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पूजा संध्या समय (गौधूलि) की जाती है, इसलिए धन त्रयोदशी का त्यौहार १० नवंबर को ही मनाया जायेगा।
अब ये माया किस रूप में आपके पीछे पड़ी है ये आपकी लग्न कुंडली से जानते हैं। और किस रूप (ग्रह) में आएगी, ये आपके पास ये इस माया की ग्रह युति बताएगी।
वह महान पुण्यदायी, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, सब पापों को हरनेवाली तथा उत्तम व्रत है।
•पञ्च तत्व तो आप जानते ही हैं (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और अंतरिक्ष) -
•आसन और शरीर शुद्धि मंत्र -
The most important thing is Belief (faith). And Devotion is faith. Devotion to your favorite Deity/Lord/Gurus.
वैसे ही जो व्यक्ति बदलते नहीं हैं वे बिखर जाते हैं। बदलाव आवश्यक है, आपकी निरंतर सफलता और ज्ञान की वृद्धि के लिए।
इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है।