सभापति मिश्र Profile picture
नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमे
Badal  Saraswat Profile picture मनोजकुमार मिश्रा Profile picture 2 added to My Authors
10 Sep
#धर्म_चर्चा
नेटवर्क खराब हो गया है आज इसलिए पता नहीं कि उत्तर अपलोड हो सकेगा कि नहीं। इसलिए संक्षिप्त उत्तर दे रहा हूं।
यह प्रश्न सबको मथता है कि आखिर शिव पार्वती ने अपने
विवाह में अपने पुत्र की अग्रपूजा कैसे कर लिया। यही प्रश्न मेरे गांव देश के लोग भी पूछते
रहते हैं। यद्यपि मैं कोई शास्त्री आचार्य या बड़ा विद्वान हूं और न ही मैं कोई गुरू पुरोहित हूं। साधारण सा अध्यापक ही रहा। फिर भी अध्यात्म की ओर रुचि रही और
थोड़ा बहुत जानता हूं। उत्तर देखिए
सबसे पहले तो यह भ्रम ही दूर कर लीजिए कि शिवजी ने किसी गणेश की पूजा किया
था। रामायण में तुलसी दास जी ने
गनपतिहि शब्द का प्रयोग किया है न कि गणेश का। यह गणपति एक
वैदिक देवता हैं। यहां तक कि शिवजी से भी प्राचीन। ऋग्वेद में
रुद्र शब्द आया है न कि शिवजी का पर गणपति या ब्रह्मणपति के नाम की कई ऋचाएं मिलती हैं।बाद के
पौराणिक या कहें कि
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10 Sep
आइए जानते हैं इतिहास की उन कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में जिसने भारत का भाग्य बदल कर उसे अंधकार में धकेल दिया।
१- सन् ७११ में सिंध के राजा दाहिर पर अरब आक्रांता मुहम्मद बिन कासिम का आक्रमण। इसमें राज
दाहिर की हार हुई और सिंध अरबों के हाथ चला गया। यही नहीं बल्कि
इसके कुछ भयानक दुष्परिणाम हुए। भारत में राष्ट्रीय भावना का मुस्लिम आक्रांताओं को पता चल गया। इस हार को रोका जा सकता था अगर वल्लभी के शालिवाहन
मैत्रक और मेवाड़ के मानसिंह मौर्य सहायता किया होता।राजा दाहिर ने सबसे सहयोग मांगा था पर किसी ने नहीं दिया।
२- १००१ में महमूद गजनवी ने पेशावर के शाही राजा जयपाल पर हमला किया और हारकर राजा जयपाल को आत्म हत्या करना पड़ा।तब भी किसी ने सहयोग नहीं किया।
३- १००८ में महमूद गजनवी ने फिर जयपाल के पुत्र आनंद पाल पर हमला किया। इसमें कुछ कुछ
राजाओं ने सहयोग किया पर देश के भाग्य
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9 Sep
#धर्म_चर्चा
लगता है कि इस प्रश्न से लोग ऊब गए हैं। और हों भी क्यों नहीं? एक बार इस पर चर्चा हो चुकी है। यह तो कुछ लोग सौजन्यता वश संकोच के साथ शामिल हो रहे हैं पर मैं भी क्या करता। एक मित्र का आग्रह कि गणेशोत्सव पर गणेश जी की चर्चा होनी चाहिए ठुकरा न सका।
खैर
कोई बात नहीं है।जो भी आये सबका स्वागत है। यहां गणेश जी की पत्नियों ही नहीं सब पर प्रश्न था। गणेश जी के वृहत्तर परिवार में मां पार्वती पिता महादेव भाई कार्तिकेय आदि सभी से मतलब था। मूल प्रश्न का सबसे अच्छा और विस्तृत उत्तर भाई @Sunnyharsh44 ने दे दिया है और वही
मेरा भी उत्तर है। यह परिवार महान क्यों कहा जाता है इसे जानिए। यह
परिवार बहुत ही समन्वयवादी था। अब यही देखिए कि कितनी विसंगतियां हैं। कार्तिकेय जी का वाहन मयूर शिवजी के नाग का शत्रु है।नाग गणेश जी के वाहन चूहे का शत्रु है।आग का पानी से बैर है पर यहां तो दोनों
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8 Sep
#धर्म_चर्चा
आज का प्रश्न बस औपचारिक भर था क्योंकि इस पर चर्चा हो चुकी है और कुछ जिज्ञासु पाठकों ने लिख कर रख भी लिया होगा। फिर भी आप लोगों ने जिस उत्साह से भाग लिया वह प्रसंशनीय है।
@Sunnyharsh44
@ShashibalaRai6
@BhagwaSherni05
@ajayamar7 आदि ने विस्तार से
बता ही दिया है पर बिना मेरे उत्तर दिए आप संतुष्ट नहीं होंगे।मेरा उत्तर सुनने के पहले हम हिंदुओं के
पारिवारिक ढांचे पर ध्यान देना होगा। एक अघोषित नियम है कि बड़े कार्य के लिए परिवार के बड़े बेटे को बड़ा त्याग करना पड़ता है।
आपने बालीवुड की बलराज साहनी और नासिर
अभिनीत फिल्मों में बड़े भाई का
त्याग बलिदान अवश्य देखा होगा।
यहां भी कुछ वैसा ही हुआ है।
सतयुग के अंत तक उत्तर और दक्षिण भारत में एक अदृश्य दीवार
खिंची हुई थी। उत्तर के लोग उत्तर में और दक्षिण के लोग दक्षिण में
मगन रहते थे। परिणाम स्वरूप दक्षिणी भारत सभ्यता
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3 Sep
महाभारत युद्ध समाप्त हो गया था।
शरशैया पर लेटे हुए भीष्म चिंतामग्न थे। बार-बार पीछे घटी घटनाओं को याद कर रहे थे पर कोई सम्यक उत्तर नहीं मिल रहा
था।इसी समय एक शहद मिश्रित
ध्वनि कानों में पड़ी प्रणाम पितामह।मुंदी पलकें खुली और
किंचित हास्य से कहा आओ कृष्ण।
तुम्हारी ही प्रतीक्षा कर रहा था। मेरे मन में बहुत से प्रश्न हैं जिसका कोई
उत्तर नहीं मिल रहा था।तुम तो विष्णु के अवतार हो। तुम्हीं बता सकते हो। नहीं पितामह मैं कोई अवतारी नहीं बल्कि आप का पौत्र हूं। भीष्म ने कहा जीवन भर छलते रहे कन्हैया अब मृत्यु शैय्या पर पड़े
मुझे भी छल रहे हो? कृष्ण निकट आए और कान के पास जाकर कहा पूछिए पितामह क्या पूछना चाहते थे।
भीष्म- यही कि जो कुछ हुआ वह क्या ठीक था?
कृष्ण- क्या पितामह? क्या ठीक नहीं हुआ?
भीष्म- यही छल से कमर के नीचे गदा मारकर दुर्योधन की जंघा तोड़ना दुशासन की छाती फाड़कर भीम
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2 Sep
#धर्म_चर्चा
कल तो इस पूरे प्रश्न पत्र कोई
@BhagwaSherni05 ने लीक कर दिया था इसलिए मैंने सोचा कि आज कोई उत्तर देने आएगा। सभी यह कह देंगे कि कल ही नीलम ने इसका उत्तर दे दिया है पर नहीं आज तो कल से भी अधिक लोगों ने उत्तर दिया। आप सभी लोगों को धन्यवाद है। आज का
सबसे अच्छा और सबसे विस्तृत उत्तर @ajayamar7 ने दिया है।
इन्हीं का उत्तर पढ़ लीजिए और समझ लीजिए कि मेरा ही उत्तर है।
अच्छा प्रयास @gargee99887
ने भी किया है। बहन शशिबाला राय जिसके उत्तर की प्रसंशा कर दें उसे अपने को धन्य मानना चाहिए। यदि मैंने कुछ गलत कहा है तो
पूरी निर्ममता से मेरी भर्त्सना कर सकते हैं।इसका अधिकार आपको प्राप्त है।जैसा उत्तर मेरे विज्ञ पाठकों ने दिया है उसे दोहराकर सूर्य को दीपक दिखाना नहीं चाहता। हां आपके उत्तरों से प्रश्न पूछने का साहस अवश्य बढ़ गया है। अपनी ओर से कुछ न कहने भी संचालक के दायित्व से
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1 Sep
#धर्म_चर्चा
बहुत सरल सा सवाल था और आप सबको मालूम भी था इसलिए सबने सही-सही उत्तर दिया। वास्तव में इस प्रश्न का उद्देश्य श्रीकृष्ण की छोटी-छोटी बाल लीलाओं के विषय में याद दिलाना भर था और मैं इसमें सफल रहा। पूतना के बाद कंस ने तृणावर्त को ही भेजा था जो आंधी का रूप
धरकर श्रीकृष्ण को उड़ाकर ऊपर ले गया था। इसका इरादा ऊपर से गिराकर मार देने का था पर उसे मालूम नहीं था कि कृष्ण योगिराज परब्रह्म परमात्मा हैं। वह केवल नर लीला कर रहे हैं। अपनी गुरुणा
योग शक्ति से उन्होंने अपने शरीर को इतना भारी कर लिया कि उनके
शरीर से दबकर
तृणावर्त का अंत हो गया। वास्तव में जिन आठ राक्षसों को कृष्ण ने मारा वे सब पूर्व जन्म में राक्षस थे जो राम के हाथों मरने से बच गए थे।
उसी समय उन्होंने कहा था कि तुम लोगों का प्रायश्चित अभी पूरा नहीं हुआ है। इसलिए अगले जन्म में मैं तुम लोगों को अपने हाथों मारकर
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1 Sep
क्या आप गुजरात की लक्ष्मीबाई कही जाने वाली महारानी नायकी देवी को जानते हैं? नहीं? तो सुनिए वह गुजरात की राजमाता थी और पाटन उनकी राजधानी थी। पाटन को भी नहीं जानते हैं तो रानी की वाव का नाम तो सुना ही होगा। नीचे चित्र उसी का है। यह बावड़ी राजा भीमदेव सोलंकी की Image
की पत्नी रानी उदयमती ने बनवाया था। भीमदेव के पौत्र महाराज
जयसिंह सिद्धराज सोलंकी वंश के प्रतापी शासक थे। उनके निस्संतान
मरने के बाद उनके भतीजे इतिहास प्रसिद्ध राजा कुमारपाल को गद्दी मिली। इन्होंने अपने वंश की उज्ज्वल कीर्ति का विस्तार किया।
प्रबंध चिंतामणि के
हेमप्रभ सूरि इनके दरबारी कवि थे
प्रसिद्ध दिलवाड़ा जैन मंदिर इन्हीं के प्रधानमंत्री विमल शाह ने बनवाया था। कुमारपाल के हुए अजयपाल। इन्हीं अजयपाल की पत्नी थीं रानी नायकी देवी।उस समय मुहम्मद गोरी के आक्रमण शुरू हो गये थे।इसी समय राजा अजयपाल की धोखे उनके अंगरक्षक
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31 Aug
#धर्म_चर्चा
मित्रों आज का प्रश्न बहुत रोचक रहा इसलिए बहुत से लोग उत्तर देते हुए इस चर्चा में शामिल हुए। सबसे पहले तो मैं अपने नए प्रतिभागियों को धन्यवाद देता हूं जो आज आये। इस प्रश्न को पूछने का एक विशेष उद्देश्य रहा। परसों @Manojkumar18877 ने एक बहुत अच्छा
लेख लिखा था इस ८ अंक के संयोग और महत्व पर। शायद मुझे लगा कि आप लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसीलिए प्रश्न करते समय ही मैंने मनोज को इंगित कर दिया था कि वह एक बार फिर यह अति महत्वपूर्ण जानकारी आपको दे सकें। आप लोगों ने बहुत अच्छा उत्तर दिया।बेटी नीलम ने इतना
विस्तार से बता दिया कि मुझे कुछ और कहने के शेष ही नहीं रहा। कोई और मित्र नाराज न हो मैं सबका नाम नहीं लिख पा रहा हूं।
भोजन में अगर चटनी न हो तो भोजन में आनंद नहीं आता। तो भाई रघुवीर जी भाई अरुणेश जी
टोंकाटोंकी करके उसी चटनी जैसा आनंद देते हैं। मैं मनोज कुमार
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25 Aug
तटस्थता। पढ़ने में यह शब्द जितना अच्छा लगता है उतना ही घातक है।
किसी को किसी के साथ अन्याय करते हुए देखकर भी तटस्थ रहना एक प्रकार से अन्याय का साथ देना ही है। इस पर पहले मैंने एक लेख लिखा था था। शायद आप भूल गए हों इसलिए पुनः लिख रहा हूं। कथा
महाभारत के १८वें
दिन की है।भीम के गदा प्रहार से
दुर्योधन की जंघा टूट चुकी थी।इतने में बलराम गरजते हुए पहुंचे और कहा भीम तुमने गदा युद्ध के नियम का उल्लंघन किया किया है। मैं तुम्हारा वध कर दूंगा कहकर अपना हल उठा लिया। श्रीकृष्ण आगे आ गये और पूछा कि बड़े भाई आपको यह अधिकार किसने
दिया कि आप भीम का वध करें?
तडककर बलराम ने क्यों नहीं कर सकता? भीम के अन्याय का दंड देना उचित है।
कृष्ण- भैया पहले यह बताओ कि इसके पहले कितने अन्याइयों को दंड दे चुके हैं?
बलराम- इससे क्या अंतर पड़ता है?
कृष्ण- अंतर पड़ता है भैया। किसी
तटस्थ व्यक्ति को किसी युद
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24 Aug
#धर्म_चर्चा
आज का प्रश्न जैसा कि मैंने कहा था छोटा सा था पर उत्तर विस्तार से आप लोगों ने दिया।इसके लिए बधाई है। कृष्ण चरित की महिमा या कुछ और कि आज बहुत से मित्रों ने उत्तर दिया। इसीलिए आज समय पूर्व उत्तर दे रहा हूं ताकि आपकी प्रतिक्रियाएं मिल सकें। अभी दो
कृष्ण भक्तिनों @gargee99887
@ShashibalaRai6
का उत्तर नहीं मिला है इसलिए प्रतीक्षा कर रहा था। तो जैसा कि आप सबने बताया है कि वसुदेव और नंद बाबा दोनों आपस में चचेरे भाई थे। शूरसेन और पर्जन्य सगे भाई थे। इनके पिता का नाम देवमणि था। पर्जन्य आरंभ से महावन में रहते
थे और गौपालन इनका मुख्य व्यवसाय था शूरसेन पहले मथुरा में ही रहते थे और बाद में बटेश्वर में उन्होंने अपना एक स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिया था पर कभी-कभी मथुरा के अंधक वंशी राजा के मंत्री का कार्य भी करते थे। शूरसेन के वसुदेव जी और पर्जन्य के पुत्र नंद बाबा थे।
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24 Aug
हम भारतीयों को अपने इतिहास अपनी संस्कृति को भूलने की बुरी आदत है।हम अपने नायकों को भूल जाते हैं पर इस विषय में फ्रांसीसी हमसे कहीं अधिक अच्छे हैं। फ्रांस और इंग्लैंड की शत्रुता बहुत पुरानी है। भले ही दोनों ईसाई
राष्ट्र घोषित हैं पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि
फ्रांसीसी जानते हुए भी इंग्लिश नहीं बोलता और न ही फ्रेंच भाषा में एक भी शब्द इंग्लिश का है। अन्य देशों में आम धारणा है कि ऐसा कि ऐसा फ्रांसीसी अपने सभ्य होने के अहंकार के कारण करते हैं पर ऐसा नहीं है। फ्रांसीसी वाटरलू के युद्ध में
नेटो बोनापार्ट की हार को नहीं
भूले और न ही इस बात को भूले कि उनके हीरो को किस प्रकार सेंट हेलेना द्वीप पर कैद करके संखिया देकर मार डाला गया था। वह तो भारत में डिंडिगुल के युद्ध में डुप्ले की हार को नहीं भूले। गंगा जमुनी तहजीब जैसे किसी कांसेप्ट को कभी स्वीकार नहीं किया और यूरोप में अपनी
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23 Aug
#धर्म_चर्चा
लगता है कि कृष्ण चर्चा में आप लोगों की रुचि नहीं है इसलिए बहुत कम लोग उत्तर देने आए पर कोई बात नहीं। अगर एक भी उत्तरदाता रहेगा तब तक यह चर्चा चलती रहेगी। आज इस प्रश्न का उत्तर कई लोगों ने बताया जैसे
@Sunnyharsh44
@ShashibalaRai6
@BhagwaSherni05
@Arunesh24797107 ने। पर सबसे अच्छा उत्तर बहन शशिबाला और सनी तथा भाई अरुणेश ने दिया।भाई अरुणेश ने तो बड़े
परिश्रम से लिखा है। यह विषय बहुत विशद है और इसका कोई एक दो कारण नहीं है।सनी ने दो कारण बताया है और शशिबाला राय ने आध्यात्मिक समीक्षा कर दिया। बेटी नीलम ने
उत्तर तो दिया पर विषयांतर कर दिया।इसका सबसे बड़ा कारण तो उन्होंने स्वयं ही गीता में बताया है।
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारते अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं
सृजाम्यहं।परित्राणाय साधुनाम्
विनाशाय च दुषकृताम्
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।
पर इसके और
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23 Aug
मित्रों आपसे एक प्रश्न- क्या आप और हम हिंदी लिखते बोलते हैं?
उत्तर- नहीं हम हिंदी न तो बोलते हैं और न ही लिखते हैं और न ही बोलते हैं।हम सब उस भाषा का प्रयोग करते हैं जिसे टकला चरखासुर हिंदुस्तानी कहता था
अर्थात हिंदी उर्दू की मिश्रित भाषा।
यह तो अच्छा हुआ कि
संविधान बनने के पहले गोडसे ने उसे ऊपर भेज दिया नहीं तो उसने कहा था कि संविधान में राजभाषा हिंदी न हो कर हिंदुस्तानी लिखा जाय। अगर वह जीवित रहता तो
देवनागरी लिपि को समाप्त कर के हिंदी को फारसी लिपि में लिखने के लिए अनशन कर देता। अतः अनुरोध है कि आप लोग अधिकतम
हिंदी शब्दों का प्रयोग करें। हमारी संस्कृति का घालमेल सबसे पहले
चौदहवीं शताब्दी में अमीर खुसरो ने किया था और बालीवुड के भांड़
नचनियों ने इसे और आगे बढ़ा दिया। स्मरण करिए कि आरम्भ में हिंदी सिनेमा में सारे संवाद उर्दू में लिखे जाते थे।हर फिल्म में एक कव्वाली
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22 Aug
#धर्म_चर्चा
बंधुओं क्षमा करना आज मेरे यहां रुद्राभिषेक और भोज का आयोजन किया गया है अतः मैं उत्तर नहीं दे पा रहा हूं। कुछ पल का समय निकालकर आप सबका उत्तर पढ़ा। बहुत अच्छा उत्तर दिया है आप सभी ने। मैं आप सबका बहुत आभारी हूं। अच्छा लगा कि आज बहुत से नये पुराने
मित्र चर्चा में भाग लेने आए। वैसे तो इसके विषय में अनेक कथाएं प्रचलित हैं पर सबका मूल स्रोत
देवगुरु बृहस्पति द्वारा बनाया गया
रक्षा सूत्र है जो उन्होंने इंद्राणी शची को दिया था देवराज इन्द्र की कलाई पर बांधने के लिए जब वह वृत्रासुर
से युद्ध करने जा रहे थे।बाद
में अनेक कथाएं प्रचलित हुईं।आज मैंने थोड़ा सा समय निकाल कर
हुमायूं और कर्मावती के झूठे प्रसंग की बखिया उधेड़ते हुए एक लेख लिखा है। अनुरोध है कि आप लोग उसे पढ़कर अपनी-अपनी राय दें।
उस पर बहुत से कमेंट आ रहे हैं ‌
अंत में सभी लोगों को धन्यवाद जिन्होंने इस चर्चा
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27 Jul
वैसे तो शिवलिंग की पूजा अर्चना पूरे वर्ष भर चलती रहती है पर सावन के महीने में इसका विशेष महत्व होता है। शिवजी को बेलपत्र
तो सबने चढ़ाया होगा या किसी को चढ़ाते हुए देखा होगा पर क्या आप जानते हैं कि यह क्यों चढ़ाया जाता है?न जानते हों तो अब जानिए। वैसे यह प्रश्न
एक भक्त महिला का था जिसका नाम याद नहीं है पर चलिए इसी बहाने आप सब भी जान लीजिए।
बेलपत्र को संस्कृत में बिल्व पत्र
कहते हैं।बेल का आयुर्वेद में बड़ा महत्व है और इससे अनेक औषधियां बनाई जाती हैं। इसमें एक साथ संयुक्त तीन पत्तियां होती हैं। इसके अनेक प्रतीक होते
हैं जो निम्नलिखित हैं
१- इसकी पत्तियां त्रिदेव अर्थात
ब्रह्मा विष्णु महेश का प्रतीक होती हैं।
२- तीन गुणों रज तम और सत का प्रतीक हैं
३- यह शिवजी के त्रिनेत्र (तीन आंखें) दो सामने और एक मस्तक पर का प्रतीक होती हैं।
४- बिल्व पत्र का आकार शिवजी के त्रिशूल की तरह
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26 Jul
#धर्म_चर्चा
यद्यपि आज के प्रश्न का भाई
@Sunnyharsh44 और बिटिया
@BhagwaSherni05
ने विस्तृत रूप से दे दिया है इसलिए डिटेल में लिखना जरूरी नहीं है।
आप केवल यह जान लीजिए कि
कुछ शिवलिंग स्वयंभू हैं अर्थात जिनकी स्थापना किसी व्यक्ति ने किया है और यह अपने आप प्रकट
हुए हैं उनमें से एक यह भी है। इसे
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग क्यों कहते हैं यह जानिए। ऊं शब्द ही परब्रम्ह है।
संगीत में इसे ही नाद ब्रह्म कहते हैं।
संसार की उत्पत्ति इसी ऊं शब्द से हुई है जिसे पाश्चात्य विद्वान बिग
बैंग थ्योरी कहते हैं। यह ज्योतिर्लिंग उन
ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो केदारनाथ से रामेश्वरम तक सीधी रेखा में पड़ता है। यों कहें कि यह भारत के मध्य में स्थित है।इसकी एक विशेषता बताना चाहता हूं कि यह ज्योतिर्लिंग दो भागों में विभाजित है। ओंकारेश्वर और
ममलेश्वर। एक पवित्र नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर
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26 Jul
आप जानते हैं कि सावन के महीने में शिवजी के पूजन का विशेष महत्व है और ऐसा इसलिए है कि कहते हैं इसी महीने में उन्होंने समुद्र मंथन से निकले विष का पान किया था। महायोगी तो थे ही इसलिए इस महाविष जिससे उस समय सारा संसार जलने लगा था पी तो लिया पर उसे गले के नीचे
नहीं जाने दिया। अविनाशी होने के कारण प्राण हानि तो नहीं हुई पर गला नीला पड़ गया। इसीलिए उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है। पर इसका एक दुष्प्रभाव यह पड़ा कि उनके शरीर का तापमान बढ़ने लगा।तब देवताओं ने उनके पानी डालना शुरू किया। जलाभिषेक की उत्पत्ति इसी से संबंधित है
यों तो शिवजी का जलाभिषेक जिसे
रुद्राभिषेक भी कहते हैं वर्ष में कभी भी किया जा सकता है पर सावन महीने में इसका विशेष महत्व है।
ईश्वर में आस्था रखने के लिए कोई भी धर्म बाधक नहीं होता बस सच्ची लगन और श्रृद्धा होनी चाहिए।इसी पर एक छोटी सी सत्यकथा सुनिए।
कथा शुरू
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25 Jul
चलिए आज आपको वृंदावन के प्रख्यात मंदिर पागल बाबा के संस्थापक स्वर्गीय लीलानंद ठाकुर के जीवन पर एक कथा सुनाते हैं।
मथुरा श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है और वृंदावन उनकी क्रीड़ास्थली है। यहीं पर नंद यशोदा के घर में उनका लालन-पालन हुआ था। वैसे तो
वृंदावन में पांच हजार ImageImage
से अधिक मंदिर हैं पर पागल बाबा में उनमें से एक प्रसिद्ध स्थल है। इस संदेश में एक कथा प्रचलित है।
इनका नाम लीलानंद ठाकुर था और यह मूल रूप से असम के निवासी थे। ब्रिटिश शासन में यह मथुरा के
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हुआ करते थे।
उस समय इनके यहां एक बहुत उलझा हुआ
मुकदमा पेश हुआ। हुआ यह था कि एक गरीब किसान श्रीकृष्ण के बड़े भक्त थे। वह दीन दुखियों और साधु-संतों की सेवा करते रहते थे।
एक बार उन्हें कुछ रूपयों की जरूरत पड़ी।वे एक सेठ के यहां गए और कुछ रूपए उधार मांग लाए इस शर्त पर कि जैसे-जैसे रूपया जुटता जाएगा मैं सूद समेत
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24 Jul
#धर्म_चर्चा
आज के प्रश्न का विस्तृत उत्तर
यद्यपि मित्रों
@Sunnyharsh44
@ShashibalaRai6
@annapurnaupadhy
@BhagwaSherni05
आदि ने दे दिया है। फिर भी कुछ मुझे कहना पड़ता है क्योंकि बिना मेरे उत्तर के आपको संतुष्टि नहीं मिलती है। यह बारहवां ज्योतिर्लिंग जिसे
घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग या घृष्णेश्वर
ज्योतिर्लिंग कहते हैं महाराष्ट्र के और में देवगिरी के पास वेरुल गांव में स्थित है। यह शिवलिंग ब्राह्मण सुधर्मा की पत्नी घुष्मा के पुत्र को पुनर्जीवित करने के लिए स्वयं प्रकट हुआ था जिसे उसकी विमाता सुमेधा ने मारकर निकट के
तालाब में फेंक दिया था।यह शिवलिंग बहुत पुराना है और मैं यहां दर्शन के लिए गया था।इसका
सर्वप्रथम जीर्णोद्धार शिवाजी के दादा मालोजीराव भोंसले ने कराया था। पुनः इसे तोड़ने का प्रयास औरंगजेब ने किया पर आंशिक रूप से ही सफल हो सका। अंत में इंदौर की धर्मपरायण महारानी
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20 Jul
आइए आज बताते हैं कि शिवजी ने ब्रह्मा विष्णु और अन्य देवताओं को
सत्यं शिवम् सुंदरम का अर्थ क्या बताया था। कहानी आरंभ होती है श्री विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्यावतार से। पहले बहुत संक्षेप में सुनिए मत्स्यावतार के विषय में।
सतयुग त्रेतायुग में भारत की केंद्रीय
सत्ता अयोध्या से संचालित होती रही। द्वापरयुग में यह हस्तिनापुर से होने लगी और वर्तमान कलयुग में दिल्ली से हो रही है। यह सृष्टि के प्रारंभ की कथा है। वैवस्वत मनु
एक बार सरयू नदी में स्नान कर रहे थे। सूर्य देव को अर्घ्य देते समय उनके अंजलि में एक मछली आ गई। राजा
को तब घोर आश्चर्य हुआ जब मछली ने मनुष्य की आवाज में कहा राजन मुझे बड़ी मछलियां बहुत तंग करती हैं ‌। आप मुझे घर ले चलिए और मेरी रक्षा करिए।
मनु महाराज मछली को घर लाए और एक छोटी सी हांडी में पानी भरकर रख दिया। दूसरे दिन मछली बढ़कर हांड़ी के बराबर हो गई राजा ने
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