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Oct 1 9 tweets 2 min read
नवरात्रि में क्यों बोये जाते हैं जौ
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नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा करने का विधान है। शक्ति स्वरूपा मां भगवती की विधिवत पूजा करने के साथ कलश की स्थापना की जाती है। स्थापना के समय कलश के चारों ओर जौ बोने की परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर जौ क्यों बौएं जाते हैं और इनके रंगों के हिसाब से क्या संकेत मिलते है। आइए जानते हैं

1. नवरात्रि में कलश के सामने एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी में जौ या गेहूं को बोया जाता है और इसका पूजन भी किया जाता है। बाद में 9 दिनों में जब ज्वारे उगाते हैं
Sep 30 6 tweets 2 min read
𝗠𝗮𝗮 𝗸𝗮𝘁𝘆𝗮𝘆𝗮𝗻𝗶

Maa Katyayani is worshipped on the sixth day of Navratri. Maa Parvati took this form to kill the demon Mahishasura.This form is considered quite violent and hence, Maa Katyayani is also known as the warrior goddess.

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः🚩🙏🙏 Katyayani Maa rides a majestic lion. She is depicted with 4 arms, where the left 2 arms carry lotus & a sword, and right 2 arms stay in Varada & Abhaya Mudras. The Goddess is draped in a red attire.
Sep 30 13 tweets 3 min read
9 देवी के 9 खास भोग/प्रसाद और उनका महत्व
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नवरात्रि के नौ दिनों में जो भी भक्त सच्चे मन से मां भगवती की पूजा आराधना कर भोग लगाता है उसे मां स्वीकार करती है परंतु नवरात्रि के 9 दिनों में अलग-अलग तरह के भोग लगाने का विधान है क्या है 9 तरह के भोग व उसका महत्व

मां शैलपुत्री का भोग
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नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से सभी व्याधियां और रोग दूर हो जाते हैं
Sep 30 8 tweets 2 min read
𝗠𝗮𝗮 𝗦𝗸𝗮𝗻𝗱𝗺𝗮𝘁𝗮

Skandmata Mata is worshipped on the fifth day of Navratri. Her name means: ‘Skanda’ - Lord Kartikeya and ‘Mata’ - mother. Hence, this name means that she is the mother of the Skanda (Lord Karthikeya).

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः 🚩🙏🙏 Maa Skandmata has four arms and she rides on a lion. 2 of her arms carry lotus, 1 arm carry baby Kartikeya, and another one stays in the Abhaya Mudra. As she sits on the lotus, Goddess Padmasana is her another name.
Sep 29 15 tweets 5 min read
नवरात्रि के 9 रंग व उनका महत्व :
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नवरात्रि शुरू हो चुकी है और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है।शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के हर दिन एक विशेष-रंग पर आधारित है, जिसका इस्तेमाल कर आप नवरात्रि मे माँ की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं. नवरात्रि की तारीख व संबंधित रंग
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1) घटस्थापना/प्रतिपदा, दिन 1 - 26 सितंबर, (सोमवार)
दिन का नवरात्रि रंग - सफेद
चूंकि प्रतिपदा का यह दिन सोमवार को पड़ता है, सफेद पोशाक पहनें। सफेद रंग हमेशा के लिए शाश्वत शांति का निर्मल प्रतीक है।
Sep 29 5 tweets 1 min read
𝗠𝗮𝗮 𝗞𝘂𝘀𝗵𝗺𝗮𝗻𝗱𝗮

Kushmanda Maa is worshipped on the fourth day of Navratri. Kushmanda is a Sanskrit name, which means: Ku- small,Ushma - energy, Anda -egg. This form of Maa Parvati blesses her devotees with health,wealth & strength.

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः 🚩🙏🙏 Maa Kushmanda has 8 arms carrying Chakra (a weapon like discus), sword, Gada (mace), bow, arrow, Amrit Kalash (jar of the elixir of life), Kamandal (stoup), and lotus. Due to her 8 arms, she is also known as Ashtabhuja Devi. She rides a lioness.
Sep 28 11 tweets 3 min read
क्यों रखे जाते हैं नवरात्र पर व्रत/उपवास
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नवरात्र में विधि-विधान से माता की पूजा के साथ व्रत भी रखा जाता है। कुछ लोग पहले दिन और अष्टमी के दिन उपवास रखते हैं तो वहीं कुछ लोग पूरे 9 दिन का उपवास करके मां दुर्गा की आराधना करते हैं। ImageImage पर क्या आप जानते हैं नवरात्र में व्रत रखने के पीछे क्या वजह है
नवरात्र में देवी पूजन करने का विधान है। व्रत-उपवास भी इसके ही अंतर्गत आता है। मान्यता है कि नवरात्र रखे जाने वाले यह व्रत हमारी आत्मा की शुद्धता के लिए होते हैं।
Sep 28 9 tweets 2 min read
𝗠𝗮𝗮 𝗖𝗵𝗮𝗻𝗱𝗿𝗮𝗴𝗵𝗮𝗻𝘁𝗮

Maa Chandraghanta is worshipped on the third day of Navratri. Her name means: ‘Chandra’the Moon, ‘Ghanta’-hanging like bell. When Goddess Parvati adorned her forehead with the crescent Moon she got this name.

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः🚩🙏🙏 She is also known as Chandrakhanda. This form of Goddess gives courage and valor to the worshippers. She also takes away the problems related to the paranormal as well. Goddess Chandraghanta is the fierce form Parvati.
Sep 27 10 tweets 2 min read
𝗧𝗵𝗲 𝟭𝟬 𝘄𝗲𝗮𝗽𝗼𝗻𝘀 𝗼𝗳 𝗠𝗮𝗮 𝗗𝘂𝗿𝗴𝗮 & 𝗶𝘁𝘀 𝗦𝗶𝗴𝗻𝗶𝗳𝗶𝗰𝗮𝗻𝗰𝗲

Maa Durga is ferocious to the demons and at the same time highly kind to her devotees.

The ten arms of Maa Durga symbolize that she protects her devotees

जय माँ दुर्गा 🚩🙏🙏 Foom all directions namely the eight corners and from the sky and the earth.

The ten hands of Lord Durga hold in them a conch, discuss, lotus, sword, bow with arrow, trishul, mace, thunderbolt, snake and flame.
Sep 26 9 tweets 2 min read
𝗠𝗮𝗮 𝗕𝗿𝗮𝗵𝗺𝗮𝗰𝗵𝗮𝗿𝗶𝗻𝗶

Maa Brahmacharini is worshipped on the second day of Navratri. She is considered as the unmarried form of Goddess Parvati.

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः🚩🙏🙏 Brahamacharini is the Sanskrit term which means: Brahma, the absolute reality, the supreme consciousness + Charini, the female version of 'Charya', which means the one who behaves or conducts.
Sep 26 14 tweets 3 min read
कलश/घट स्थापना का महत्व ::
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आज से माता रानी के पवित्र नवरात्रों की शुरुआत हो गई है और ज्यादातर घरों में माता रानी का कलश स्थापना कर माता का आवाहन किया जाएगा और 9 दिनों तक माता की आराधना की जाएगी. मगर क्या है कलश स्थापना का महत्व आइए जानते हैं हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले कलश स्थापना करने का विधान रहा है। शास्त्रों में कलश को गणेशजी का प्रतीक बताया गया है और कलश स्थापना करने से पूजा का शुभ और मंगल फल मिलता है। बिना कलश स्थापना के कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता है
Sep 26 6 tweets 1 min read
𝗠𝗮𝗮 𝗦𝗵𝗮𝗶𝗹𝗽𝘂𝘁𝗿𝗶

The first day of Navratri is dedicated to Maa Shailputri. 'Shail' stands for mountain and 'putri' stands for daughter, meaning the daughter of Mountain.

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः 🚩🙏🙏 She is also called Parvati who is consort of God Shiva/ Mahesh (the god of destructive forces), mother of Ganesha and Kartikeya, and the daughter of the King of the mountains, Himavan. In this form, she appears with two hands with trident in right hand and lotus in left;
Sep 25 9 tweets 2 min read
सर्वपितृ अमावस्या
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आज 25 सितंबर 2022 को सर्वपितृ अमावस्या है और इस तिथि पर पितरों को तर्पण और श्राद्ध देते हुए  विदाई की जाती है। पितृपक्ष के दौरान 16 दिनों तक पितरदेव स्वर्ग लोक से अपने परिजनों के बीच आते हैं और श्रद्धा पूर्वक भोजन ग्रहण कर तृप्ति होते है। Image सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध पक्ष की आखिरी तिथि होती है। शास्त्रों में इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या या मोक्षदायिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि पर ज्ञात,अज्ञात सभी पितरों के श्राद्ध का विधान है,जिन लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि याद नहीं होती है
Jun 28 17 tweets 6 min read
𝐓𝐡𝐞 𝐝𝐢𝐟𝐟𝐞𝐫𝐞𝐧𝐜𝐞 𝐛𝐞𝐭𝐰𝐞𝐞𝐧 𝐌𝐚𝐧𝐭𝐫𝐚, 𝐘𝐚𝐧𝐭𝐫𝐚 𝐚𝐧𝐝 𝐓𝐚𝐧𝐭𝐫𝐚

Mantra refers to a combination of words that is chanted in a particular order; it is believed that on chanting these mantras, the desired results can be achieved. Yantra refers to device that are used for balancing of mind. Tantra defines rituals and meditation acts that can be used to get the freedom from uncontrollably recurring problems.

Yantra, mantra and tantra are all Sanskrit words and each defines a different element.
Jun 27 5 tweets 3 min read
𝗢𝗿𝘁𝗵𝗼𝗽𝗲𝗱𝗶𝗰 𝗛𝗮𝗻𝘂𝗺𝗮𝗻 𝗧𝗲𝗺𝗽𝗹𝗲, 𝗞𝗮𝘁𝗻𝗶,𝗠𝗣

This miraculous temple dedicated to Lord Hanuman. It is situated in Mohas village,35 km from Katni dist of MP.

नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा

जय हनुमान 🚩🙏🙏 The Temple is highly revered and famous as devotees with fractured bones are miraculously healed here with the blessings of Sankat Mochan Hanuman ji.
It is said that the broken bones of anyone who visits this temple are fixed magically by the grace of Hanuman ji.
Jun 27 20 tweets 8 min read
𝟐𝟏 𝐈𝐦𝐩𝐨𝐫𝐭𝐚𝐧𝐭 𝐋𝐢𝐟𝐞 𝐋𝐞𝐬𝐬𝐨𝐧𝐬 𝐖𝐡𝐢𝐜𝐡 𝐈𝐬 𝐁𝐞𝐥𝐢𝐞𝐯𝐞𝐝 𝐓𝐨 𝐁𝐞 𝐆𝐢𝐯𝐞𝐧 𝐁𝐲 𝐁𝐡𝐢𝐬𝐡𝐦𝐚 𝐏𝐢𝐭𝐚𝐦𝐚𝐡 𝐅𝐫𝐨𝐦 𝐃𝐞𝐚𝐭𝐡 𝐁𝐞𝐝

The son of Kuru King Shantanu and goddess Ganga, gives some profoundly important lessons to learn from life. These learning are not only based on one’s own experiencebut also preachings of a great mind.

1. All human beings should have nine qualifications, and these are:

i. To be simple.
ii. To be hygienic where the body is concerned and pure where the mind is concerned.
Jun 27 5 tweets 5 min read
𝗦𝗶𝗱𝗱𝗵𝗲𝘀𝘃𝗮𝗿𝗮 𝗧𝗲𝗺𝗽𝗹𝗲, 𝗕𝗮𝗿𝗮𝗸𝗮𝗿, 𝗪𝗲𝘀𝘁 𝗕𝗲𝗻𝗴𝗮𝗹

Siddheshwara Mahadev Temple is the oldest among the Begunia group of Temple's and dates back to 8th century. The ‘lingam’ here is called the Siddheshwara Lingam.

ॐ नमः शिवाय 🚩🙏🙏 A shivalinga of 55 inches in diameter, is worshiped here.
At the top of the four corners of the shikhara are four animal figurines, facing outward. They strongly resemble four lions facing the four corners is something we see top of the Kailsa Temple in Ellora as well.
Jun 25 11 tweets 3 min read
सूर्यदेव के 12 शक्तिशाली मंत्र

हिंदू धर्म में सूर्य की अराधना का विशेष महत्व है. सूर्यदेव एक ऐसे देवता हैं जो नियमित रूप से भक्तों को दर्शन देते हैं.मान्यता है कि सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए किसी बड़े अनुष्ठान या खास पूजा की जरूरत नहीं पड़ती.

ॐ सूर्याय नमः 🚩🙏🙏 सूर्य देव को सिर्फ एक लोटा जल और उनके मंत्रों के जाप से ही उनका आशीर्वाद पाया जा सकता है.

इतना ही नहीं, मान्यता है कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्यदेव मजबूत हैं तो उन्हें शुभ फल प्रदान करते हैं. साथ ही, समाज में खूब यश, सम्मान की प्राप्ति होती है.
Jun 25 14 tweets 5 min read
संकटमोचन हनुमान से जुड़ी कुछ रोचक तथ्य :-

1. मारुती है असली नाम

हनुमान भगवान का असली नाम मारुती है. लेकिन जब बचपन में उन्होंने सूर्य को निगल लिया था तब इंद्र ने वज्र से उनकी ठुड्डी पर प्रहार किया था. इसके बाद उनका जबड़ा बिगड़ गया. तब से उनका नाम हनुमान रख दिया गया. संस्कृत में हनु का मतलब जबड़ा होता है.
Jun 25 5 tweets 1 min read
𝗦𝗵𝗿𝗶 𝗕𝗮𝗸𝘁𝗵𝗮 𝗔𝗮𝗻𝗷𝗮𝗻𝗲𝘆𝗮𝗿 𝗧𝗲𝗺𝗽𝗹𝗲, 𝗗𝗶𝗻𝗱𝗶𝗴𝘂𝗹,𝗧𝗮𝗺𝗶𝗹𝗡𝗮𝗱𝘂

Shri Bhaktha Anjaneyar Temple is situated in Periyakulam Village,on the way to Dindigul-Theni road, 16 km away from Theni,TN.

जय श्रीराम🚩
जय हनुमान🚩 The Temple was called as Tulasi Garden. Inside the shrine, Shri Bhaktha Anjaneyar is installed with a big Gada on his left hand with a graceful look. This Gada is Shri Bhaktha Anjaneyar’s weapon to destroy the sins and calamities from the world.
Jun 24 8 tweets 2 min read
⚛: 🎀 योगिनी एकादशी 🎀 :⚛

प्रतिवर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। आज योगिनी एकादशी है. इस दिन भगवान श्री विष्णु की पूजा-आराधना की जाती है.इस एकादशी का व्रत करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं

जय श्री हरि विष्णु 🚩🙏 और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. योगिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन में समृद्धि और आनन्द की प्राप्ति होती है. यह व्रत तीनों लोकों में प्रसिद्ध है. यह एकादशी देह की समस्त आधि-व्याधियों को नष्ट करने के साथ गुण और यश को बढ़ाती है.