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हिंडनबर्ग को अब SEBI की नोटिस भेजा है इसकी जड़ में है शॉर्ट सेलिंग. हम समझते आए हैं कि शेयर बाज़ार में पैसे बनाने का एक ही तरीक़ा है कि जब भाव ऊपर जाएँगे तो हम पैसे बना लेंगे. दूसरा तरीक़ा है शॉर्ट सेलिंग यानी जब भाव नीचे जाएँगे तब पैसे बनाएँगे.
सरकार लगातार डंका बजा रही है कि GDP तेज़ी से बढ़ रही है. इसी GDP ग्रोथ में छिपा है प्राइवेट खपत का आँकड़ा यानी आप और हम जो पैसा खर्च करते हैं. पिछले वित्त वर्ष में GDP ग्रोथ 7.6% रही लेकिन प्राइवेट खपत 3.6%. लोग खर्च नहीं कर रहे है. महंगाई,आमदनी ना बढ़ना कारण हो सकते हैं.
सहारा का मूल काम था लोगों के पैसे जमा करना और उसे ब्याज समेत लौटा देना.RNBC रेसिडुल नॉन बैंकिंग कंपनी का लाइसेंस था. ये काम ठीक ही चल रहा था सहारा की मुश्किल बढ़ी जब उसने बाक़ी बिज़नेस खोले. नए बिज़नेस के लिए पैसों का एक सोर्स लोगों के डिपॉजिट थे . सहारा को डिपॉजिट के हर ₹100 में से 80 सरकारी बॉन्ड में लगाने थे बाक़ी ₹20 कंपनी जहां चाहें वहाँ लगा सकती थी. ये नए बिज़नेस पैसे नहीं बना पाएँ चाहे एयरलाइंस हो या होटल या फिर मीडिया का कारोबार. इससे सहारा का नाम तो बड़ा होता चला गया लेकिन पैसा डूबता रहा.
गौतम अदाणी इस साल की शुरुआत में दुनिया के तीसरे नंबर के अमीर आदमी थे. इस साल नंबर एक पर पहुँचने का चांस था. हुआ उल्टा. अब वो 23वें नंबर पर है. हिंडनबर्ग ने जनवरी में आरोप लगाया कि ग्रुप अपने शेयरों की क़ीमत ख़ुद ही बढ़ाता है. बही खाते में भी गड़बड़ है.फिर शेयरों में गिरावट हुई.
सहारा ग्रुप के प्रमुख सुब्रत रॉय ख़ुद ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से 1978 में कारोबार शुरू किया. सब्ज़ी वाले , रिक्शे वाले बैंक में खाता खोल नहीं पाते थे. सहारा के एजेंट हर रोज़ इनसे पैसे लेते थे. एक रुपया भी डिपॉजिट में लिया जाता था. देखते देखते 10- 15 साल में सहारा का काम देश भर… https://t.co/lRRubwca5Dtwitter.com/i/web/status/1…
संजय मिश्रा 1984 बैच के IRS अफ़सर हैं . उन्हें नवंबर 2018 में ED का डायरेक्टर दो साल के लिए बनाया गया था. 13 नवंबर 2020 को सरकार ने उनका कार्यकाल बढ़ाकर तीन साल कर दिया था. इसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने तीन साल के कार्यकाल को सही ठहराया था लेकिन आइंदा एक्स्टेंशन देने से… twitter.com/i/web/status/1…
‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ का इस्तेमाल अर्थशास्त्री राज कृष्ण ने 1978 में इस्तेमाल किया था. भारत 1947 में अंग्रेजों से आज़ाद हुआ. आज़ादी के 30-35 साल तक भारत की GDP 3-3.5% की रफ़्तार से बढ़ती रहीं. राज कृष्ण ने इसे ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ कहा था.