Banker's Diary Profile picture
2 Oct
ये आज हम कैसे संवेदनहीन और निष्ठुर समाज का हिस्सा बनते जा रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों को कैसा सामाजिक परिवेश सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। कैसे किसी के साथ हुए अन्याय को दरकिनार कर धर्म, जाति, वर्ण, लिंग, स्थान आदी चर्चा में व्यस्त हैं। क्यों हम किसी के दर्द को अनदेखा कर
अपने मन की तुष्टिकरण में लिप्त हो रहे। क्यों हमारी अंतरात्मा की आवाज़ नहीं सुन पा रहे और सत्ता या विपक्ष द्वारा राजनीतिक फ़ायदे के लिए किसी दुघर्टना के बाद उठे जनाक्रोश को दबाने या बढ़ावा देने वाली रणनीति को नहीं समझ पा रहे। धार्मिक या वर्ण विशेष द्वेष के जहर में घुली
मानसिकता किस प्रकार सामान्य जनमानस के विचार करने की क्षमता को कुंद कर सकती है इसका ज्वलंत उदाहरण है एक लड़की के साथ हुई ये हृदय विदारक घटना जिसे बड़े आसानी से दलित- सवर्ण रंग दे दिया गया। दो पक्षों के आपसी रंजिश में बदले कि भावना से एक लड़की पे निर्दयता से शारीरिक हमला होता
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30 Sep
हमारे एक बैंकर साथी @RookieHarvey ने बैंकिंग से जुड़े एक ऐसे पहलू को शब्दों में पिरोने की कोशिश की है जो शायद बरसों से इस इंडस्ट्री में है परन्तु उसकी भयावहता आज के इस मंदी की दौर में ज्यादा उभर कर सामने आ रही।
आज मैं बात करना चाहता हूं एक ऐसे चलन कि जो नया तो नहीं है परन्तु
Covid-19 महामारी के बाद बहुत ही तीव्र गति से फैल रहा है हमारे देश में। निजी बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों द्वारा वसूली के नाम पर गुंडे मवाली की सेवा लेना। हालांकि ये काम बैंक किसी तृतीय पक्ष को सौंपते हैं जिनको वसूली के राशि के एवज में दलाली दी जाती है। अब चुकीं काम ऐसा
है तो ये एजेन्सीज गुंडों की बहाली ही करती हैं। इन गुंडों का काम हर हाल में लोगों से पैसे वसूलना होता है। लोगों को डराना धमकाना, उनके साथ गाली गलौज करना मार पीट करना सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित करना ये हर तिकड़म लगा देते हैं। ख़ैर मैं आपको बता दू की इस तृतीय पक्ष को जाने वाली दलाली
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25 Sep
*❀ दूसरों को सही-गलत साबित करने में ❀*
*✦जल्दबाजी न करें✦*

*एक प्रोफेसर, अपनी क्लास में कहानी सुना रहे थे, जो कि इस प्रकार है –*

*एक बार समुद्र के बीच में एक बड़े जहाज पर बड़ी दुर्घटना हो गयी। कप्तान ने, शिप खाली करने का आदेश दिया,
जहाज पर एक युवा दम्पति था, जब लाइफबोट पर चढ़ने का नम्बर युवा दम्पति का आया, तो देखा गया नाव पर केवल एक☝️ व्यक्ति के लिए ही जगह है, इस मौके पर आदमी ने औरत को छोड़ दिया और नाव पर कूद गया।*
*डूबते हुए जहाज पर खड़ी औरत ने जाते हुए अपने पति से चिल्लाकर एक वाक्य कहा।*
*अब प्रोफेसर ने रुककर अपने सभी स्टूडेंट्स से पूछा:- तुम लोगों को क्या लगता है, उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा?*
*ज्यादातर विद्यार्थी फ़ौरन चिल्लाये की, स्त्री ने कहा होगा, मैं तुमसे नफरत करती हूँ ! I hate you !*
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19 Sep
*निवाला*

बड़ी बेचैनी से रात कटी।
बमुश्किल सुबह एक रोटी खाकर, घर से अपने शोरूम के लिए निकला।
आज किसी के पेट पर पहली बार लात मारने जा रहा हूँ।
ये बात अंदर ही अंदर कचोट रही है।
ज़िंदगी में यही फ़लसफ़ा रहा मेरा कि, अपने आस पास किसी को, रोटी के लिए तरसना ना पड़े,
पर इस विकट काल मे अपने पेट पर ही आन पड़ी है।
दो साल पहले ही अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर कपड़े का शोरूम खोला था,मगर दुकान के सामान की बिक्री अब आधी हो गई है।अपने कपड़े के शोरूम में दो लड़के और दो लड़कियों को रखा है मैंने ग्राहकों को कपड़े दिखाने के लिए। लेडीज
डिपार्टमेंट की दोनों लड़कियों को निकाल नहीं सकता। एक तो कपड़ो की बिक्री उन्हीं की ज्यादा है, दूसरे वो दोनों बहुत गरीब हैं। दो लड़कों में से एक पुराना है, और वो घर में इकलौता कमाने वाला है।
जो नया वाला लड़का है दीपक, मैंने विचार उसी पर किया है। शायद उसका एक भाई भी है,
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15 Sep
हमारे बैंकर दोस्त @SinghForSewa03 जी की डायरी के कुछ पन्ने आपको प्रस्तुत कर रहे।
ये प्रसंग एक ग्रामीण क्षेत्र की शाखा के रोकड़िया और प्रधान के बीच की वार्ता का है।
प्रधान जी: कैशियर साहब नमस्कार
कैशियर: नमस्कार प्रधान जी.. बताएं
प्र. जी: सर मेरे गांव से एक माता जी नगद भुगतान के लिए आईं थी अभी, आपने मना कर दिया नगद देने से (माताजी तमतमाए हुए पीछे बैठी थी)
कै.: प्रधान जी ये 2017 से नहीं खाता में कोई लेन देन नहीं की थीं तो खाता निष्क्रिय हो गया है। KYC करना होगा, मैंने इनको बता दिया है। आज ये कोई दस्तावेज
नहीं लाई है तो संभव ना हो पाएगा।

प्र. जी: राशन कार्ड तो है।
कै.: राशन कार्ड तो मान्य दस्तावेज़ नहीं है।

प्र. जी: इतना दूर गांव है कैशियर साहब खाली परेशान कर रहें हैं थोड़ा" मानवीय तौर" पर भी हो सकता है। आप भुगतान कर दीजिए मैं कल KYC भिजवा दूंगा। (गांव से शाखा सात km दूर है
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13 Sep
पिछले कुछ दिनों से बैंकरों पे होने वाली शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से परेशान हो कर सोचते सोचते मै नोटaबंदी के समय में पहुंच गया। उस समय भी बैंकरों को 52 दिनों तक आर्थिक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ा था। और उस त्याग के बदले इनाम स्वरूप इस योजना की विफलता का
श्रेय हम बैंकरों को ही दिया गया।
हालांकि व्यक्तिगत रूप से मैं इस योजना का पक्षधर था और ये मानता था कि इसके सही कार्यान्वयन से काले धन के ऊपर करारा आघात किया जा सकता है। इस योजना के विफल होने से तमतमाई सरकार, अर्थशास्त्री और सारे एजेंसी ने आनन फानन में जैसे एक आसान शिकार समझ कर
बैंकरों के विरूद्ध जमकर कार्रवाई करी। कई बैंकरों पे केस दर्ज़ हुआ सज़ा भी हुई। परन्तु किसी ने भी इस विफलता के असली कारणों को जानने का प्रयास नहीं किया।
मैं कोई अर्थशास्त्री या जांच एजेंसी वाला तो नहीं हूं लेकिन प्रैक्टिकली जो दिखा और जो मुझे समझ आया आज उसे बताने की कोशिश कर रहा।
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12 Sep
नमस्कार दोस्तों
दोस्तों आज मैं कुछ दिन पहले घटी एक ऐसी घटना का ज़िक्र करना चाहता हूं जिसने मेरी अंतरात्मा को झकझोर के रख दिया और मुझे ये सोचने पे मजबूर कर दिया के हम किस दिशा में चल रहे हैं। शनिवार रविवार की छुट्टी थी तो पापा बोले के चलो गांव घूम आते है जो मेरे घर से क़रीब
नब्बे km ही है। पुरखों की अर्जित किए हुए खेत हैं थोड़े जिसपे इस वक़्त धान रोपाई की हुई है। वैसे तो मेरा मन बिल्कुल भी नहीं था जाने का लेकिन पापा तो पापा ठहरे हो गए शुरू के तुमको अपने ज़मीन का खेत का पता होना चाहिए कहां है कितना है और bla bla तो भई इतना सुनने के बाद शनिवार को हम
पहुंचे गांव। यहीं पर मुझे वो शख्स मिला जिसने एक सवाल से मेरी बोलती बंद कर दी मैं बिल्कुल निरुत्तर हो गया। आज भी उसके उस सवाल का जवाब ना ढूंढ पाया तो ये सोच कर आप सब से शेयर करना चाहता हूं के शायद कुछ बोझ हल्का हो जाए। हालांकि हमारे खेत खलियन अच्छे खासे है सालों पहले हमारे
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11 Sep
अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए एक और लेख हमारे बैंकर भाई @R3_QuadrilaterL की कलम से #चतुर्भुज_का_चश्मा👓

अच्छे से याद है , बारिश बहुत कम हुई थी उस साल में , दिन 22 जुलाई 2012.

जिला रायगढ़ के पास 50 किमी दूर सारंगढ़ तहसील ।
नई नई जोइनिंग थी ,जोश लबालब भरा था ।
फिर क्या बस पकड़ी और निकल लिए ।
अपना मन भी साहब बना हुआ था, भाई सरकारी नौकरी ग्रामीण बैंक में , ऑफिसर वाली , कहाँ मिलती है इतनी आसानी से ?
पर पता नहीं था जोश ठंडा होने वाला है , जैसे ही यात्रा समाप्त हुई , बस स्टैंड पे उतरे अगल बगल का माहौल देखा ,कीचड़ वाली रोड और एक
धूल भरी हवा का तेज़ चमाट पड़ा मानो जैसे तेज़ नींद से उठा दिया हो ।

हिम्मत करके हमने भी पता पूंछा, मन ही मन सोचा अरे कोई नहीं शहर का क्या? शाखा मस्त होनी चाहिए ।
दिल को मानते हुए चल दी पैदल पास ही पूंछताछ करने के बाद गंतव्य स्थान पहुँचे ।
शाखा में एंट्री, मानो जैसे खुद को
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10 Sep
TRANSFER KE LIYE DARNA MAT* *PROMOTION KE LIYE MARNA MAT.
#Golden_words_to_Enjoy_your_Banking_Job

1. Read maximum *bank circulars and guidelines* meticulously and follow those religiously. Also be updated.

2. Do not yearn for money other than your *salary and perks.
3. Dont fear transfer. Any day transfer is better than charge sheet and suspension.
4. Do not work for promotion.

TRANSFER KE LIYE DARNA MAT

PROMOTION KE LIYE MARNA MAT

5. Do not work for target only. Focus on *Service & Work* systematically with priorities , rest will follow.
6. Say no to all *verbal order* of your seniors which are *against bank guidelines* or you feel unethical.

7. Always try to complete work within *working hours only* 10 AM to 5 PM time schedule.

8. Say no to *holidays working* if it can be avoidable except exigencies.
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10 Sep
लोकतंत्र या गुंडातंत्र
भारत के संविधान के अनुसार लोकतंत्र के तीन स्तंभ हैं आइए उनका वर्णन देखते हैं।
1. विधायिका
विधि यानी नियम। विधायिका (Legislature) या विधानमंडल किसी राजनैतिक व्यवस्था के उस संबंध को कहा जाता है जिसे नियम कानून व जन नीतियां बनाने, बदलने व हटाने का अधिकार हो।
भारत में राष्ट्रीय स्तर पर दो-सदनीय विधायिका है जो संसद कहलाती है और राज्य स्तर पे विधानसभा।
विधायिका की ये परिभाषा संविधान लिखते वक्त दी गई थी परन्तु इतिहास साक्षी है कि किसीभी सरकार के बहुमत में आते ही उसके नेतागण इस विधायिका को अपनी रखैल समझते हैं और जनता को उसी चश्मे से देखने
पे मजबूर करते जो वो दिखाते हैं। ये स्वयं को भारत के विधान से ऊपर समझते हैं। उदाहरण स्वरूप महाराष्ट्र में बैंकरों पर आए दिन होते हमले है। सारे हमले राजनीति से प्रेरित हैं और इनको ना विधि व्यवस्था की फ़िक्र है ना कानून व्यवस्था की।
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4 Sep
10 Reason why privatisation is bad for you

1. Your services get worse
Public services involve caring for people. But private companies make a profit from public services by cutting corners or underinvesting. #StopPrivatisation
2. Privatisation costs you more
You pay more, both as a taxpayer and directly when they privatise public services. #StopPrivatisation
3. You can't hold private companies accountable
If a private company runs a service, they are not democratically accountable to you. You don't have a voice. #StopPrivatisation
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2 Sep
आत्मनिर्भरता
नीचे लिखे शब्द पूर्णतया मेरे व्यक्तिगत विचार हैं और आपके विरोधाभाषी विचार भी सर्वथा स्वीकार्य हैं।

पिछले दिनों एक जुमला फ़ेका गया देश के लोगों की तरफ़ जिसे आत्मनिर्भर भारत का नाम दिया गया। भक्त बड़े ही खुश हुए और इस जुमले का बाहें फैला के स्वागत करने मे लग गए।
इस आत्मनिर्भर भारत की परिभाषा किसी को समझ नहीं आयी पर गुणगान सब करने लगे। हमारे राष्ट्रभक्त नेताजी की परिभाषा हमारे पल्ले तो ना पड़ी।
अब इनकी राष्ट्रभक्ति पे भरोषा करें तो इन्हे देशी पूँजीपतियों मित्रों के हाथों मे अर्थव्यवस्था का केन्द्रीकरण मंजूर और देश की असंगठित क्षेत्र
की मजबूती इन्हे खलती है। नेताजी की आर्थिक नीतियाँ पूंजीवादी मित्रों की किस हद तक मददगार हैं इस बात का अंदाजा इस महामारी काल मे भी उनके द्वारा की गयी अधिग्रहणों की संख्या से और उनके लगातार बढ़ रही सम्पत्तियों से लगाया जा सकता है।
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31 Aug
Customer Service is the key to survive for PSBs

The thread is a little long but could be useful in the context of enhancing the customer service standards in branch banking specifically for PSBs..

Out of my 13+ yrs of experience with three different kind of banks..

#SavePSB
I have no shame to accept the fact that PSBs are far below in customer service standards in banking. Data and reports may differ but it's an outcome of my banking experience.

You may get a clue n a way to act on for the survival of PSB status of (y)our bank n #StopPrivatisation
Even though after 1994, entry of big pvt banks in the banking, the PSBs have started to understand the essence of customer service but still there is a long way ahead..

It took time to realise d competition they have from pvt players to retain elite customers..

#SavePSB
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30 Aug
कुछ पन्ने बैंकर की डायरी से
बात सन 2016 की है महीना था नवंबर उस समय मेरी पोस्टिंग गुजरात के एक खूबसूरत शहर सूरत में थी। वो समय मुझे याद है की दीवाली और छठ जैसे महापर्व के बाद का था। चूंकि बिहार मेरा जन्मस्थल है तो ये दो पर्व पर हर साल घर आना एक नियम जैसा बन गया था। अब दीवाली के
पहले बिहार आना और छठ महापर्व के बाद बिहार से वापस जाना एक महायुद्ध जैसा होता है जो बिहार से बाहर रहने वाले हर शक्स को अच्छे से पता होता है। मेरी छुट्टियां स्वीकृत थी और तय समयनुसार टिकट भी करा रखा था।
8 नवंबर 2016 शाम 8 बजे हमारे प्रधानमंत्री जी ने एक घोषणा करी के आज रात 12 बजे के बाद 500 और 1000 के नोट लीगल टेंडर नहीं रहेंगे। पूरे देश में अफरा तफरी का ऐसा माहौल बन गया जो मुझे सन1984 में इंदिरा जी की हत्या के बाद के माहौल की अनायास ही याद दिला गया। सरकार के पास इस नीति के सफल
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29 Aug
बैंक के दो अधिकारी करेंसी चेस्ट के अंदर बैठे है. अंदर से ग्रिल लगा है. दूसरा कोई नहीं है. दोनों के चेहरे से लग रहा है की कुछ ऐसी बात है जो ये दोनों अधिकारी सिर्फ आपस में हीं share कर सकते हैं. सिर्फ पंखे की आवाज़ गुंज रही है, उस सन्नाटे में. दोनों के चेहरे पर
पसीने की बूंदें दिखाई दे रही है.पंखे की हवा का कोई असर नहीं है. रात के 9.30 बजे हैं. बैंक के सारे लोग जा चुके हैं. सिर्फ कैश डिपार्टमेंट में काम करने वाले कुछ स्टाफ बाहर बैठकर इन दोनों joint कस्टुडिअन के बाहर निकलने का इन्तजार कर रहें हैं.

पाण्डेय साहेब हमलोग तीन बार
पुरा चेस्ट वेरीफाई कर लिए लेकिन 5 लाख रूपये का कहीं पता नहीं चला. आखिर क्या किया जाय. मैंने ये बात कैश ऑफिसर श्री बी बी पाण्डेय को कही. वे बोले की लगता है की हमलोगों को 5 लाख का इंतजाम करना हीं पड़ेगा. ये घटना मेरे ब्रांच की है. मैं वहां 1995 में अकाउंटेंट के
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29 Aug
Friends,
As it is said by Noam Chomsky 'If we don't believe in freedom of expression for people we
despise, we don't believe in it at all.'
Before going forward we would like to show our gratitude towards all the love and unconditional support of you all..
1/n
which have been showered upon us in this journey so far.

As all of us know that we are living in a democratic country and by the virtue of its Constitution every one of us have a Right To Express our agreement or disagreement on any issue/topic without the thinking..

2/n
of being judged.
It's always been a tradition that a banker carries a diary. And in old times that diary contained
more emotions than to do list or appointments. But in this journey to evolve we have
somehow lost the expression of emotions part and...

3/n
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