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मुल्क भर की मसाजिद के मौजूदा मौज़्ज़िन तब्दील करके दिलकश आवाज़ो वाले मौज़्ज़िन तय कर दिये गए है। तमाम मसाजिद को इस्लामी म्यूज़ियम के तौर पर पेश किया जाएगा जहां किसी भी वक्त कोई भी आकर मालूमात ले सकेंगा।

जब जनाज़ा पढ़ने का वक्त आया तो एक आदमी आगे बढ़ा और कहने लगा मैं ख्वाजा कुतुबुद्दीन र.अ का वकील हूं। मुझे हज़रत ने एक वसीयत दी थी मैं मजमे तक वो वसीयत पहुंचाना चाहता हूं मजमे पर सन्नाटा छा गया। वकील ने पुकार कर कहा हज़रत ख्वाजा कुतुबुद्दीन र.अ ने ये वसीयत की,,
तालीम हासिल करने के लिए इनकी वालेदा ने इन्हें स्कूल में दाखिल करवाना चाहा तो बहुत से स्कूलों ने इंकार कर दिया थक हार कर जिस आखिरी स्कूल में दाखिला लेने में कामयाब हुए। वहां गानीम के हैंडीकैप होने की वजह से बच्चे उनके साथ खेलने से कतराते थे।