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देगी लेकिन डॉक्टर बिल वापिस लेने के लिए सड़क पर हैं।
कि ये एक्टिंग से कुछ अलग करना चाह रहे हैं जो बचकाना लग रहा था कोई अनुपम खेर के रोने के सीन पर गौर करेगा तो समझ जाएगा लेकिन रिव्यू करने वालों ने एक्टिंग पर या फिल्म की कमियों पर बात नहीं की। कोई निर्देशक को सैल्यूट कर रहा था कोई 5 स्टार दे रहा था तो कोई कह रहा था आपकी पॉलिटिकल
तरह मंडराते हैं
किसान साथ थे,बुद्धिजीवी उनके साथ थे। वो जहां जाते, जनसमुद्र उमड़ आता। क्या इस ताकत से वो सर्वशक्तिमान इंदिरा को हिला पाए?? नहीं।
के लिए लाखों लोग जमा होते हैं और ये वो शख्स हैं जिनके उल्टी-सीधी बातों के कई वीडियो वायरल हो चुके हैं लेकिन फिर भी इन्हें सुनने देखने वालों की भीड़ कम नहीं होती.परसों भी लाखों की भीड़ जुटी थी जिसमें भगदड़ मचगई कई लोग कुचल गए एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई कई बुजुर्ग घायल हुए हैं
चुनौती दे ..... बड़बोल नही होना चाहिए कि नेहरू ने हिन्दू कोड बिल लाकर ऐसा करके दिखाया था परंतु तब उनके साथ एक विशाल बहुमत था और स्वतंत्रता संग्राम से उपजे मूल्यों की विरासत .... राहुल इन सब मामलों में बिल्कुल विपन्न है परंतु फिर भी यदि वह ऐसा कर रहे है और सोच समझ कर ,जानबूझ कर,
पी पीचिदंबरण वित्त मंत्री थे. 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर यूपीए सरकार ने शिक्षा का बजट 35 हज़ार करोड़ कर दिया था. हम सब खुश थे.
(बेग़म नवाब शुजाउद्दौला) की किसी मन्नत के पूरा होने पर बनवाया था...तब से ये हनुमान मंदिर अवध के लोगों की श्रद्धा का केंद्र बन गया। लखनऊ में छोटे-बड़े सब मिलाकर क़रीब आठ हज़ार हनुमान मंदिर हैं, अलीगंज के हनुमान मंदिर के साथ साथ इन सभी मंदिरों के किवाड़ जेठ महीने के मंगलवारों को