✨✍️ जब भी लिखता हूँ मैं अफ़साना यही होता है ✨
💭 अपना सब कुछ किसी किरदार को दे देता हूँ।🌸
Jan 22 • 10 tweets • 2 min read
@satyagodara सत्या जब शराफ़त का चोला ओढ़ता है तो वह उसे पहनता नहीं, वह उसमें घुल जाता है। ऐसा नहीं कि वह अचानक ईमानदार हो गया हो, बल्कि उसने समझ लिया था कि इस देश में सबसे खतरनाक हथियार ईमानदारी का अभिनय है। बदमाश सीधे बदमाशी करता है, शरीफ़ बदमाशी को सिद्धांत में बदल देता है।
@satyagodara विपुल को यह सब बहुत भाता था। विपुल कभी क्रिकेटर था इतना पुराना कि अब गेंद उसे पहचानने से इंकार कर दे। अब वह अनुभव का थैला बन चुका था, जिसमें काम की चीज़ें कम और बदबू ज़्यादा थी। कानपुर में उसने सीखा कि गली जितनी तंग होगी, उतनी ही तेज़ छिनरेबाज़ी होगी.उसने ही सत्य को यह सब सिखाया
Jan 19 • 17 tweets • 3 min read
@old_cricketer सत्या जब पहली बार नए कॉलेज के फाटक से भीतर आया, तो उसे लगा जैसे वह किसी और ही दुनिया में प्रवेश कर रहा हो। गाँव की मिट्टी अभी भी उसके जूतों से झड़ नहीं पाई थी और शहर की धूल पहले ही उसके फेफड़ों में भरने लगी थी। वह नया थाकॉलेज में भी और ज़िंदगी की चालों में भी see more..
@old_cricketer रहने को उसके पास एक कसवा जी का संकरा सा कमरा था, पढ़ाई के लिए उम्मीदें थीं और जेब में सीमित साधन। वह सीधा-सादा था, शायद ज़रूरत से ज़्यादा।
कॉलेज में उसकी पहचान सबसे पहले रामाकांत से हुई।