणा_प्रताप_जंयती
सिसोदिया राजवंश और भीलों के बीच हज़ार वर्ष की कटुता का इतिहास था, पर यही भील श्रधेय प्रताप को भाई जैसा मानते थे, उनके साथ युद्ध में अंतिम सास तक लड़े!
जिस अखंड हिंदुत्व का लक्ष्य भीलों को युगों से न समझ आया, महाराणा की सीख उन्हें तुरंत समझ आ गयी
श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा के पावन दिवस पर आइए बताता हूँ आपको वो कहानी जो आपको रुला देगी।
क्या आपको पता है भगवान जगन्नाथ मंदिर पर हुए 17 हमलों की वजह से उन्हें 144 वर्षों तक पूरी मंदिर से दूर रहना पड़ा, इस्लामिक आतंकवाद का सच जानिए इस थ्रेड में
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जगन्नाथ मंदिर को नष्ट करने के लिए #पहला_हमला वर्ष 1340 में बंगाल के सुल्तान इलियास शाह ने किया था, उस वक्त ओडिशा, उत्कल प्रदेश था। इलियास ने मंदिर परिसर में बहुत खून बहाया और निर्दोष लोगों को मारा, लेकिन राजा नरसिंह देव, पुजारियों और आमजन मूर्तियों को बचाने में सफल रहे
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