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बचपन से हमें यही सिखाया गया बिस्तर पर लेट जाओ, आंखें बंद करो, 8 घंटे बाद तरोताजा उठोगे।

रात को सोने से पहले शवासन में लेटकर सिर्फ एक सवाल पूछने की तकनीक हमने पहले सीखी थी। लेकिन वो अधूरी है अगर सुबह सही तरीके से जवाब न लिया जाए। आपका सबकॉन्शियस माइंड रात भर उस सवाल को प्रोसेस करता रहता है। न्यूरोसाइंस इसे मेमोरी कंसोलिडेशन कहती है। ब्रेन न्यूरल पाथवे रिऑर्गनाइज करता है और आपके सवाल का जवाब तैयार करता है। लेकिन सुबह आंख खुलते ही अगर आप फोन उठा लेते हैं तो वो नाजुक जवाब हमेशा के लिए खो जाता है। स्क्रीन की नीली रोशनी और नोटिफिकेशंस आपको तुरंत बीटा स्टेट में ले जाते हैं जहां वो ओस की बूंद जैसा जवाब भाप बनकर उड़ जाता है।
Alpha waves (8–12Hz) are the brain's signature of calm, wakeful relaxation, the mental state you experience in those moments of quiet focus, free from anxiety or distraction. During meditation, alpha power increased steadily and rapidly across all participants.
स्वस्थश्च रूपवान्वित्तसम्पन्नो ज्ञानवाँस्तथा । सर्वप्रियो यशस्वी च अश्वयुज्जातको भवेत् ॥०२॥
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वेदांत स्पष्ट कहता है कि आत्मा और शरीर दो नहीं हैं। जो यह मानता है कि “मैं शरीर हूँ और आत्मा अलग है”, वह अभी भ्रम में है। जब साधक उस पराकाष्ठा पर पहुँचता है, तब अनुभव होता है कि परमात्मा कहीं आता-जाता नहीं, वह नित्य है, शाश्वत है, सत-चित-आनंद स्वरूप है।
2 ) हमारे वेदों के समय से साँसों के विज्ञान, उसके प्रयोग की कला के शास्त्र और जानकार रहे हैं। लेकिन हजारों सालों के अंतराल, तत्कालीन संस्कृत भाषा की जटिलता और किसी दूसरे को न बताने के स्वार्थ के चलते यह विज्ञान लुप्त-सा हो गया है। इसलिए साँस के विज्ञान से 99.99 प्रतिशत लोग अनजान ही रह जाते हैं।
1 ) रविंद्र कौशिक की यह कहानी किसी फिल्म से कम नहीं – थिएटर से जासूसी तक का सफर, पहचान बदलना, पाकिस्तानी सेना में शामिल होना और फिर एक दर्दनाक अंत। जानिए इस अनसुनी लेकिन दिल दहला देने वाली कहानी को!