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दिल में और दिल से भारत माता की जय
Jan 13,
..घोड़े की पीठ से उतर कर गधे की पीठ पर बैठना....(एक संस्मरण)....

बात उन दिनों की है जब गाँव गिरांव में प्राइवेट विद्यालयों ने अपना पैर पसारना शुरू ही किया था! ऐसा इसलिये कह रहा हूँ क्यों कि आजकल तो कुकुरमुत्ते की तरह हर तरफ फैले हुए हैं! हाँ तो उस जमाने में अपनी जान पहचान के एक अध्यापक हुआ करते थे! परास्नातक की योग्यता प्राप्त करने के बाद खाली बैठने से अच्छा सोचे कि कुछ शिक्षण कार्य ही किया जाये!क्यों कि सामान्य वर्ग को सरकारी नौकरी मिलना तो उस समय भी आसमान से तारे तोड़ लाने जैसी बात थी! इसलिये बिचारे एक स्थानीय CBSE पैटर्न पर चलने वाले सीनियर
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Jan 11,
भाजपा के विरोधी भाजपा को बहती गंगा बोलते हैं।

और यह सच भी है। तात्पर्य यह है कि एक से एक नीच व्यक्ति भी जब तक भाजपा मे रहता है, भले ही ऊपरी मन से सही, दिखावे के लिए ही सही राष्ट्रभक्त और हिन्दुत्व वादी राहत है।

हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या भाजपा मे आते हैं, तो टीका लगाने लगते हैं, भगवा पहनने लगते हैं, हिन्दू वादी हो जाते हैं। यही स्वामी प्रसाद अब सपा मे गए हैं जल्द ही टोपी पहने रोजा की दावतें करते नजर आएंगे। बुक्कल नवाब सपा से भाजपा मे आते हैं तो हनुमान चालीसा पढ़ते नजर आते हैं। और भी ढेरों उदाहरण हैं। व्यक्ति वही है,
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Jan 10,
रात को घी लगी रोटी का एक टुकड़ा चूहेदानी (मूसे रोकने का पिंजरा ) में रखकर हम लोग सो जाते थे।
रात को लगभग 11-12 बजे ख़ट की आवाज़ आती तो हम समझ जाते थे कि कोई चूहा फंसा है। पर चूँकि उस ज़माने में बिजली उतनी आती नहीं थी तो हमलोग सुबह तक प्रतीक्षा करते थे।
सुबह उठ कर जब हम चूहेदानी को देखते थे तो उसके कोने में हमें एक चूहा फंसा हुआ मिलता था।

हम हिन्दू चूँकि जीव-हत्या से परहेज करते, इसलिए हमारे बुजुर्ग उस चूहेदानी को उठाकर घर से दूर किसी नाले के पास ले जाते थे और वहां जाकर उसका गेट खोल देते थे ताकि वो चूहा वहां से निकल कर भाग जाए।
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Jan 9,
इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता, पर अपने कॉन्सेप्ट क्लीयर होने चाहिए.

2017 में UP वासी होते हुवे केवल यह इच्छा थी कि थोड़ा लॉ ऑर्डर हो जाए, गुंडागर्दी कम हो जाए, शांति रहे. दंगे बंद हों, टोपी वालों का आतंक और अपीजमेंट समाप्त हो जाए, और चूँकि हिंदू वादी थे तो यह भी आकाँक्षा थी कि राम मंदिर बन जाए.

2022 पाँच वर्ष बाद जब देखता हूँ तो लगता ही नहीं कि यह वही UP है. दंगे छोड़िए कोशिश करने वालों की भी रूह काँपती है. गुंडागर्दी कम छोड़िए करने वालों के घर बुल डोजर चल जाते हैं. राम मंदिर तो कब का फ़ाइनल हो गया, काशी का भव्य कारिडोर बन गया, विंध्य्वासिनी माता
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Jan 8,
पिछले छ महीने से टोंटी यूपी मे ताल ठोंक कर योगीजी को ललकार रहा था......आज चुनाव का शंखनाद होने बाद चुनाव आयोग की वर्चुअल रैली की बात कहते ही किंकिया कर कहने लगा की बीजेेपी का आई.टी. सेल बहुत मजबूत है,उससे निपटना आसान नही है...यानी की संग्राम प्रारम्भ होते ही पलायन....भगोड़पन...अभी तक बाहुबली बनने का झांसा देने वाले टोंटी भाई के अंदर इतना पिलपिलापन...?

खैर मुझे तो समझ मे आ रहा कि क्यों आई.टी. सेल के बहाने चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ रहे हो....साफ साफ क्यों नही कहते हो कि ओवैसी ने शांतिधूर्तों का अधिकाश वोट खिसका कर तुम्हे बौराने पर
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Jan 8,
25 जनवरी 2000 का दिन। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के सादात स्टेशन पर एक ट्रेन रुकी थी। वहाँ छात्रों का एक समूह था, जो ट्रेन के अलग-अलग डिब्बों में चढ़ने लगा। कुछ छात्र जब एक डिब्बे में चढ़ने लगे तो उस डिब्बे में मौजूद कुछ सुरक्षाकर्मियों ने उन छात्रों को रोका। छात्र नहीं माने और जबरन चढ़ने की कोशिश करने लगे। उन सुरक्षाकर्मियों ने गोली चलायी - एक छात्र की मौत हो गयी और एक घायल हो गया।
इस बात पर तो बवाल मच जाना चाहिए था, बहुत बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा हो जाना चाहिए था। राजनीति भी जम कर होनी चाहिए थी, क्योंकि वे सुरक्षाकर्मी एक राजनेता की सुरक्षा
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Jan 8,
देश एक विकट परिस्तिथि से गुजर रहा है -
देश के आंतरिक और बाहरी दुश्मनों
के निशाने पर केवल मोदी और योगी
ही नहीं हैं, पूरा हिन्दू समाज है --

इसलिए किसी भी हालत में मोदी का
साथ मत छोड़िये --छोटी मोटी बातों
में उलझ कर उस पर सवाल मत
कीजिये - 10 रुपये दाल के दाम बढ़ गए, सब्जी
5 रुपये किलो महंगी हो गई, पेट्रोल,
गैस ये सब बातें समय के अनुसार
ठीक हो जाएँगी --मगर मोदी गया तो
फिर कुछ नहीं रहेगा और ये ही सच
है -

एक बार दिल पर हाथ रख कर सोचो
कि जो ओवैसी मुसलमानों को मोदी
के लिए नफरत के सिवाय कुछ नहीं
दे सकता,
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Jan 6,
● ऐसी 'सहिष्णु' थी इंदिरा गांधी 😀

इस पोस्ट को पढ़ कर नयी पीढ़ी का दिमाग हिल जायेगा

फिल्म निर्देशक अमृत नाहटा ने 1974 में एक फिल्म बनायी थी जिसका नाम था किस्सा कुर्सी का। इस फिल्म ने इंदिरा गांधी की सरकार को हिला कर रख दिया था। जब इस फ़िल्म को सेंसर बोर्ड ने देखा तो Image इसके किसी सदस्य ने केंद्र सरकार से यह चुगली कर दी कि इस फिल्म के कुछ दृश्य सरकार विरोधी हैं। बस इतना सुनते ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दिमाग का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया था और उसने सूचना और प्रसारण मंत्री विद्या चरण शुक्ल से कठोर कारवाई करने को कहा। फिर वे
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Jan 5,
जिन मुट्ठी भर सुरक्षाकर्मियों ने फ्लाईओवर के दोनों तरफ से घिरे भीड़ के बीच से सकुशल प्रधानमंत्री को बचाकर निकाल लिया,, हम कभी उनके नाम नहीं जान पायेंगे, लेकिन हमारे आभार और शुभकामनाओं के भागी हैं वे,इसलिए हृदय खोलकर उन्हें आभार दीजिये,ईश्वर का धन्यवाद कीजिये और उनसे प्रार्थना कीजिये कि वे देश का हितचिंतकों की पग पग रक्षा करें।

अभी तो कई वीडियो आ गए हैं,,देखिए...मन काँप जाएगा जब एक फ्लाईओवर पर दोनों तरफ से प्रधानमंत्री घिरे दिखेंगे।
सुरक्षित ठहराते हुए धोखे से प्रधानमंत्री को उस रुट पर बुलाकर ऐसे रोकना, निश्चित ही बड़े घटना को अंजाम देने
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Jan 5,
कुरान पर चले थे केस....

बहुत कम लोग जानते है कि सन 1986 में दिल्ली में कुरान पर केस चला था. .......और कुरान की 26 आयतों को दिल्ली कोर्ट ने विवादित, अमानवीय एवम शर्मनाक घोषित किया था......उस समय जो जज थे उनका नाम जस्टिस z.s.Lohat था.... हुआ ये था कि दिल्ली के इन्द्रसेन शर्मा और राजकुमार आर्य नामक दो व्यक्तियों ने कुरान की आयतों को दीवारों पर लिखवा दिया था.....जिसमे लिखा था कि जो इस्लाम को न माने उसे कत्ल कर दो इत्यादि। ये सब देखकर मुस्लिम भड़क गए.....दोनो को गिरफ्तार कर लिया गया... और दोनो को
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Jan 5,
एक जमाना था .. कानपुर की "कपड़ा मिल" विश्व प्रसिद्ध थीं कानपुर को "ईस्ट का मैन्चेस्टर" बोला जाता था।
लाल इमली जैसी फ़ैक्टरी के कपड़े प्रेस्टीज सिम्बल होते थे. वह सब कुछ था जो एक औद्योगिक शहर में होना चाहिए।

मिल का साइरन बजते ही हजारों मज़दूर साइकिल पर सवार टिफ़िन लेकर फ़ैक्टरी की ड्रेस में मिल जाते थे। बच्चे स्कूल जाते थे। पत्नियाँ घरेलू कार्य करतीं । और इन लाखों मज़दूरों के साथ ही लाखों सेल्समैन, मैनेजर, क्लर्क सबकी रोज़ी रोटी चल रही थी।
__________________________

फ़िर "कम्युनिस्टो" की निगाहें कानपुर पर पड़ीं.. तभी से....बेड़ा गर्क हो गया।
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Jan 4,
एक पिम्पल का इलाज एक समझदार अनुभवी डॉक्टर और एक केमिस्ट दोनों कर सकते हैं।
केमिस्ट आपको एक टेबलेट देगा या फिर कोई ऑइंटमेंट.
पिम्पल सही हो जाएगा . पर कुछ दिन बाद दूसरी जगह निकल आएगा.
अनुभवी चिकित्सक समझेगा कि यह पिम्पल क्यों निकल रहे हैं...वो समस्या की जड़ ढूंढेगा और वहां से इलाज शुरू करेगा।
आप चकरा सकते है कि डॉक्टर तो बहुत नामी है..फीस भी मोटी है पर चार दिन के ट्रीटमेंट के बाद भी पिम्पल अपनी जगह पर बना हुआ है..
In फैक्ट डॉक्टर की प्रियोरिटी में उस पर्टिकुलर पिम्पल का इलाज करना था ही नहीं .. उसने इलाज़ किया आपके पेट का, आपके रक्त की
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Jan 2,
जब भी चुनाव होता है, चुनाव में मुद्दे होते हैं।
मुद्दे चुनावी संग्राम की सुंदरता होती है। मुद्दों को जमीन से उठाया जाता है, फिर इसे आम जनता में भुनाया जाता है।मुद्दों पर सत्ता को घेरने की कोशिश होती है।सत्ता के राजनीतिक मातहत डिफेंस करते हैं।विपक्ष उन डिफेंसेज का काउंटर करता है। देश की लैंडमार्क पॉलिटिक्स यूपी से होती है। लेकिन आश्चर्य कि इस चुनाव यहां एक भी मुद्दे अभी तक टिक नहीं पाए हैं। आधारभूत सुविधा मुद्दा नहीं है। बिजली, सड़क, खाद्यान्न मुद्दा नहीं है। भ्रष्टाचार मुद्दा नहीं है। लॉ एंड ऑर्डर मुद्दा नहीं है। गुंडागर्दी मुद्दा नहीं है।
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Dec 31, 2021
गोगोई ने सच कहा तो
दागी भ्रष्ट जजों के नाम बता कर
बाहर किया जाये, अन्यथा,
गोगोई पर अदालत की अवमानना
की कार्रवाई शुरू हो -

पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से
सुधीर चौधरी, ज़ी न्यूज़ के संपादक
ने उनकी आत्मकथा "Justice for
Judges" के प्रकाशित होने से पूर्व
सीधा सवाल किया था कि क्या
सुप्रीम कोर्ट में भी भ्र्ष्टाचार है -

इस पर रंजन गोगोई ने कहा -
"जज आसमान से नहीं गिरते हैं.
भ्रष्टाचार उतना ही पुराना है जितना
कि समाज. भ्रष्टाचार जीवन का एक
तरीका बन गया है – जीवन का ऐसा
तरीका जिसे लोग अब स्वीकार्य
करते हैं"
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Dec 31, 2021
भूल गए न ?
वे चैराहों पर पीटी जाती औरतें ,,,
एयरपोर्ट पर अनजान अमेरिकी सैनिकों को अपने दुधमुंहे बच्चे सौंपती बेबस माएँ,
मासूम बच्चियों को छाती से चिपटाकर बेतहाशा भागती औरतें ,
सचमुच भूल गए न ?

वक्त भी क्या चीज है , बड़े और गहरे जख्मों को भी भर देता है ! स्मृतियाँ भी ऐसी हैं !
बेशक याद आती हैं पर वक्त के साथ हल्की पड़ती जाती हैं , उतना दर्द नहीं देती !

अब देखिए न ! अफगानिस्तान और प्रतिदिन यातनाएं भोग रही उसकी जनता को हमने किस तरह भुला दिया !
कोई चर्चा भी नहीं होती तो किसी को दर्द भी नहीं होता !
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Dec 31, 2021
दिग्विजय सिंह --मानसिक रोगी -
अपनी लुगाई से तो पूछ लो,
क्या वो भी मोदी से प्रभावित है -
हिन्दू कौन, ये बताने की औकात
नहीं है तुम्हारी --

सच में लगता है दिग्विजय सिंह एक
मानसिक रोगी है --उसने अपने एक
बयान में कहा है कि प्रियंका वाढरा
ने उसे "ज्ञान" दिया है जिसके अनुसार
पैंट जींस पहनने वाली लड़कियां
मोदी से प्रभावित नहीं है बल्कि 40
वर्ष से ऊपर की औरतें मोदी से ज्यादा
प्रभावित हैं --

कितना गिरोगे दिग्विजय सिंह मोदी
को कोसने के लिए, वो भी तब, जब
वो तुम लोगों की अनर्गल बकवास
का जवाब नहीं देते --

अब एक बार प्रियंका से ही
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Dec 30, 2021
किसी भी चुनाव को रद्द करना है तो सभी दलों की सहमति होना चाहिए। विडंबना देखिए कि लखनऊ दौरे पर गए चुनाव आयोग के दल को कल एक भी राजनीतिक दल ने नहीं कहा कि चुनाव टाल दीजिए बल्कि सबने एक सुर में कहा कि चुनाव समय पर होना चाहिए। वैसे तो हमाम में सब नंगे हैं लेकिन अगर हमाम सियासी हो तो नंगई जन्मसिद्ध अधिकार व कर्तव्य हो जाता है।

कोरोना की पिछली विभीषिका देखने व कोर्ट के निवेदन के बाद वैसे तो केंद्र व राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बनती थी कि वह आगे बढ़ कर खुद इस बात को सभी राजनीतिक दलों के सामने रखता कि
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Dec 30, 2021
TV पर शाहरुख़ खान आते हैं अजय देवगन के साथ दो रुपए वाला पान मसाला बेंचते हुवे. मुझे मालूम है शाहरुख़ खान ऐसे दस मसाला वालों को ख़रीद लें. मैं ब्रांड शाहरुख़ का कोई फ़ैन भी नहीं. पर मुझे और इस ब्रांड के मालिक को मालूम है जब शाहरुख़ स्क्रीन पर ये मसाला खाते हैं तो सवा अरब के भारत में पचीस करोड़ यह मानते हैं कि वाक़ई शाहरुख़ यह खाते हैं और वह bhi यह ज़हर खाने लगते हैं.

यह होती है ब्रांड और ब्रांड अंबेसडर की ताक़त.

भारत में नेहरू परिवार ने दसियों साल ब्रांड गांधी पर खर्च किया है. एक समझदार व्यवसाई होते हुवे मैं व्यक्तिगत गांधी से असहमत हूँ तो
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Dec 29, 2021
"हिंदुस्तान ही खालिस्तान है" और "सारा खालिस्तान ही हिंदुस्तान है"

पंजाब के Nangal (नंगल) और लुधियाना ' में कुछ कार्यक्रम थे । प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान वहां आमंत्रित मुख्य अतिथि से खालिस्तान समर्थक एक बंधु ने तीख़ा प्रश्न करते हुए कहा- खालिस्तान की मांग पर आप (हिन्दुओं) को क्या कहना है?

मुख्य अतिथि ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया :-

जब देश को और धर्म को आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत, शीश देने वाले वीरों की आवश्यकता थी तब "पिता दशमेश" गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने "ख़ालसा पंथ" का सृजन करते हुए "संत-सिपाही" परंपरा की नींव डाली थी,
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Dec 29, 2021
दलाल ऐसे ही होते हैं, दलाली इसे ही कहते हैं...
दिल्ली के लुटियन न्यूजचैनलों को देखिए, विशेषकर 'आजतक" तो आपको ऐसा लगेगा कि पूरे देश में कोरोना और उसकी नई किस्म ओमाइक्रोन के खिलाफ केवल एक मुख्यमंत्री, केवल एक सरकार सक्रिय हैं। इस महामारी से केवल वही लड़ रहे है। उस मुख्यमंत्री का नाम नाम केजरीवाल है। उस सरकार का नाम दिल्ली सरकार है।
यही न्यूजचैनल लेकिन यह नहीं बता रहे हैं कि उत्तरप्रदेश से लगभग 11 गुना छोटे राज्य दिल्ली में कोरोना संक्रमण के नए मरीजों की संख्या में रोजाना हो रही वृद्धि की दर उत्तरप्रदेश से लगभग 9 गुना अधिक है।
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Dec 29, 2021
तिरंगे का पांचवां रंग

कक्षा में मास्टर जी ने पूछा-

"बच्चों, बताओ तो भारत के राष्ट्रीय ध्वज में कितने रंग है ?"

"तीन"। सारे बच्चों के स्वर कक्षा में एक साथ गूंजा।

शोर थमने के बाद एक सहमा-सा बच्चा धीरे धीरे खड़ा होकर विनम्र स्वर में बोला,

"मास्टर जी, पांच"। सारे बच्चे यह सुन कर हँसने लगे।

मास्टर जी अपने गुस्से को दबाने की कोशिश करते हुए बोले :

"चलिए, आप ही सबको बता दीजिए कौन कौन से पाँच रंग है हमारे तिरंगे में"?

तिरंगे के नाम सुनने के बाद भी बच्चा धीरे धीरे बोलने लगा-"सबसे उपर केसरिया, उसके नीचे सफेद, सबसे नीचे हरा और बीच में एक
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