उजड़ा पन्ना Profile picture
भू राजनीति और रक्षा रणनीति के जानकार बाकी इतिहास का एक एक पन्ना उजड़ा है .. !
Apr 10 5 tweets 1 min read
बंगाल में क्रांतिकारी आंदोलन ने अपनी प्रेरणा बंकिम चंद्र चटर्जी के लेखन और स्वामी विवेकानन्द के उपदेशों से ग्रहण की। क्रांतिकारी मत के लिए दूसरे उल्लेखनीय सहायक थे, अरबिंदो घोष। प्रमथनाथ मित्रा ने 1901 में 'अनुशीलन समिति', जिसका नाम बंकिम के लेखन से लिया गया था🧵+ नामक संगठन की स्थापना की। अरबिंदो घोष, सी. आर. दास, बरिन्द्र घोष और जतिन बनर्जी भी इसमें शामिल हो गए। भगवद्गीता का प्रयोग कई प्रकाशनों में अलग-अलग तरीके से किया गया। आनंद मठ की हर्ष ध्वनि 'बंदे मातरम्' (जय माँ) बंगाल में उग्रवादी पार्टी का सिंहनाद बन गई। +
Jun 4, 2025 11 tweets 2 min read
सुकून कहा हैं? भटकते रहते हैं सब इसके लिए यहां से वहां कोई अर्थ नहीं निकलता है इसका। जीते जी छोड़ो मरने के बाद भी बहुतों को नहीं मिलता होगा ... अगर आत्मा होगी तो भटक ही रही होगी.. कर्म के अनुसार सब यही भोगकर जाना है। बहुतों को देखता हूं अपने सुकून के चक्कर में दूसरों का खून पिए पड़े हैं...
Dec 23, 2023 11 tweets 3 min read
कौन है जो लोगों को ठोक रहा है शत्रु देश में घुसकर शत्रुओ को..? "अज्ञात हमलावर" खबरों में,चर्चे में ,अखबार की सुर्खियों में बना हुआ हैं। चुन चुन के ठोके जा रहे है सब अपने ही घर में । किसी को जहर देकर मार दिया जा रहा है तो किसी ऑन द स्पॉट गोली मारकर काम तमाम हो रहा है+👇 किसी को चलती गाड़ी से भेड़ बकरियों की तरह उठा लिया जा रहा बाद में 72 हूरो के पास पहुंचा दिया जा रहा हैं। इसमें कोई सक नही हैं की जितने भी एनआईए के हिट लिस्ट में है धीरे धीरे सब मारे जा रहे है सबके मारे जाने की स्थिति एक सी हैं।+
Oct 30, 2023 12 tweets 3 min read
बहुत भसड़ मचा हुआ है देश में । एक अलग ही स्तर का बकइती हो रहा है। क्या फर्क पड़ता है हमे फिलिस्तीन में लोग मरे या जिए? रही बात समर्थन की तो हमारा समर्थन उसी को जो इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रहा है। हमने लाखो लोगो की जान गवां दी है इस तथाकथित जिहादी आतंकवाद से।+👇 फिर भी कुछ लोगो को कीड़ी काट रही है। भारत में बैठा लिबरल गैंग ऐसे रोना रो रहा है मानो ये युद्ध भारत की भूमि पर लड़ा जा रहा है और भारत के लोग मारे जा रहे है। हद है मतलब भारत जबरदस्ती का इसमें क्या उखाड़ने जाय? कोई लड़े मरे कटे क्या ही फर्क पड़ता है।
Oct 21, 2023 13 tweets 3 min read
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 में "आजाद हिन्द सरकार" की स्थापना की थी। 80 साल पहले देश से बाहर बनी 'आज़ाद हिंद सरकार' अखंड भारत की सरकार थी, अविभाजित भारत की सरकार थी। ब्रिटिश राज का सर्वनाश करने के लिए नेताजी की भी हद तक जा सकते थे। + 🧵 Image नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को शामिल किए जाने का पुरजोर विरोध किया था जिसके बाद उन्हें जेल डाल दिया गया। उन्होंने ने भूख हड़ताल शुरू कर दिया फिर क्या अंग्रेजो को थक हार के जेल से निकाल कर उन्हें उनके ही घर में नजरबंद कर दिया गया था। +
Oct 8, 2023 18 tweets 4 min read
फिल्मों और मीडिया वालो को पैसे देकर अपने बारे में जो नैरेटिव फैलाए या बनाए है कई सालो से दुनियां के कुछ तथाकथित उच्च स्तर के खुफिया विभाग वाले उसी लोग सच मान बैठें है🐼 देखा जाय तो इनके असफल ऑपरेशन को भी फिल्मों में एक सफल ऑपरेशन बताकर उसपर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। मीडिया में बढ़ा चढ़ा कर ऐसे प्रस्तुत किया जाता है की दुनिया के किसी भी कोने में कोई व्यक्ति पेड़ के पीछे खड़ा होकर चाट पकौड़ी खा रहा हो या मूत रहा हो, ये सब देख लेते है🥲🐼
Oct 4, 2023 13 tweets 3 min read
गजब का तमाशा देखने को मिल रहा है देश में। हर दिन कोई न कोई न कोई नया बखेड़ा खड़ा हो ही जाता हैं। सोशल मीडिया के जमाने में कोई खबर किसी से छिपी नही रहती है देर सबेर गलत सही लोगो के पास पहुंच ही जाता है। 🧵+ तमाम फैक्ट चेकर भी है जो फैक्ट चेक करके के बताते रहते है खबर की सच्चाई अपने चैनलों के माध्यम से लेकिन क्या हो जब फैक्ट चेकर ही चोकर निकले यानी फर्जी तथ्यों को सामने रखकर उलूल जुलुल खबरों को हवा दे? +२/n
Sep 22, 2023 6 tweets 1 min read
1953 - सीआईए ने ब्रिटेन के साथ मिलकर ईरान में तख्तापलट करवाया। निर्वाचित प्रधानमंत्री को हटाकर ईरान के शाह रजा को वागडोर सौंपी। दरअसल, इसकी मुख्य वजह प्रधानमंत्री द्वारा तेल के
उद्योग का राष्ट्रीयकरण का प्रयास था। 1979-ईरान में एक नये नेता उभरे अयातुल्लाह खुमैनी। वह पश्चिमीकरण और अमेरिका पर ईरान की निर्भरता के सख्त खिलाफ थे। खुमैनी के नेतृत्व में ईरान में असंतोष उपजने लगा। शाह को ईरान छोड़ना पड़ा.1979 को खुमैनी निर्वासन से लौट आए। इसे ईरानी क्रांति के नाम से जाना जाता है।
Sep 14, 2023 12 tweets 3 min read
नैतिकता का ज्ञान झाड़ने वालो की कमी नही है। आज़ादी के समय भी कुछ ऐसा ही। थे कुछ लोग करते तो कुछ नही थे लेकीन जो करता था उसका विरोध करने पहुंच जाते थे। इन लोगो का अहम योगदान था देश की जनता को नपुंसक बनाने में क्रांतिकारियों के खिलाफ ऐसा माहौल बना दिए थे आम जनमानस केमन में की लोग👇 उन्हे चोर डाकू और हत्यारा समझने लगे थे। ऐसा सत्य अहिंसा का चूरन खिलाया गया की लोग अंग्रेजो से लाठी द्वारा पीटे जाते थे और विरोध में एक घुसा तक नही जड़ते थे लाठियाते लाठियाते कितने निकल लिए नमन है इन्हे भी। दक्षिण अफ्रीका से आने वाला जो भषण वहा मचाया था पहले विश्व युद्ध में👇
Sep 9, 2023 9 tweets 2 min read
जनरल कासिम सुलेमानी ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खुमैनी के बाद देश का दूसरा सबसे ताकतवर शख्स था
अमेरिका ने उन्हें और उनकी कुस फोर्स को सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों की मौत का जिम्मेदार करार देते हुए 'आतंकवादी घोषित कर रखा था।
#America #Iran #सुलेमानी #geopolitics 🧵+ सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता थाउनकी बड़ी सफलता यह थी कि उन्होंने यमन से लेकर सीरिया तक और इराक से लेकर दूसरे मुल्कों तक रिश्तों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया ताकि इन देशों में ईरान का असर बढ़ाया जा सके

#WestAsia #रणनीति 2/🧵