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The sun's movement from Rahu to Saturn(R) in the coming weeks suggests emotional public seeking answers from leaders with domestic criticism and hidden challenges.
भारतीय संस्कृति की चार आधारशिलाएं गायत्री, गीता, गंगा और गौ हैं. इनमें गायत्री का स्थान सर्वोपरि है.| हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में गायत्री मंत्र का विशेष महत्व है। समस्त वेदों की उत्पति माता गायत्री के द्वारा मानी जाती है।
सातवां भाव ही बताता है कि जीवनसाथी का स्वभाव कैसा होगा, जीवनसाथीके साथ जातक का स्वभाव कैसा होगा
https://twitter.com/vinod_bansal/status/1331867317865566208धर्म आचरण वाले विभीषण को अपनी ओर मिलाया और उसके वंश का नाश करने के बाद रावण को मार दिया । तो इससे हम क्या सीखे?
कुंडली मैं बाधकेश शांत करें और प्रणाम करें। यह बाधा हमारे पूर्व जन्म के संचित दोषकर्मों का फल है। आपके बाधकेश गृह इस लेख से अवगत करें
लग्न का स्वामी किस राशि मैं है? मित्र राशि, सम राशि, शत्रु राशि, उच्च का या नीच का किसके साथ युति अथवा उसको कौन देख रहा है।
* सप्तमेश शुक्र उच्च का होकर द्वादश भाव में हो तो जन्म स्थान से दूर विवाह होगा, लेकिन पति सुंदर होगा।
दृतीय भाव- द्वितीय भाव में वक्री शुक्र होने पर जातक को कामुक और विलासी बनाता है। साथ ही भोग विलासता के साथ जीवन जीने की इच्छा भी पैदा करता है जिसकी वजह से वह गलत राह भी पकड़ लेता है। वक्री शुक्र की वजह से जातक दिखावा बहुत करते हैं और दिखावे की वजह से धन भी बहुत खर्च करते हैं।
शुक्र शुभ ग्रह होकर भोग और विलास का कारक ग्रह है और इस पृथ्वी पर जातक पांच कर्मेंद्रियों और पांच ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से सुखोपभोग करता है अर्थात जातक को कब, कितनी मात्रा में किस प्रकार का सुख उपलब्ध होगा, इसका निर्णय शुक्र की स्थिति देखकर किया जाता है।
प्रथम भाव-बृहस्पति वक्री हो तो व्यक्ति विद्वान और विशेष पूजनीय होता है। स्वस्थ और सुंदर शरीर होता है। सार्वजनिक जीवन में बहुत सम्मान प्राप्त करता है, लेकिन दूसरी ओर कई मामलों में सही न्याय करने से चूक जाता है। अपने प्रिय के प्रति पक्षपाती हो जाता है।
(2) मंगल शुक्र के नवांश में तथा शुक्र मंगल के नवांश में हो।
इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा।जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा।
*राहु का शरीर नहीं है सिर्फ सर है इसलिए यह हमें मानसिक तड़प देता है उसी प्रकार केतु का सर नहीं है शरीर है इसलिए वह हमें शारीरिक तड़प देता है lचाहे वह तड़प जिस रूप में पैदा करें l मान लीजिए कि राहु द्वितीय भाव में है तो वह धन के लिए मानसिक रूप से तड़प पैदा करेगा l
6. राहू वह मित्र है जो पीठ पीछे आपकी निंदा करता है।
The paintings from Rāmāyaṇa Mahābhārata yuddha (War), the paintings depicting khaḍga (Weapon), and the paintings related to indrajāla (sorcery or weapon of Arjuna) or of the Mountains surrounded by dense forests, devils, ferocious looking people.
चौथे भाव में : घर में एवं प्रवेशद्धार पर मोरपंख, वास्तु दोष का भी निवारण होता है इस से।
पांचवे भाव में : Cat Eye या लहसुनिया को कच्चे दूध में धोकर अपने पास रखें।
माना जाता है कि घोड़े पर आने से पड़ोसी देशों से युद्ध, सत्ता में उथल-पुथल के साथ ही रोग और शोक फैलता है. बता दें कि इस बार मां भैंस पर विदा हो रही है. इसे भी शुभ नहीं माना जाता है. शारदीय नवरात्रि मां नवदुर्गा जी की उपासना का पर्व है.