पंडित विशाल श्रोत्रिय 🇮🇳 Profile picture
सर्वे भवन्तु सुखिनः 🚩 जय श्री परशुराम ABBEP
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Oct 3 16 tweets 3 min read
प्रश्न = प्रत्येक मन्वन्तर काल में कौन-कौन से सप्तऋषि रहे हैं ?

देखिए आकाश में 7 तारों का एक मंडल नजर आता है। उन्हें सप्तर्षियों का मंडल कहा जाता है। इसके अतिरिक्त सप्तर्षि से उन 7 तारों का बोध होता है, जो ध्रुव तारे की परिक्रमा करते हैं उक्त मंडल के तारों के नाम भारत के महान 7 Image संतों के आधार पर ही रखे गए हैं। वेदों में उक्त मंडल की स्थिति, गति, दूरी और विस्तार की विस्तृत चर्चा मिलती है।

ऋषियों की संख्या सात ही क्यों ?

तो देखिए सप्त ब्रह्मर्षि, देवर्षि, महर्षि, परमर्षय:। कण्डर्षिश्च, श्रुतर्षिश्च, राजर्षिश्च क्रमावश:।।
Oct 2 7 tweets 2 min read
प्रश्न = क्या आपको लगता है कि सफलता के लिए भाग्य महत्वपूर्ण है ?

जो भी व्यक्ति इसका मर्म समझ गया, समझ लीजिए कि वह ईश्वर का नज़दीकी बन चुका है। इसके दो स्टेप हैं।

1-पहला स्टेप—वहाँ पहुँचने के लिए वर्षों के अवलोकन के बाद दो बातें समझ में आएँगी। पहली यह कि यदि भाग्य (डेस्टिनी/प्रारब्ध) है तो उसे प्राप्त करने के प्रयास होने लगते हैं। अगर किसी के भाग्य में टेनिस का चैम्पियन बनना लिखा है तो आप देखेंगे की वह कम आयु से ही कई घंटे प्रैक्टिस कर रहा है।
Oct 2 8 tweets 2 min read
प्रश्न: संसार मै सही गलत क्या है

इस संसार मे सही गलत कुछ नही होता। सिर्फ कारण और परिणाम होता है। नियति होती है। तुमने आग में हाथ डाला तो जलेगा ही। तुम जल में तेरोगे नही तो डूबोगे ही। तुम जैसे दूसरे के साथ करोगे वैसा तुम्हारे साथ होगा। इसमे क्या सही और क्या गलत है? कुछ नही। सही गलत मनुष्य द्वारा बनाये गए मापदंड है जो मानव को मन के अनुकूल लगे तो सही और न लगे गलत। कुछ समय पहले मैं एक आचार्य जी के पास गया था। उनकी उम्र 83 साल थी। घर मे गया तो वो माला जप कर रहे थे। घर में 6 लोग हुआ करते थे 10 साल पहले तक। अच्छा खासा भरापूरा परिवार था।
Oct 1 4 tweets 1 min read
प्रश्न = कर्म कितने प्रकार के होते हैं ? उनमें श्रेष्ठ कौन सा कर्म माना जाता है ?

कर्म मुख्यता तीन प्रकार के होते हैं

१. संचित कर्म २. प्रारब्ध कर्म और ३.क्रियमाण कर्म।

जैसे हम बैंक में पैसा जमा करते जाते हैं इस प्रकार काफी अर्से से (जमा करना) एकत्र होते होते संचित कर्म कहलाते हैं, उन संचित कर्मों में से जो कर्म फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं उसे प्रारब्ध कर्म कहा जाता है (भाग्य को प्रारब्ध भी कहते हैं) यानी कि संचित बैंक अकाउंट में एक करोड़ रुपए है लेकिन टैक्स सेविंग फिक्स डिपाजिट (F.D) के रूप में है जो आप कुछ साल नहीं निकाल सकते
Sep 30 8 tweets 2 min read
प्रश्न = इन्द्र कौन थे उन्होंने ऐसी कौन सी दुनिया बसाई जो स्वर्ग कहलाई ?

इंद्र क्या है :— इंद्र एक पद का नाम है, इंद्र देवताओं पर शासन करते है और अमरावती उनकी राजधानी है। अमरावती को ही हमारे धर्म में स्वर्ग कहा गया है। प्रत्येक मनवंतर का एक इंद्र होता है। वर्तमान में जिस इंद्र का शासन चल रहा है उनका नाम है — पुरंदर । पुरंदर से पहले 5 इंद्रों ने स्वर्ग पर शासन किया था जिनके नाम हैं— यज्न, विपस्चित, शीबि, विधु और मनोजव।

पुरंदर के बाद बाली, अद्भुत, शांति, विश, रितुधाम, देवास्पति और सुचि इंद्र पद पर बैठेंगे।
Sep 29 4 tweets 1 min read
शायद यह प्रसंग बहुतेरे भूले_ भटकों को राह पर ले आए

एक बार मेरे शहर में एक प्रसिद्ध बनारसी विद्वान् ज्योतिषी का आगमन हुआ माना जाता है कि उनकी वाणी में सरस्वती विराजमान है वे जो भी बताते है वह 100 % सच होता है 501 / - रुपये देते हुए एक मान्यवर ने अपना दाहिना हाथ आगे बढ़ाते हुए ज्योतिषी को कहा महाराज मेरी मृत्यु कब कहां और किन परिस्थितियों में होगी ? ज्योतिषी ने उस मान्यवर की हस्त रेखाऐं देखीं चेहरे और माथे को अपलक निहारते रहे स्लेट पर कुछ अंक लिख कर जोड़ते घटाते रहे बहुत देर बाद वे गंभीर स्वर में बोले मान्यवर आपकी भाग्य रेखाएँ कहती है कि
Sep 29 9 tweets 2 min read
प्रश्न : गॉड पार्टिकल या ब्रम्ह कण का भारतीय पुराणों के साथ क्या सबंध है ?

यूरोपीय वैज्ञानिकों ने जिस हिग्स बोसॉन से मिलते-जुलते कण को खोजने का दावा किया है उसका व बिग बैंग सिद्धांत का सबसे
पहला जिक्र वेदों में आता है। वैज्ञानिकों ने हिग्स बोसॉन को गॉड पार्टिकल यानी ब्रह्म कण का नाम दिया है। सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद में वर्णित नासद सूक्त में प्राचीन मानव और अंतरिक्ष को समझने की उसकी मूलभूत
जिज्ञासा का पता चलता है। नासद सूक्त में कहा गया है कि सृष्टि से पहले कुछ भी नहीं था, न आकाश था, न जमीन, न जल। इस श्लोक में ब्रह्म की चर्चा करते हुए बताया गया है
Sep 28 11 tweets 2 min read
श्रीमद्भागवत गीता की मूल शिक्षा क्या है?

श्रीमद्भगवद्गीता की मूल शिक्षा के विषय में आपका प्रश्न है।

जैसा की सर्वविदित है कि गीता को योगशास्त्र माना जाता है जिसमें योग मार्ग द्वारा आत्मकल्याण के मार्ग को प्रशस्त करने का उपदेश दिया गया है। योग के अनेक अंग हैं लेकिन श्री कृष्ण ने कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग को ही कल्याण का प्रमुख साधन माना है। भगवान् का स्पष्ट मत है कि कर्म के प्रवाह से सम्बन्ध का टूट जाना ही जीवन का लक्ष्य है और यह लक्ष्य उपर्युक्त तीनों मार्गों से प्राप्त हो सकता है।
Sep 27 4 tweets 2 min read
प्रश्न: ऐसे कौन से काम हो सकते है जो हमें कभी नहीं करने चाहिए ?

1:-दूसरों से अपेक्षा करना बंद करें। अपेक्षाएं केवल निराशा की ओर ले जाती हैं।

2:-अपनी गलतियों और असफलताओं के लिए कभी भी किसी को दोष न दें।

3:- जब आप भावुक हों तो कभी कोई वादा न करें। 4:-कभी भी ऐसा कुछ न कहें या न करें जिससे किसी पर नकारात्मक प्रभाव पड़े।

5:-अपनी गलती को स्वीकार करने में कभी भी शर्म महसूस न करें।

6:-कभी भी अपने सभी दोस्तों को घर न ले जाएं। चयनात्मक रहें। हर किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

7- कभी भी अपनी पर्सनल लाइफ को सबके साथ शेयर न करें
Sep 27 12 tweets 3 min read
प्रश्न: श्रीलंका में रामायण की कहानी किस प्रकार बताई जाती है ?

श्री लंका मे रामायण की कहानी मे रावण का महिमामंडन बताया जाता है, वहाँ पर रावण को खलनायक नहीं एक विद्वान पंडित अजेय योद्धा, प्रतिभा संपन्न, वैभवशाली एवं समृद्धिवान माना जाता है। लंका निवासी रावण के प्रति बहुत श्रद्धा रखते हैं।उदाहरण के लिए एक कथा प्रसंग देखिए …

श्री राम जी जब समुद्र में सेतु निर्माण के बाद लंका विजय की कामना से विश्वेश्वर महादेव के लिंग विग्रह स्थापना के अनुष्ठान हेतु वेदज्ञ ब्राह्मण और शैव रावण को आचार्य पद पर वरण करने का विचार किया।।
Sep 26 13 tweets 3 min read
प्रश्न : समुद्र मंथन के दौरान कौन-कौन से 9 रत्न निकले थे और उनकी क्या महत्व थे ?

1 हलाहल (विष) : समुद्र मंथन से सबसे पहले विष निकला, जिसे भगवान शिव ने ग्रहण कर लियाl इससे तात्पर्य है कि अमृत हर इंसान के मन में स्थित हैl यही बुरे विचार विष हैl हमें इन बुरे विचारों को परमात्मा को समर्पित कर देना चाहिए और इनसे मुक्त हो जाना चाहिएl

2 कामधेनु(गाय) : समुद्र मंथन में दूसरे नंबर मै निकली कामधेनुl वह यज्ञ की सामग्री उत्पन्न करने वाली थीl इसलिए ऋषियों ने उसे ले लिया कामधेनु प्रतीक है मन की निर्मलता कीl
Sep 26 11 tweets 3 min read
प्रश्न : आदतें बदलने का सबसे अच्छा तरीका क्या है ?

1. आदतों को बदलने के लिए सबसे पहले आपको अपने दिमाग के बारे में एक आईडिया होना चाहिए।

2. जब आप किसी चीज के बारे में सोचते हैं या कई बार कुछ करते हैं, तो आपके दिमाग में शारीरिक बदलाव होते हैं। 3. आपका अनुभव, भावनाएं और दृष्टिकोण सभी आपकी स्मृति में अंतर्निहित हैं।

4. वैज्ञानिकों ने देखा है कि दिमाग हर सेकेंड में बदलता है। आप क्या सोचते हैं, क्या सुनते हैं, क्या देखते हैं, क्या करते हैं -
Sep 24 4 tweets 1 min read
जब सारे विश्व में एकेश्वरवाद पर आध्यात्मिक शोध चल रहे थे तब भारत में रामकृष्ण परमहंस जैसे विलक्षण संत काली की मूर्ति से घंटों बतियाते थे...... शुरूआती दिनों में लोग उन्हें पागल समझते थे लेकिन धीरे-धीरे लोगों को समझ आया कि रामकृष्ण के भीतर कुछ घट गया है....... काली को भोग लगाना उनकी नियमित दिनचर्या थी..! भोजन की थाली लेकर मंदिर के गर्भगृह में घुसते तो निश्चित नहीं था कि कब बाहर निकलें..एक दिन उनकी पत्नी शारदा उन्हें खोजते हुए मंदिर जा पहुंची..श्रद्धालु जा चुके थे और परमहंस गर्भगृह के भीतर भोग लगा रहे थे..
Sep 23 7 tweets 2 min read
प्रश्न : मैं अपने बचपन से ही बहुत पूजा पाठ करता रहा हूँ पर मेरे जीवन में कष्ट और दूख के अलावा कुछ आया ही नहीं, तो क्या मेरी श्रद्धा में कमी रह गई या प्रारब्ध का दोष ज्यादा है ?

देखिए आप जैसे लोगो के लिए भगवान ने एक विशेष और विलक्षण बात कही है। इसे बार बार पढ़िए, दोहराइये, समझिए, इसका मनन कीजिये- भगवान कहते है कि-

यस्याहमनुगृह्णामि हरिष्ये तद्धनं शनैः। ततोऽधनं त्यजन्त्यस्य स्वजना दुःखदुःखितम् ॥

अर्थार्त- जिस पर मैं कृपा करता हूँ, उसका सब धन धीरे-धीरे छीन लेता हूँ। जब वह निर्धन हो जाता है, तब उसके सगे-सम्बन्धी उसके
Sep 22 11 tweets 3 min read
#THREAD

आज कृष्ण रासलीला के बारे में पूरी तरह से जानेंगे और गलत जानकारी को बहार करेंगे।

तो चलिए वास्तविक प्रमाण के साथ धागा शुरू करें .. भगवान और गोपिका द्वारा बनाई गई रासलीला का कोई यौन संबंध नहीं है, जैसा कि गलत तरीके से समझा जाता है। याद रखें कि इस दौरान महाराजा कृष्ण की उम्र मुश्किल से 8-10 वर्ष के बीच थी (जैसा कि कृष्ण ने 11 वर्ष की उम्र में गोकुल छोड़ दिया था)। बच्चे का हावभाव अश्लील कैसे हो सकता है।
Sep 22 22 tweets 5 min read
ब्रह्मचर्य है जिनकी पहचान,ऐसे महावीर हनुमान का हम गुणगान करते हैं!!!!!!!!

जब भगवान अवतार धारण करते हैं, तब वे अकेले ही प्रकट नहीं होते हैं; उनके साथ अनेक देवतागण भी अपने अंशरूप में अवतरित होते हैं । जब पृथ्वी पर रावण (जिसका अर्थ है संसार को रुलाने वाला) का आतंक छा गया, सर्वत्र त्राहि-त्राहि मच गयी, तब भगवान श्रीराम ने सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के संहार के लिए अवतार धारण किया । उस समय अनेक देवतागण वानरों और भालुओं के रूप में प्रकट हुए थे ।कैलासपति भगवान शंकर ने
Sep 20 53 tweets 11 min read
(((((ब्रह्मरस रहस्यम्)))))

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प्रहलाद का कुल बड़ा ही विचित्र कुल हैं। इसी कुल में अनेकों दैत्य ऋषि हुए हैं वास्तव में प्रहलाद का कुल दैत्य और ऋषियों का मिला जुला एक अद्भुत सम्मिश्रण है। शुम्भ निशुम्भ प्रहलाद के कुल में ही हुए जिसे देवी ने स्वयं अपने हाथों से मारा साक्षात् जगदम्बिका से संस्पर्शित हुए वे, हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दोनों विष्णु के द्वारा संस्पर्शित हुए, अंधक का वध शिव ने किया, वे शिव के द्वारा संस्पर्शित हो शिव गण बन बैठे। प्रहलाद की एक बहिन थी सिंहिका, जिनके पुत्र राहु थे एवं अमृत मंथन के समय राहु ने
Sep 20 6 tweets 2 min read
क्या यह आधुनिक तकनीकों वाला युग नींव खोदे बिना एक गगनचुंबी इमारत के निर्माण की कल्पना कर सकता है?

यह तमिलनाडु का बृहदीश्वर मंदिर जिसे स्थानीय रूप से तंजाई पेरिया कोविल के नाम से जाना जाता है और इसे राजराजेश्वरम भी कहा जाता है। यह बिना नींव का मंदिर है । इसे इंटरलॉकिंग विधि का उपयोग करके बनाया गया है इसके निर्माण में पत्थरों के बीच कोई सीमेंट, प्लास्टर या किसी भी तरह के चिपकने वाले पदार्थों का प्रयोग नहीं किया गया है इसके बावजूद पिछले 1000 वर्षों में 6 बड़े भूकंपो को झेलकर भी आज अपने मूल स्वरूप में है।
Sep 20 4 tweets 1 min read
प्रश्न : भगवान में आसक्ति का मतलब भक्ति है, लेकिन जिस भगवान को हमने देखा नहीं है, छुआ नहीं है, महसूस नहीं किया है, उससे प्रेम या आसक्ति कैसे हो सकती है ?

देखिए भय और विश्वास दोनों ऐसी चीज़ें है जो हमे उसमें रखनी होती है जिसे हम प्रत्यक्ष नही देख रहे। परन्तु गजब की बात यह है कि हम फिर भी भय को चुन रहे है। विश्वास को नही आपने कहा कि भगवान को नही देखा और न ही महसूस किया तो फिर कैसे विश्वास कर ले? वैसे ही करे जैसे अपने भविष्य का भय ग्रहण किया। मनुष्य को भविष्य की चिंता है। भय है। जबकि भविष्य को आपने न तो महसूस किया है
Sep 19 30 tweets 6 min read
प्रश्न : आप बुद्धिमान लोगों की पहचान कैसे कर सकते हैं?

किसी ने मुझसे एक सवाल किया था। उसको दिया जवाब यहाँ सटीक बैठता है। सवाल : जी, मेरा एक दोस्त मिला और अजीब लगा जब उसने कहा कि परमात्मा, ज्ञान, अध्यात्म इन बकवास बातों को छोड़ो और खाने कमाने की बात सुनाओ।

जवाब: जैसे एक बच्चे में बुद्धि का विकास कम रहता है तो उसे कुछ नहीं पता कि कौन मर रहा है, कौन तड़प रहा है ,
Sep 19 22 tweets 5 min read
प्रश्न : मुझे अध्यात्म के मार्ग पर चलना अच्छा लगता है लेकिन इस से मेरा घर नहीं चलेगा, क्या करूँ अध्यात्म छोड़ दूं ?

अध्यात्म वाले का घर तो और बेहतर चलने लगता है। उसकी बुद्धि प्रखर होने लगती है। काम काजों में निपुणता और सरलता आने लगती है। क्यूंकि फ़ालतू के विचारों से दूर रहने जो लगता है उसकी सहज बुद्धि काम करने लगती है जो दुनियादारी के बोझ से दबी पड़ी रहती है। वह बेहतर ढंग से भावनाओ को डील करना सीख जाता है। दूसरों को भी बेहतर ढंग से देख समझ पाता है। संसार में, मार्किट में दूसरे को समझना