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Nov 9, 2025 9 tweets 4 min read
इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..

कैसे पहचानें कि दैवीय शक्ति आपकी मदद कर रही है...?? अंत तक जरुर पढ़े...see more Image इन 11 संकेतों से कर सकते हैं आभास दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें उनके जीवन में दैवीय सहायता मिलती है। किसी को ज्यादा तो किसी को कम। कुछ तो ऐसे हैं जिनके माध्यम से दैवीय शक्तियां अच्छा काम करवाती हैं। सवाल यह उठता है कि आम व्यक्ति कैसे पहचानें कि उसकी दैवीय शक्तियां मदद कर रही है या उसकी पूजा-पाठ-प्रार्थना का असर हो रहा है? इन 11 संकेतों से हम इसको महसूस कर सकते हैं-
Nov 9, 2025 4 tweets 3 min read
शरीर की सभी नसों को खोलने का आयुर्वेदिक समाधान....

कपूर और नींबु कितने उपयोगी है...दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए, सिर के बाल से पैर की उंगली तक सारी नसें मुक्त होने का आपको स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा, आपके शरीर की नसें मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा। हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं...see moreImage ◾पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मणके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगी, पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा।

◾इस उपाये से बहुत से लोगों के लाखों रुपए बच सकते हैं। पैर में फटी एड़ियां और डैड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं और इसके पीछे जो विज्ञान और आयुर्वेद है.

◾यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू, ये दो चीजें चाहियें। इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें, जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो, उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें
Oct 4, 2025 5 tweets 3 min read
घटना 1880 के अक्टूबर नवम्बर की है बनारस की एक रामलीला मण्डली रामलीला खेलने तुलसी गांव आयी हुई थी... मण्डली में 22-24 कलाकार थे जो गांव के ही एक आदमी के यहाँ रुके थे वहीं सभी कलाकार रिहर्सल करते और खाना बनाते खाते थे...
पण्डित कृपाराम दूबे उस रामलीला मण्डली के निर्देशक थे और हारमोनियम पर बैठ के मंच संचालन करते थे और फौजदार शर्मा साज-सज्जा और राम लीला से जुड़ी अन्य व्यवस्था देखते थे..
👇👇👇Image एक दिन पूरी मण्डली बैठी थी और रिहर्सल चल रहा था तभी पण्डित कृपाराम दूबे ने फौजदार से कहा इस बार वो शिव धनुष हल्की और नरम लकड़ी की बनवाएं ताकि राम का पात्र निभा रहे 17 साल के युवक को परेशानी न हो पिछली बार धनुष तोड़ने में समय लग गया था...

इस बात पर फौजदार कुपित हो गए क्योंकि लीला की साज सज्जा और अन्य व्यवस्था वही देखता थे और पिछला धनुष भी उन्होंने ही बनवाया था... इस बात को लेकर पण्डित जी और फौजदार में कहा सुनी हो गई...फौजदार पण्डित जी से काफी नाराज थे और पंडित जी से बदला लेने का सोच लिया था ...
Oct 3, 2025 11 tweets 4 min read
9 सबूत जो साबित करते हैं कि रामायण कोई मिथक व झूठ नहीं, हमारा इतिहास है... Image 1. राम सेतु -
ऐसा माना जाता है कि धनुषकोडी वह स्थान है जहां भगवान राम ने वानर सेना को एक पुल बनाने के लिए कहा था जो उनकी सेना को लंका तक ले जा सके नासा की तस्वीरें और क्षेत्र में तैरते पत्थरों की मौजूदगी राम सेतु पुल के ऐतिहासिक अस्तित्व की ओर इशारा कर रही है Image
Sep 28, 2025 4 tweets 3 min read
तीन बाण, एक योद्धा और महाभारत का युद्ध समाप्त:
महाभारत काल का सबसे महान योद्धा कौन?

राजस्थान के सीकर जिले में श्री खाटू श्याम जी का सुप्रसिद्ध मंदिर है. वैसे तो खाटू श्याम बाबा के भक्तों की कोई गिनती नहीं लेकिन इनमें खासकर वैश्य, मारवाड़ी जैसे व्यवसायी वर्ग अधिक संख्या में है. श्याम बाबा कौन थे, उनके जन्म और जीवन चरित्र के बारे में जानते हैं इस लेख में.Image बर्बरीक बचपन में एक वीर और तेजस्वी बालक थे. बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण और अपनी माँ मौरवी से युद्धकला, कौशल सीखकर निपुणता प्राप्त कर ली थी. बर्बरीक ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, जिसके आशीर्वादस्वरुप भगवान ने शिव ने बर्बरीक को 3 चमत्कारी बाण प्रदान किए. इसी कारणवश बर्बरीक का नाम तीन बाणधारी के रूप में भी प्रसिद्ध है. भगवान अग्निदेव ने बर्बरीक को एक दिव्य धनुष दिया था, जिससे वो तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने में समर्थ थे.

जब कौरवों-पांडवों का युद्ध होने का सूचना बर्बरीक को मिली तो उन्होंने भी युद्ध में भाग लेने का निर्णय लिया. बर्बरीक अपनी माँ का आशीर्वाद लिए और उन्हें हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन देकर निकल पड़े. इसी वचन के कारण हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा यह बात प्रसिद्ध हुई.
Sep 16, 2025 6 tweets 3 min read
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गोत्र क्या है? तथा भारतीय सनातन आर्य परम्परा में इसका क्या सम्बंध है..?? अंत तक जरुर पढ़े🧵 Image भारतीय परम्परा के अनुसार विश्वामित्र, जमदग्रि, वसिष्ठ और कश्यप की सन्तान गोत्र कही गई है-

"गौतम, भरद्वाज, अत्रि,विश्वामित्रो जमदग्निर्भरद्वाजोऽथ गोतमः । अत्रिर्वसिष्ठः कश्यप इत्येते गोत्रकारकाः"

इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि किसी परिवार का जो आदि प्रवर्तक था, जिस महापुरुष से परिवार चला उसका नाम परिवार का गोत्र बन गया और उस परिवार के जो स्त्री-पुरुष थे वे आपस में भाई-बहिन माने गये, क्योंकि भाई बहिन की शादी अनुचित प्रतीत होती है, इसलिए एक गोत्र के लड़के-लड़कियों का परस्पर विवाह वर्जित माना गया।
Sep 16, 2025 5 tweets 7 min read
देवरहा बाबा का रहस्य...यह जानकार होश उड़ जायेंगे आपके..अंत तक जरुर पढें🧵 Image देवरहा बाबा का जन्म अज्ञात है। यहाँ तक कि उनकी सही उम्र का आकलन भी नहीं है। वह यूपी के देवरिया जिले के रहने वाले थे। मंगलवार, 19 जून सन् 1990 को योगिनी एकादशी के दिन अपना प्राण त्यागने वाले इस बाबा के जन्म के बारे में संशय है। कहा जाता है कि वह करीब 900 साल तक जिन्दा थे। (बाबा के संपूर्ण जीवन के बारे में अलग-अलग मत है, कुछ लोग उनका जीवन 250 साल तो कुछ लोग 500 साल मानते हैं.भारत के उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में एक योगी, सिद्ध महापुरुष एवं सन्तपुरुष थे देवरहा बाबा. डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद, महामना मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तमदास टंडन, जैसी विभूतियों ने पूज्य देवरहा बाबा के समय-समय पर दर्शन कर अपने को कृतार्थ अनुभव किया था. पूज्य महर्षि पातंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग में पारंगत थे।श्रद्धालुओं के कथनानुसार बाबा अपने पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से बड़े प्रेम से मिलते थे और सबको कुछ न कुछ प्रसाद अवश्य देते थे. प्रसाद देने के लिए बाबा अपना हाथ ऐसे ही मचान के खाली भाग में रखते थे और उनके हाथ में फल, मेवे या कुछ अन्य खाद्य पदार्थ आ जाते थे जबकि मचान पर ऐसी कोई भी वस्तु नहीं रहती थी। श्रद्धालुओं को कौतुहल होता था कि आखिर यह प्रसाद बाबा के हाथ में कहाँ से और कैसे आता है. जनश्रूति के मुताबिक, वह खेचरी मुद्रा की वजह से आवागमन से कहीं भी कभी भी चले जाते थे. उनके आस-पास उगने वाले बबूल के पेड़ों में कांटे नहीं होते थे. चारों तरफ सुंगध ही सुंगध होता था।लोगों में विश्वास है कि बाबा जल पर चलते भी थे और अपने किसी भी गंतव्य स्थान पर जाने के लिए उन्होंने कभी भी सवारी नहीं की और ना ही उन्हें कभी किसी सवारी से कहीं जाते हुए देखा गया. बाबा हर साल कुंभ के समय प्रयाग आते थे। मार्कण्डेय सिंह के मुताबिक, वह किसी महिला के गर्भ से नहीं बल्कि पानी से अवतरित हुए थे. यमुना के किनारे वृन्दावन में वह 30 मिनट तक पानी में बिना सांस लिए रह सकते थे. उनको जानवरों की भाषा समझ में आती थी। खतरनाक जंगली जानवारों को वह पल भर में काबू कर लेते थे।
Sep 15, 2025 14 tweets 3 min read
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9 महीने 9 दिन गर्भ में बच्चा क्यों रहता है..क्या है बच्चे को महान बनाने का वैज्ञानिक उपाय..?? अंत तक जरुर पढ़े🧵 Image लोग ज्योतिष पर बहुत कम विश्वास करते है क्योकि ज्योतिषियों ने ही ज्योतिष का विना श किया है उनके अधूरे ज्ञान के कारण ऐसा हुआ है। गर्भ मे बच्चा 9 महीने और 9 दिन ही क्यो रहता है। इसका एक वैज्ञानिक आधार है हमारे ब्रह्मांड के 9 ग्रह अपनी अपनी किरणों से गर्भ मे पल रहे बच्चे को विकसित करते हैं। हर ग्रह अपने स्वभाव के अनुरूप बच्चे के शरीर के भागों को विकसित करता है।अगर कोई ग्रह गर्भ मे पल रहे बच्चे के समय कमजोर है तो उपाय से उसको ठीक किया जा सकता है।
Sep 11, 2025 7 tweets 3 min read
एक बेटी ने एक संत से आग्रह किया कि वो हमारे घर आकर उसके बीमार पिता से मिलें, प्रार्थना करें। बेटी ने यह भी बताया कि उसके बुजुर्ग पिता पलंग से उठ भी नहीं सकते।

संत ने बेटी के आग्रह को स्वीकार किया।

कुछ समय बाद जब संत घर आए, तो उसके पिताजी पलंग पर दो तकियों पर सिर रखकर लेटे हुए थे और एक खाली कुर्सी पलंग के साथ पड़ी थी।Image संत ने सोचा कि शायद मेरे आने की वजह से यह कुर्सी यहां पहले से ही रख दी गई हो।

संत ने पूछा - मुझे लगता है कि आप मेरे ही आने की उम्मीद कर रहे थे, पिता- नहीं, आप कौन हैं?

संत ने अपना परिचय दिया और फिर कहा- मुझे यह खाली कुर्सी देखकर लगा कि आपको मेरे आने का आभास था।

पिता- ओह यह बात नहीं है, आपको अगर बुरा न लगे तो कृपया कमरे का दरवाजा बंद करेंगे क्या? संत को यह सुनकर थोड़ी हैरत हुई, फिर भी दरवाजा बंद कर दिया।
Sep 9, 2025 5 tweets 2 min read
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वात पित्त कफ के दोष तीनों को संतुलित करे इस आयुर्वेदिक उपाय से...अंत तक जरुर पढ़े 🧵 Image 1. Image
Sep 1, 2025 10 tweets 3 min read
इतिहास का सबसे दिलचस्प नजारा...दो मिनट की ये पोस्ट आश्चर्यचकित कर देगी..अंत तक जरुर पढ़े🧵

1. 2007 की एक बैठक में, व्लादिमीर पुतिन अपने कुत्ते को जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के सामने ले आए, जिन्हें कुत्तों से डर लगता है। Image 2. व्लादिमीर पुतिन ने अपने साथियों के साथ मिलकर रूस से मुलाकात की और कहा कि वे टैक्टो पर हैं।
Aug 31, 2025 10 tweets 2 min read
क्यों Ethanol पर गडकरी जी को टारगेट किया जा रहा है? थ्रेड में पूरी पोस्ट अंत तक जरुर पढ़े 🧵 Image 1/ जब अमेरिका-यूरोप Ethanol इस्तेमाल करें Green Revolution”
जब भारत करे “Scam”
यही है डबल स्टैंडर्ड का असली चेहरा।

2/ Ethanol मतलब:
✅ किसानों की कमाई बढ़ेगी
✅ पेट्रोल सस्ता होगा
✅ प्रदूषण घटेगा
✅ Import Bill कम होगा
Aug 28, 2025 7 tweets 6 min read
ऋषि पंचमी पर जानिए ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी में अंतर..??

भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों का बहुत महत्त्व रहा है। ऋषि मुनि समाज के पथ प्रदर्शक माने जाते थे और वे अपने ज्ञान और साधना से हमेशा ही लोगों और समाज का कल्याण करते आये हैं। Image ऋषि कौन होते हैं -

भारत हमेशा से ही ऋषियों का देश रहा है। हमारे समाज में ऋषि परंपरा का विशेष महत्त्व रहा है। आज भी हमारे समाज और परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज माने जाते हैं।ऋषि वैदिक परंपरा से लिया गया शब्द है जिसे श्रुति ग्रंथों को दर्शन करने वाले लोगों के लिए प्रयोग किया गया है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है वैसे व्यक्ति जो अपने विशिष्ट और विलक्षण एकाग्रता के बल पर वैदिक परंपरा का अध्ययन किये और विलक्षण शब्दों के दर्शन किये और उनके गूढ़ अर्थों को जाना और प्राणी मात्र के कल्याण हेतु उस ज्ञान को लिखकर प्रकट किये ऋषि कहलाये। ऋषियों के लिए इसी लिए कहा गया है "ऋषि: तु मन्त्र द्रष्टारा : न तु कर्तार : अर्थात ऋषि मंत्र को देखने वाले हैं न कि उस मन्त्र की रचना करने वाले। हालाँकि कुछ स्थानों पर ऋषियों को वैदिक ऋचाओं की रचना करने वाले के रूप में भी व्यक्त किया गया है।
Aug 26, 2025 8 tweets 2 min read
दुनिया की सबसे प्रसिद्ध रहस्यमयी शानदार गणेश मूर्तियाँ...🧵

1. लालबागचा राजा, मुंबई Image 2. सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई)
Aug 22, 2025 10 tweets 8 min read
IPS अफसर ने भिखारिन का रूप धर लिया… दरोगा ने की गलती और फिर जो हुआ…

रात का समय था। आसमान में घने बादल छाए हुए थे, और कहीं दूर से कुत्तों की भौंकने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। एक वीरान सड़क पर, धीमे-धीमे कदम बढ़ाती हुई एक महिला थाने की ओर बढ़ रही थी। उसकी चाल में थकान साफ झलक रही थी। बदन पर फटे पुराने कपड़े, चेहरे पर धूल-मिट्टी, बिखरे बाल और आंखों में डर और उम्मीद का मिला-जुला भाव था। कोई भी उसे देखकर यही सोचता कि यह एक बेसहारा और बेघर महिला है, जो मदद के लिए पुलिस के पास जा रही है। लेकिन हकीकत कुछ और ही थी।Image यह कोई आम महिला नहीं, बल्कि आईपीएस नंदिनी वर्मा थी, जिसने आज अपनी पहचान और वर्दी दोनों छुपाकर ऐसा भेष धारण किया था जिससे वह उस सच्चाई तक पहुंच सके, जो पिछले कुछ दिनों से उसके कानों में फुसफुसाहट की तरह गूंज रही थी।
Aug 20, 2025 7 tweets 5 min read
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जानिए कौन सा रत्न किसको धारण करना चाहिए..अंत तक जरुर पढ़े🧵 Image 💢💢रत्न और मनुष्य-
ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का बेहद महत्व है। ये ऐसी वस्तु है जिन्हें काफी शक्तिशाली माना गया है। ज्योतिष विधा का यह दावा है कि ये रत्न बड़ी से बड़ी परेशानी को अपने प्रभाव से खत्म करने की क्षमता रखते हैं।

💢💢इसे पहनने के लाभ-
रत्नों की दुनिया वाकई जादुई-सी लगती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्न में करिश्माई शक्तियां होती हैं। रत्न अगर सही समय में और ग्रहों की सही स्थिति को देखकर धारण किए जाएं, तो इनका सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है अन्यथा रत्न विपरीत प्रभाव भी देते हैं।

💢💢रत्न कई प्रकार के होते हैं-
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कई प्रकार के रत्न होते हैं। हर रत्न किसी विशेष परेशानी या किसी खास मकसद से ही धारण किया जाता है। यह बत गौरतलब है कि हर रत्न को धारण करने से पहले किसी ज्ञानी ज्योतिषी की राय ले लेनी चाहिए।
Aug 20, 2025 6 tweets 5 min read
एक पत्ता आपकी लीवर, किडनी और हार्ट को 70 साल तक बीमार नहीं होने देगा...🧵 Image पपीता एक ऐसा फल है, जिसे लगभग सभी लोग खाना पसंद करते हैं. आपने यह जरूर पढ़ा होगा कि पपीता खाने के क्या-क्या फायदे हैं? लेकिन आज हम आपको पपीता के पत्तों का रस पीने के फायदे बताने वाले हैं. पपीते के पत्तों में कई तरह के बीमारियों का इलाज संभव है. पपीता का पत्ता आपकी लीवर, किडनी और हार्ट को 70 साल तक बीमार नहीं होने देगा. तो चलिए जानते हैं इसके बारे में। आपने पपीते का सेवन कभी ना कभी तो जरुर ही किया होगा| पपीता को आप सब्जी और फल दोनों बोल सकते है| पपीता जब कच्चा होता है तो इसे लोग सब्जी बनाकर खाते है| वहीँ जब पपीता पाक जाता है तब इसे फल के रूप में खाया जाता है| आपको शायद पता ना हो तो मैं आपको बता दू की पके पपीता में सभी फलो से ज्यादा गुण पाए जाते है| इसलिए अगर आप नियमित रूप से पपीते का सेवन करते है तो आपका शरीर कई बीमारियों से दूर ही रहता है|
Aug 18, 2025 10 tweets 9 min read
गाँव के बाहर छोटा सा शिव मंदिर था, जिसमे एक वृद्ध पुजारी रहते थे, एक दिन एक गरीब माँ अपने नन्हे से बालक को मंदिर के द्वार पर छोड़कर चली गई, बहुत खोजने पर भी पुजारी जी को बालक के परिवार का कुछ भी पता न चला।
जब गाँव का कोई व्यक्ति उस बालक को रखने के लिए तैयार न हुआ तो पुजारी ने भगवान् शिव की इच्छा समझकर उसे अपने पास रख लिया और उसका नाम भोला रखा, गाँव के श्रद्धालु भक्तो से जो कुछ प्राप्त होता,उसी से भगवान् शिव का, पुजारी जी का और बालक भोला का किसी तरह गुजारा चलता था
किसी दिन कम पड़ता तो पुजारी जी बालक और भगवान् को भोग लगाकर स्वयं गंगाजल पीकर दिन गुजार देते, धीरे-धीरे भोला बड़ा होने लगा और अब वह पुजारी जी के कामो मे हाथ बांटने लगा, वृद्ध पुजारी जी के थके-हारे हाथो को कुछ आराम मिलने लगा, इसलिए उन्होने भोला को मंदिर की सफाई, शिव की पूजा,उनको भोग लगाने और उनकी आरती करने की विधि अच्छी प्रकार समझा दी।Image अब वे स्वयं भगवान् शिव के नाम जप और संकीर्तन मे समय व्यतीत करने लगे, एक दिन भगवान् शिव के मंगलकारी शिव नाम का जप करते हुए ही उनके प्राण छूट गए,अब बालक भोला का इस संसार मे भगवान् शिव के सिवा और कोई सहारा न रहा, उसने पुजारी जी की ये तीन बाते कभी नही भूली, भगवान् शिव शंकर को ताजी-गर्म रसोई का ही भोग लगाना, भगवान् को भोग लगाए बिना स्वयं कुछ भी नही खाना ।

भगवान् शिव पर विश्वास रख कर कभी किसी भी वस्तु का संग्रह न करना, बासी भोजन का भी नही, यदि कोई भक्त पहले से बना भोजन या मिठाई मंदिर मे दे जाता, तो बालक भोला उसे गरीबों मे बांट देता, वह ताजी रसोई बनाकर ही भगवान् को भोग लगाता, उसके बाद ही स्वयं प्रसाद ग्रहण करता और यदि बचता तो उसे बांट देता,यदि रसोई बनाने को सामग्री न होती, तो भोलेबाबा और भोला भक्त दोनो गंगाजल पीकर ही रह जाते।

एक बार बरसात का मौसम आया और तीन-चार दिन तक मूसलाधार वर्षा होने से मंदिर मे एक भी भक्त नही झांका, भोला अपने भोलेबाबा को गंगाजल का ही भोग लगाता और उसे ही पीकर रह जाता, भोले बाबा बालक की भक्ति और सहनशक्ति की परीक्षा लेते रहे, किंतु आखिर मे अपने भक्त बालक को भूख से तड़पते देख उनसे रहा न गया, वे सेठ के नौकर का रूप मे धरकर, हाथ मे भोजन सामग्री की पोटली लेकर वर्षा मे भीगते हुए मंदिर के द्वार पर जा पहुंचे,
Aug 13, 2025 9 tweets 3 min read
इतिहास का सबसे दिलचस्प नजारा...दो मिनट की ये पोस्ट आश्चर्यचकित कर देगी..अंत तक जरुर पढ़े🧵

1. डोनाल्ड ट्रम्प और माइकल जैक्सन की गहरी दोस्ती Image 2. ट्रम्प: केवल दो लोग हैं: पुरुष और महिला।"
Aug 13, 2025 6 tweets 4 min read
गृध्रसी= साइटिका का आयुर्वेद से सफल चमत्कारी इलाज...दो मिनट की ये पोस्ट सेव कर सुरक्षित कर लें..अंत तक जरुर पढ़े🧵 Image शरीर में जब कूल्हे से लगाकर एडी तक दर्द की इतनी तेज लहर उठती है जिसे व्यक्ति सहन नहीं कर पाता (और जहाँ हो जिस स्थिति में हो बैठना तब मजबूरी बन जाता हो) लगता है जैसे पैर फट जाएगा ।जांघ और पिंडली के पिछले हिस्से में कूल्हे से नीचे तक एक नस होती है इसमें दर्द होने की स्थिति ही सायटिका कहलाती है।

प्राय: प्रभावित व्यक्ति बांए पैर में कमर से लेकर एड़ी तक एक नस में बहुत ही तेजदर्द की उठती सी लहर जैसे बिजली चमकी हो ऐसा महसूस करता है । सामान्य धारणा के मुताबिक आधुनिक एलोपेथी चिकित्सा में इसका कोई सरल उपचार नहीं दिखता जबकि इस रोग से पीडित व्यक्ति ही इसकी भयावहता को महसूस कर पाता है । आयुर्वेद में इस रोग के उपचार हेतु उपलब्ध जानकारी निम्नानुसार है-Image
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Aug 13, 2025 6 tweets 2 min read
10 दुर्लभ वास्तु टिप्स वास्तु: दिशा ज्ञान...अंत तक जरुर पढ़े🧵

इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है... Image घर में बच्चों के कमरे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स।

1. वास्तु शास्त्र अनुसार बच्चों का कमरा घर की उत्तर दिशा में होना चाहिए। अन्य विकल्प के तौर पर उत्तर पश्चिम कोने में भी बच्चों का कमरा बनाया जा सकता है।

2. अगर कमरा बड़ा हो तो कमरे की उत्तर पूर्व कोने में लकड़ी का छोटा सा मंदिर भी रखना चाहिए, जहां प्रथम पुज्य गणेश और माता सरस्वती की प्रतिमा हो। बच्चों को नियमित पूजा पाठ करने की आदत बनानी चाहिए।