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चापड़ी या मोम
आयुर्वेद के अनुसार मुँह से संबंधित 65 तरह के रोग है, जो दांतो, मसूड़ो, जीभ आदि में हो सकते है, जिनसे बचाव के लिए तीन प्रकार के उपाय है ।https://twitter.com/isro/status/1694360664675127726भारत आज फिर अपनी मेधा का लोहा मनवा रहा है, और सेकड़ो वर्षो की गुलामी के बाद फिरसे अपने प्राचीन ज्ञान के प्रकाश से संसार को आलोकित कर रहा है।
महारानी अहिल्या बाई को कई मंदिर के पुनर्निर्माण का श्रेय है, लेकिन उन्होंने न्याय के प्रति भी उच्च मापदण्ड स्थापित किये है।
सोना खरीदना भारतीयों का पैशन रहा है, खासकर महिलाओं का। सोने की कोई ज्वेलरी खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातें है जो आपको जानना चाहिए और पता होना चाहिए । बेसिक से शुरू करते है।
गैर हिंदी भाषी राज्य तो अपनी भाषा से किसी न किसी रूप में लाभन्वित हो जाते है।, लेकिन हिंदी के कारण आप लगभग सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं में पिछड़ जाते हो। और व्यसायिक शिक्षा में तो हिंदी का कोई नामलेवा नही है।
सभी जीव को पोषण देना हम सभी का कर्तव्य है, सभी पशु, पक्षी गाय यहाँ तक कि चींटी को भी अन्न देने का विधान है, पर इसका अर्थ ये नही है कि उन्हें घर के अंदर ही बुला लिया जाए।
कई बार ये बात कही जाती है की श्री किशोरी जी का नाम श्री मद भागवत में नही है और ये जयदेव गोस्वामी की कल्पना है। जो की उन्होंने गीत गोविंद में लिखा है।

भारतीय भोजन में दही का विशेष महत्व है, दूध में लैक्टोलैक्टोबैसिलस बुल्गारिकस के कल्चर से दही बनाया जाता है, जिनकी उपस्थिति हमारी आंतो में भी होती है।
पंढरपुर में एक साहूकार रहता था, उसके कोई पुत्र नहीं था, उसने भगवान श्री विट्ठल से प्रार्थना की कि उसे अगर संतान होगी तो वो श्री विट्ठल को सोने की करधनी बनवा कर पहनाएगा।
काजू, एक कटोरी बादाम, मगज के बीज, ताल मखाने, अखरोट आदि लेकर उन्हें घी में थोड़ा भुन ले।ताकि उनमें से नमी निकल जाए। सभी को बराबर मात्रा के ले सकते है।
हम बाजार के प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करतें है लेकिन असल में उनमें गुणवत्ता सही नही होती है और उसके कारण हमारा विश्वास हल्दी और चंदन जैसे इंग्रीडिएंट से उठ जाता है।
असल में हमे भी ऐसा ही दिखाई देता है लेकिन हमारा दिमाग उसे प्रोसेस कर हटा देता है, ताकि हमे असहज महसूस न हो, उसी प्रकार हमारी नाक भी आंखो के सामने होती है लेकिन हमारा दिमाग या ऐसा कहे की बुद्धि उसे भी हटा देती है।
जैसा कि पिछली पोस्ट में बताया था की पारद को रसशास्त्र में महादेव का वीर्य माना जाता है है उसी प्रकार गंधक भगवती का रज माना जाता है।
https://twitter.com/Dil_Me_Shiv/status/1538911000929239040मुश्किल से मिलती हे ये और कोई लाने वाला भी निश्चित भी नही कि लेकर आयेगा फिर भी ठाकुर जी को जो प्रिय होता है, वो केसे भी आ ही जाता है हर वर्ष आ ही जाती है । आते ही प्रभु को सुख मिलता है...
आयुर्वेद के अनुसार विरुद्ध आहार खाने से कई प्रकार के रोग हो सकते है।
हमारी सुंदरता में सर के बालो का बहुत ही ज्यादा महत्व हैं। और हर कोई बालो को लेकर बहुत ही ज्यादा पसेसिव है।