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भगवान शिव ने देवी पार्वती को 5 ऐसी बातें बताई थीं जो हर मनुष्य के लिए उपयोगी हैं, जिन्हें जानकर उनका पालन हर किसी को करना ही चाहिए-
शायद भारत के सिवा और कहीं भी मस्तक पर तिलक
घर-परिवार का सुरक्षात्मक आवरण समाप्त हो जाने से अनेकानेक समस्याएं अनायास घेर रही हैं, नकारात्मक ऊर्जाओं की आवाजाही बिना रोक-टोक हो रही है, वर्षों से स्थान परिवर्तन के कारण पता ही नहीं है कि हमारे कुलदेवता व कुल देवी कौन है कैसे उनकी पूजा होती है कब उनकी पूजा होती है आदि।
शारीरिक लाभ
इनकी सन्तति में माना की पुत्र हुआ (xy गुणसूत्र). इस पुत्र में y गुणसूत्र पिता से ही आया यह तो निश्चित ही है क्यू की माता में तो y गुणसूत्र होता ही नही।
गणेश जी के हाथी जैसे मस्तक और सूंड का न केवल शारीरिक कारण है, बल्कि यह आध्यात्मिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक संदेश भी देता है।
ब्रह्म लोक पहुंचकर उन्होंने ने अपने पूज्य पिता ब्र्ह्मा जी को दण्डवत प्रणाम किया। नारद को समाने देख ब्र्ह्मा जी ने पूछा कहो पुत्र ! आज कैसे आना हुआ ? तुम्हारे मुख के भाव कुछ कह रहे है ! कोई विशेष प्रयोजन अथवा कोई समस्या ?
इस परंपरा को मान-सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। इस परंपरा का पालन आज भी काफी लोग करते हैं। चरण स्पर्श करने से धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों तरह के लाभ प्राप्त होते हैं।
चाहे वह किसी भी जाति, प्रांत या संप्रदाय से हो वह गायत्री दीक्षा लेकर ब्राह्मण बन सकता है, लेकिन ब्राह्मण होने के लिए कुछ नियमों का पालन करना होता है। हम उस ब्राह्मण समाज की बात नहीं कर रहे हैं
2- यह श्वसन दर घट जाती है।
सनातन धर्म वास्तव में प्रकृति के विभिन्न रूपों की पूजा करने की शिक्षा देता है जो अन्य किसी धर्म में नहीं है। इसलिए हम सनातन धर्म को विज्ञान पर आधारित धर्म कहते है। अतः प्रस्तुत है वह कारण जिनसे पता चलता है कि हमारी परम्पराएँ व हमारा धर्म पूर्णत: विज्ञान पर आधारित है जिसमे अवैज्ञानिक कुछ नहीं है।
"पौराणिक कथाओं" में से एक "समुद्र मंथन" में हमें एक जिक्र मिलता है, मंथन से जो 14 दिव्य रत्न प्राप्त हुए थे वो :
आजकल तो लोग मंदिर की पैड़ी पर बैठकर अपने घर की व्यापार की, राजनीति की चर्चा करते हैं, परंतु यह प्राचीन परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई थी, वास्तव में मंदिर की पैड़ी पर बैठ कर हमें एक श्लोक बोलना चाहिए।
उस वक्त तो हम आपकी आज्ञा का पालन कर रहे होते हैं. हमें किसी पर दया कैसे आ सकती है?” यमराज ने फिर पूछा – “संकोच मत करो और यदि कभी तुम्हारा दिल पसीजा हो तो बेझिझक होकर कहो” तब यमदूतों ने कहा सचमुच एक घटना ऎसी है